Jump to Navigation

डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

इल्ट्रोसारस

बारहवें देवासुर संग्राम के उपरान्त देवताओं,असुरों और दानवों में समझौते की बातचीत प्रारम्भ हुयी। यह निश्चित हुआ कि असुरा गण दजला और फरात नदियों के बीच वाले समस्त भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित करें और दानव लोग जो जननी दनु की संतान थे, मध्य क्षेत्र की उस तीव्र गति से बहती हुयी नदी, जिसका नामकरण दनूब हुआ था के उस पार के समस्त भू-क्षेत्र पर अपना अधियत्य जमायें। सभी ने बात मान ली यह जान कर उनके पिता महर्षि कश्यप और माताएँ, दिति, अदिति और दनु प्रसन्न हों गयीं। महर्षि कश्यप आधुनिक कैस्पियन सागर-उन्हें के नाम पर विख्यात कश्यप सागर की सुरम्य भूमि पर स्थित, अपने आश्रम में आनन्द से, पत्नियों के साथ

रचना: 

छोटे साहब

    अनेक शतब्दियों पूर्व, नचिकेता ने यमराज से ब्रह्मज्ञान के, लिए आत्मा के विषय में ज्ञान के लिए जिज्ञासा प्रकट की थी। यमराज ने उसे आत्मा के विषय में बताया था। वह आत्म-ज्ञान से युक्त हो गया।
    पर सुबोधन को आत्म ज्ञान कौन देता है, और कैसे देता है क्या आप जानते हैं? यदि नहीं तो....।

रचना: 

उसने सिकन्दर को मार डाला

उसने इतिहास का अंग भंग कर दिया। उसने सम्राटों को नष्ट कर दिया और उनके साम्राज्यों का विनाश कर दिया। उसी के कारण नई-दिल्ली भारत की राजधानी नहीं रही। उसी के कारण पड़ोसी देश के भौतिकविद और परमाणुम जनक को को लोग गालियाँ देते हैं। मोहम्मद नादिर खाँ हर तरफ घृणा के पात्र हैं। वास्तव में ऐसा कुछ हुआ नहीं। वह एक प्रोफेसर था, क्वाटम फिजिक्स का और उसने अपने को ही, कल्पना के सहारे अवास्तविक बना लिया।

रचना: 

प्राचीन

आज हम संचार क्रान्ति के युग में है। इस संचार क्रान्ति ने अखिल विश्व को संचार सूत्र में बांध कर उसे विश्व-ग्राम में परिवर्तित कर दिया है। फलस्वरूप पश्चिम की सभ्यता एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार के कपाट की अर्गला खुल गयी है। पश्चिम का सांस्कृतिक-समीर, समाचार पत्रों, संचार  उपग्रहों, इन्टरनेट एवं  सर्वोपरि-टेलीविज्ञन के माध्यम  से, हमारे समाज में एक अभिनव-संचार-सांस्कृतिक, उसमें निह

विषय: 

भारतीय वांग्मय में विज्ञान कथाएं: पौराणिक सन्दर्भ

दिक वांग्मय, रामायण, महाभारत, पुराणों और श्रीमद्भागवतादि जो चर्चित भारतीय काव्यात्मक रचनाएं हैं, उनमें उल्लेखित विविध आख्यान, कथाएं भारतीय जीवन के संवेग और संकल्प के बिन्दु हैं। यह आख्यान और मनोग्राही विवरण हमारी सांस्कृतिक शाश्वता, निरन्तरता, सतता के ऊर्जा स्त्रोत हैं, भारतीयता की भागीरथी के अक्षुण्ण प्रवाह के कारक हैं। इन विविधवर्णी आख्यानों और कथाओं की मधुमय, अमृतमय शक्ति है कथ्यों एवं तथ्यों का रोचक रूप में मानवीकरण, जिसके परिणाम स्वरूप अतीत की स्मृतियां आज भी जनमानस में रची बसी सुरक्षित हैं।

विषय: 

बर्बरीक उवाच

कितना अन्तर है, इस प्राकृतिक वायु में, जो अभी भी परिस्थितियों के कारण अपने नैसर्गिक रूप में सुरक्षित है। उन एटामिक-शेल्टरों में, परमाणु रोधी सुरक्षा कक्षों में वास कर रहे व्यक्तियों को यह सौभाग्य कैसे मिल सकेगा। हिमालय के उस ऊंचें शिखर पर बैठा मैं, असुर बालक बर्बरीक पृथ्वी पर चल रहे मृत्यु के नर्तन को, हत्या, मानव हत्या के ताण्डव को जाग्रत होकर तटस्थ भाव से देख रहा हंू। एक पल रुकिये। वह विनाशकारी विस्फोट, परमाणु बम का विस्फोट जो अभी अमेरिका के न्यूयार्क नगर पर हुआ है उसकी सेसमिक वेब्ज, कम्पन युक्त भू-तरंगों की अनुभूति मैं कर रहा हूँ। मैं आप को उन आतंकवादियों की नृशंस गतिविधियों से, जो मानव के मानवता के विनाश के प्रयास में लिप्त हैं, के विषय में बताता रहूंगा।"

उंगलियाँ

इस जगह पर आने की कभी भी उसकी इच्छा नहीं थी पर क्या करे। कोई दूसरा विकल्प भी तो उसके पास नहीं था। उस पर बेहोशी के इंजेक्शन का प्रभाव क्रमशः उसी भाँति छाता जा रहा था जिस प्रकार वर्षा ऋतु में बादल धीरे-धीरे सूर्य को अच्छादित कर लेते हैं। उसका अचेतन मस्तिष्क कार्यरत था।

डॉ. अलबर्तो वापस न आ सके

उसकी गैस चालित पीजो कार का पैडिल, हाँ वह एक्सीलेटर को पैडिल ही कहता था, कुछ ढीला हो गया था। उसे टाइट कराना आवश्यक हो गया...वह ड्राइव करते हुये अगले गैस-फिलिंग स्टेशन पर रुका, मैकेनिक को समस्या बताई और कार से उतर पड़ा। वह गैसे ड्रिवेन कार को पूर्णतः प्रदूषण मुक्त मानता था....इसी कारण वह लेड-विहीन पेट्रोल के स्थान पर गैस-चालित कार,  पीजो कार, चलाता था। फिर इस में प्रदूषण टेस्ट नहीं कराना पड़ता था और न ही किसी प्रकार के फाइन की ही समस्या रहती थी, वह सोच रहा था।

दान

"तुमने राजा रवि वर्मा का नाम तो सुना होगा?"

"हाँ क्यों नहीं। वे तो आधुनिक भारतीय चित्रकला के प्रणेता थे" जार्ज पोलस का उत्तर था। कुछ पल बाद उसने मेरी ओर देखा और कुछ सोचकर कहने लगा- "तुम्हारी राजा रविवर्मा की पेन्टिग कुमुद सुन्दरी के विषय में क्या राय है?" मैनें उससे कहा कि "वह तो बिलकुल तुम्हारे बगल में बैठी, सुन्दरी मित्र फिलोमिना की तरह है।" मेरी बात सुनकर फिलोमिना जो अभी तक कॉफी के घूँट ले रही थी बरबस बोली "यह बात मात्र अंशतः सत्य है, मैं कुमुद सुन्दरी की भाँति पृथुल नहीं हूँ और न ही मैं बंगलौरी पद्द्ति पर साड़ी ही पहनती हूँ।"

विज्ञानकथा : अतीत वर्तमान एवं भविष्य

वैदिक वाङ्मय, महाभारत, रामायण और पुराणों में उल्ल्खिखित विविध प्रकार के आख्यान, कथाएँ भारतीय जीवन के संवेग और संकल्प के मुख्य बिन्दु हैं। ये आख्यान और रोचक विवरण हमारी सांस्कृतिक शाश्वतता और सततता के ऊर्जा स्रोत हैं। भारतीयता की भागीरथी के अक्षुण्ण प्रवाह के कारक हैं। ये कथाएँ भारतीय मनीषी ऋषियों की उर्वर मेधा की सजनात्मक शक्ति की जीवंत प्रतीक है। इन आख्यानों, कथाओं की मधुमय शक्ति है कथ्यों तथा

Pages

Subscribe to RSS - डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय


Main menu 2

by Dr. Radut.