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बलिदान

"सो आइ एम योर न्यू बॉस," मैनें अपने कन्सल्टेशन चेम्बर में घुसते ही कहा।
"यस डाक्टर।" ये सुरीली आवाज थी मेरी नई रोबो सेक्रेट्री जे। यू। ल। १२४ की। यानि मेरी सेक्रेटरी कोई इंसान नहीं एक रोबोट है (एक अति विकसित रोबोट, जो दिखने, बोलने, यहां तक कि व्यवहार में भी बिल्कुल हमारे जैसा है। 

इसीलिये हन्हें हम रोबोट नहीं `एन्ड्रोइड´ कहते हैं।  इसके दो हिस्से होते हैं एक शरीर व दूसरा मस्तिष्क। रोबोटिक्स की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है `रोबो मस्तिष्क´। ये रोबो मस्तिष्क पोजिट्रानिक्स के सिद्धांतो पर काम करता है। इसमें करोड़ों सिर्कट्स वाली लाखों छोटी-छोटी चिप्स होती हैं। जिस काम के लिये उसे बनाया जाता है उससे सम्बन्धित सारी सूचनाएं व जानकारियां उसमें भर दी जाती हैं। जूली को मैने अच्छी-खासी रकम खर्च करके सेक्रट्री की जगह के लिए हासिल किया था।

Nick Roseपर पिछले कुछ सप्ताहों से मुझे अब उसमें बहुत सारे अजीब से परिवर्तन नजर आने लगे थे।  एक दिन जब मैने अपने चैम्बर में प्रवेश किया तो चैम्बर की फिजां ही बदल गयी थी।  मेरी मेज पर से मेरी प्रिय सिगरेटों का डिब्बा गायब था।
"मेरी सिगरेट कहां है, तुम्हें पता है जूली?"
"डस्ट बिन में।"
"किसने फेंका उन्हें डस्टबिन में?"
"मैने।"
"पर क्यों?"
"क्योंकि आपको ऐसी हालत में सिगरेट नहीं पीना चाहिये।"
"क्या मतलब है तुम्हारा?"
"वह आदमी जिसका कोलेस्ट्राल इतनी तेजी से बढ़ रहा हो, जिसके फेफड़ों में इतने ज्यादा एम्फाइसीमेटस चेन्जेज आ रहे हों उसे सिगरेट नहीं पीनी चाहिए।"
"व्हाट, तुम्हें ये सब कैसे पता लगा?"
"मैने आपका हेल्थ रिकार्ड स्कैन किया तब पता चला कि...। "
"किसकी परमीशन से," मैं चिल्लाया।
"सारी सर।"
"लिसिन, तुम्हें अपने काम से काम रखना है बस। वह काम ही करना है जिसके  लिये मैने तुम्हें हायर किया है।"
"यस सर," जूली के स्वर में कंपन था।
"आप मुझसे नाराज हैं सर?"
"मैं देख रहा हूं कि तुममें बहुत सारे परिवर्तन आ रहे हैं, क्यों?"
"ज...ज...जी इसलिये... इसलिये कि  मैं आपको प्यार करने लगी हूं।"
"प्यार, एक एन्ड्रोइड और प्यार," मैं खुल कर हंसा।
"आप ही तो कह रहे थे उस दिन कि प्यार एक बेशकीमती भावना है। प्यार इंसान को ईश्वर बना देता है।"
मैने विस्मय से कहा," तुम तो इंसानो की भाषा बोलने लगी हो जूली!"
"प्यार का असर है। जो प्यार इंसान को भगवान बना सकता है वह क्या एक एन्ड्रोइड को इंसान नहीं बना सकता।"
"वंडरफुल! पर तुमने ये सब कहां से जाना?"
"आप ही तो कह रहे थे उस दिन अपनी फ्रेंड राधा से।"
"और तुम जासूसी कर रही थी मेरी?"
"जी सर,"
"ओह, तो इसका मतलब ये सच है कि मुझसे मुलाकात के बाद तुमने राधा को धमकाया था और कभी भी मुझसे दोबारा न मिलने को कहा था?"
"जी सर," जूली ने सिर झुका लिया।
"पर क्यों।।। क्यों जूली क्यों?"
"सारी सर, मुझे बुरा लग रहा था जब वह आपको लड़की आपसे बात कर रही थी।"
"देखो जूली समझने की कोशिश करो। तुम्हारे ये सारे व्यवहार आसिमोव के नियमों के खिलाफ हैं और आसिमोव नियमों के बाहर रोबोट का कोई अस्तित्व ही नहीं है।"
"तो मुझे एन्ड्रोइड से मानव बना लीजिये न सर। आप तो इतने बड़े डाक्टर हैं। कोई दवा कोई आपरेशन," और जूली ने अपने हाथों में मेरा चेहरा थाम मेरे माथे के बीच चूमा।
अगले दिन उठते ही मैने घोषणा की, "तुम्हें आज अपने वर्कशाप वापस जाना है।"
"सर आप मुझे वापस मत भेजिये। मैं वहां से कभी वापस नहीं लौटूंगी। वे मार डालेगें मुझे।"
"मार डालेंगे! ये कौन सी भाषा बोल रही हो तुम? एन्ड्रोइड कहीं मरता है, वह तो सिर्फ डिसमेन्टल होता है।  क्या हुआ है ये तुम्हें जूली?"
"प्यार", जूली धीरे से फुसफुसाई।

जूली ने अपने वापस जाने का जोरदार विरोध किया था पर अंतत: उसे जाना ही पड़ा था।  दूसरे दिन शाम को मेरा मित्र और एन्ड्रोइड साइकोलाजिस्ट आनंद मेरे घर आया।
"आनंद, जूली कैसी है?" उसे देखते ही मैने उस पर सवाल दागा।
"वह तो पहेली बन गई थी हम सब के लिये। उसके व्यक्तित्व में इमोशन्स की मिलावट होने लगी थी। प्रीडिक्टेबिलिटी या नियंत्रित व्यवहार जो एन्ड्रोइड मस्तिष्क को मानव मस्तिष्क से अलग करता है वह उसमें समाप्त हो रहा था। मैने जब उसके मस्तिष्क को उसके ओरिजिनल प्लान से मिलाया तो मेरा वजूद हिल गया। उसमें अपने आप से कुछ नये सिर्कट पैदा हो गये थे। यही शायद उसके इस विचित्र व्यवहार का कारण रहे होंगे।  डाक्टर ये रोबोटिक्स के इतिहास की शायद सबसे बड़ी दुर्घटना थी। "
"क्या मतलब?"
"ये तुम्हारी जूली यानि जे यू एल 124 किसी एन्ड्रोइड में सेल्फ रीजेनरेशन की दुर्घटना का पहला उदाहरण थी। इसका मतलब समझते हो तुम?"
"नहीं।"
"इसका मतलब है कि रोबोट मस्तिष्क में अपने आप सोच कर व्यवहार  में फेर बदल की क्षमता का पैदा होना। इससे उनके मस्तिष्क की वह प्रीडिक्टेबिलिटी या निश्चितता खत्म हो जाती है जिसके कारण मनुष्य उनसे अलग है, उनका मालिक है।  अगर रोबो खुद सोचने लगे तो पता है क्या होगा? उनके व्यवहार पर मानव का नियंत्रण समाप्त हो जायेगा। वे स्यंव सोचने लगेंगे, स्यंव निर्णय लेने लगेंगे और फिर उसके उसके मुताबिक काम भी करने लगेगें।  तब  इंसान उनका मालिक नहीं रह जायेगा।  वे एक अलग प्राणी होगें इंसान के अस्तित्व को चुनौती देते हुये। इन दोनों के टकराव में निश्चित रूप से जीत होगी एन्ड्रोइड की, क्योंकि शारीरिक रूप से वे काफी मजबूत होगें। अगर इंसान इन मशीनों का गुलाम हो गया तो सोच सकते हो क्या होगा?"
"पर जूली कहां हैं आनन्द?"
"नो प्राब्लम डाक्टर कल हम आपकों दूसरी रोबो सेक्रेट्री भिजवा देंगे।"
"क्या, इट मीन्स तुमने मार डाला उसे?"
मेरे हाथ आनंद की गर्दन पर थे मैं उसे झिंझोड रहा था। आनंद ने अपनी गर्दन पर से मेरे हाथो को खींच कर हटाया।
"जस्ट ट्राई टू अन्डरस्टेंड डाक्टर, जे यू एल 124 में हुआ ये सेल्फ रीजेनेरेशन अगर आगे की सिरीज में प्रोपेगेट कर जाता तो क्या होता इस मानव सभ्यता का? जे यू एल 124 को डिसमेन्टल करना जरुरी था डाक्टर इतनी बडी दुर्घटना  कोटालने के लिये।"
मगर मैं था कि मुझे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था। आनंद कहे जा रहा था, "माफ कर यार डाक्टर इंसानियत को बचाने के लिये तेरी जूली का ये बलिदान जरूरी था।"

(असंपादित रूप में भारतीय विज्ञान कथा लेखक समिति फैजाबाद की पत्रिका विज्ञान कथा में पूर्व-प्रकाशित)



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by Dr. Radut.