उसकी गैस चालित पीजो कार का पैडिल, हाँ वह एक्सीलेटर को पैडिल ही कहता था, कुछ ढीला हो गया था। उसे टाइट कराना आवश्यक हो गया...वह ड्राइव करते हुये अगले गैस-फिलिंग स्टेशन पर रुका, मैकेनिक को समस्या बताई और कार से उतर पड़ा। वह गैसे ड्रिवेन कार को पूर्णतः प्रदूषण मुक्त मानता था....इसी कारण वह लेड-विहीन पेट्रोल के स्थान पर गैस-चालित कार, पीजो कार, चलाता था। फिर इस में प्रदूषण टेस्ट नहीं कराना पड़ता था और न ही किसी प्रकार के फाइन की ही समस्या रहती थी, वह सोच रहा था।
कार के हार्न की ध्वनि ने, उसकी तंद्रा भंग कर दी, मैकेनिक को पे करवह तेजी से जिनोवा से पश्चिम की ओर जाने वाले हाईवे हाँ जिसे रूट-डी मेरिन कहते हैं पर उड़ता सा चला जा रहा था। एकाएक रोड साइड के स्पीड रेडार ने चेतावनी का, गति सीमा उल्लंघन करने का सायरन बजाया, वह चौंक उठा...पीजो की गति कम करने के लिए पैडिल से पैर धीरे से हटाया दबाव कम किया गियर स्वतः बदल गया कार की गति नियंत्रित हो गई और उसके सामने से दाहिनी तरफ...ओह फिलिंग स्टेशन से ठीक आठ किलोमीटर पर, स्टील-फ्रेम पर निर्मित भवनों की शृंखला स्पष्ट दिख रही थी। कुछ ही पलों बाद उसकी कार चेनो से घिरे पार्किंग स्थल पर पहुंच गई और वह खड़ा था विख्यात केन्द्र सर्न, जिसे फ्रेंच में आर्गनाइजेशाँ इयूरोपीने पोर-ली-रिर्सचेज- न्यूक्लीएर, ...अंग्रेजी में इपोरियन न्यूकलीयर रिसर्च सेन्टर कहते हैं।
उसने मुख्य द्वार के प्रवेश स्थल पर निर्मित कन्ट्रोल रूम के सशस्त्र गार्ड को अपना परिचय पत्र (आई. डी. ) कार्ड दिखाया...उसे देखकर गार्ड ने उसको उस नीले रंग की मरसेडिज वेंज के पीछे अपनी कार को पार्क करने का संकेत दिया।
अपने कार की इलेक्ट्रानिक- डिवाइस को प्रेस कर-कार को लॉक कर, वह तेजी से सीढ़ियों को पार करता मुख्य द्वार तक पहुंच गया। ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह द्वार, पीछे मुड़ कर देखने पर घने जँगलों और उनमें घूमती गायों के झुण्ड और उनके गले में बंधी घण्टियों की ध्वनि, मानसिक क्लान्ति दूर कर देने हेतु पर्याप्त थी। उसने अपलक नेत्रों से इस नयनाभिराम दृश्य को देखा और ड्राइविंग के स्ट्रेन-थकान से मुक्ति पाकर भीतर जाकर उस विशाल टेबिल के सम्मुख खड़े होकर मुद्रित फार्मों में एक को लेकर उस, पर अपना नाम-कारण-किससे मिलना है,....लिखने लगा।
टेबिल-डेस्क के उस पार बैठी सुन्दर रिसेप्शनिस्ट ने फोन से मुक्ति पाई और उसने उसके फार्म को देखा ... कम्प्यूटर की कुछ बटनों को दबाया और बोली "आप का कार्ड...विजिटर्स कार्ड किस भाषा में हो?" उसने कहा "अंग्रेजी में बेहतर होगा।" यह लें- इंसपेक्टर, आप सामने के द्वार से भीतर जायें...वहाँ कोई आपसे मिलेगा।" यह कह कर लिपिस्टिक रंजित अधरों से मुस्कान बिखेतरी वह दूसरे फोन के काल का उत्तर देने लगी। उसे धन्यवाद देकर वह द्वार से भीतर जाकर, गोलाई में लगी विनाइल की कुर्सी पर बैठ गया। उसके सर में हल्का दर्द था, उसने आँखें बन्द कर लीं। अनुमानतः पाँच मिनट बाद, किसी के कुर्सी पर बैठने की आवाज ने उसे चौंका दिया ... उसने देखा, ठीक उसके सामने एक सुन्दर महिला बैठी थी। उसका ढीला ब्लाउज और हल्के रंग की स्कर्ट, उसके हल्के लिपस्टिक रंजित ओष्ठ, उसकी उम्र को, उसकी वय, को पैतिस- चालीस वर्षों के मध्य बता रहे थे। वह छरहरे शरीर की महिला उसे आकर्षक लगी। उसने उस महिला को देखकर खड़े होकर हाथ मिलाया और धीरे से बोला "डॉ. मोनिका पार्कर" हाँ मैं डॉ. पार्कर हूँ और आप इंस्पेक्टर रिचर्ड मूर?" उसने स्वीकारात्मक ढंग से सिर झुकाया और एक दूसरे के सम्मुख, वे कुर्सियों पर बैठ गए।
उसके चेहरे पर उभरे भावों को पढ़ कर डॉ. मोनिका पार्कर ने कहा "क्या मैं आप को सही फिजीसिस्ट नहीं लगती- मैं भौतिकीविद् हूँ। परमाणु भौतिक विद...मिस्टर मूर"।
"नहीं नहीं आप मेरे चेहरे पर आये भावों को अन्यथा न लें... रिशेप्शनिस्ट द्वारा दिये गये विवरण से मैं किसी अन्य को समझ रहा था... पर उसका महत्व ही अब क्या है।" कह हवा में हाथ इस प्रकार से इंसपेक्टर मूर ने हिला जैसे वे इस बातों को समाप्त कर आगामी वार्ता बिन्दु पर पहुंचने को आतुर हों। डॉ. पार्कर ने जैसे इंसपेक्टर के भावों को पढ़ लिया हो... कुछ पलों बाद वे इंसपेक्टर को लक्ष्य कर बोलीं "आप सबसे पहले प्रयोग स्थल देखना चाहेंगे।" हाँ- अवश्य" कह कर इंसपेक्टर उठ खड़े हुए और डॉ. पार्कर के साथ उस ग्लास के द्वार, शीशे के द्वार को पार कर एक विशाल कक्ष में प्रवेश कर गए।
उस विशाल कक्ष के कैट-वाक... स्टील कैट वाक पर धीरे-धीरे चलते हुए वे उन विशाल काय मशीनों को देखने लगे जो इतनी ध्वनि उत्पन्न कर रहीं थीं कि यदि वहाँ कोई भीषण विस्फोट भी कर दे तो वह भी उनको सुनाई न दे। डॉ. पार्कर ने इंसपेक्टर के समीप जाकर जोर से बताया- "यह जनरेटर हैं जो सुपर कनडक्टिंग मैग्नेटों को एक्सीलेरेशन हेतु आवश्यक मात्रा में विद्युत ऊर्जा प्रदान करते हैं।"
"मेरे सिर में दर्द होने लगा है जोर से ... शक्ति लगाकार इंसपेक्टर ने कहा और एक हाथ से अपना सिर दबा लिया। वे तेजी से डॉ. पार्कर का अनुसरण करते दूसरे कक्ष में जा पहुँचें। यहाँ पर शान्ति थी और उस अपेक्षाकृत छोटे कक्ष में एक विशाल काय क्रेन स्टील ग्राइडर से लटक रही थी। वास्तव में यह विशाल जनरेटर कक्ष के पीछे का छोटा कक्ष था और जब जनरेटरों को शिफ्ट करने की आवश्यकता होती थी तभी यह विशाल काय क्रेन इस कक्ष से सरकती हुई जनरेटर कक्ष में स्वतः, आटोमेटिकली स्वचालित ढंग के पहुंच जाती है।
उस कक्ष से आगे जाने पर सहसा एक स्थल पर फर्श समाप्त हो गई- डॉ. पार्कर रुक गईं और उनके बगल मे जाकर खड़े हुए मूर को रेलिंग पकड़ कर नीचे देखने पर ऐसा लगा कि मानों धरती समाप्त हो गई हो, और वे एक विशाल चौकोर अन्तहीन विवर-गुफा के मुख पर खड़े हों। इंसपेक्टर को लगा कि कहीं उन्हें चक्कर न आ जाए।
डॉ. पार्कर ने बताया "यह 250 मीटर गहरा है और अनुमानतः इसमें 40 ग 50 मीटर की 6 विल्डिंगें समा सकती हैं।" इंसपेक्टर मूर ने एक बार पुनः नीचे ध्यान से देखा... उन्हें लगा कि वे एक कार की भांति कोई आकृति देख रहे हैं, जिसकी छत पर एक 40 सेन्टीमीटर का द्वार भी है तथा इसी से सैकड़ों रंगीन केबिल संबद्ध हैं। यह सभी केबिल विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रानिक बाक्सों में चले गए हैं। उनके विभिन्न रंगों के टिमटिमाते इंडीकेटरों का क्रमानुसार प्रकाशित होते रहना विचित्र प्रभाव उत्पन्न कर रहा था।
उस कार की भांति आकृति के चारों ओर विभिन्न यंत्र लगे थे तथा एक घुमावदार सीढ़ी भी दिख रही थी। उसी आकृति को लक्ष्य कर, इंसपेक्टर मूर ने डॉ. पार्कर से पूछा, "इसी से डॉ. अलबर्तो लानोन प्रविष्ट हुए थे उस ...।"
"हाँ, उसी से प्रो. लानोन इसके ऊपरी द्वार, से भीतर प्रविष्ट हुए थे।"
"इस से बाहर निकलने का एक मात्र द्वार ऊपर है और अन्य तरफ नही।" इंसपेक्टर मूर ने पूछा ।
"आपके विभाग के अनेक विशेषज्ञ इस आकृति के प्रत्येक भाँति से, नीचे जाकर, समीप से दूर से, अनेकों कोणों से देख चुकें हैं, इस तथ्य से तो आप परिचित हैं न इंसपेक्टर मूर।" इंसपेक्टर मूर ने अपने चेहरे का तनाव दूर करते हुए कहा "आप को भ्रम है डॉ. पार्कर, मैं योरोपोल से संबद्ध नहीं हूँ, मैं इन्टरपोल से आया हूँ।"
"तो आप निश्चित ही फ्रेंच हैं।" डॉ. पार्कर ने कहा।
इस पर नकारात्मक ढंग से अपने सिर को हिलाकर इंसपेक्टर मूर बोले "मैं वेलजियम का वासी हूँ।"
"लेकिन आप की अंग्रेजी तो विशिष्ट अमेरिकन लगती है।" डॉ. पार्कर ने कहा।
"हाँ मै एम. आई. टी. कैलीफोर्निया में परमाणु भौतिकी का छात्र रहा हूँ" इंसपेक्टर मूर ने बताया। इस तथ्य को जान कर प्रसन्न हो डॉ. पार्कर ने कहा "हाँ अब मुझे स्मरण हो रहा है उस सूचना का, जिसमें एक परमाणु भौतिकीविद विशेषज्ञ के इन्टरपोल से यहाँ आने की सम्भावना व्यक्त की गयी थी... मुझे आप से मिलकर अतीव हर्ष हुआ इंसपेक्टर मूर" कहती हुई डॉ. पार्कर ने अपने ओष्ठों को पुनः लिपिस्टिक से रंजित कर दिया। "नहीं नहीं मैं विशेषज्ञ नही हूँ, हाँ अपने अन्य सहयोगियों की अपेक्षा, मैं इस विषय के बारे में थोड़ा अधिक जानता हूँ" इंसपेक्टर मूर का सहज उत्तर था। "आप स्वतः उस स्थल को देख लें, पर मुझे दुःख है कि वहाँ तक पहुँचने के लिए हमें सीढ़ियों का सहारा लेना होगा, क्योंकि वहाँ तक ले जाने के लिए यहाँ पर कोई लिफ्ट नहीं है" डॉ. पार्कर ने कहा। "कोई बात नहीं हम सीढ़ियों से ही नीचे उतरेंगे डॉ. पार्कर" इंसपेक्टर मूर ने प्रसन्नता से उत्तर दिया।
वे दोनों सावधानी से सीढ़ियों से नीचे उतरने लगे। पर पांचवे तल पर पहुंच कर इंसपेक्टर रुक गये और दीवाल से एक सूक्ष्म छिद्र को देखते हुए बोले "तो यहीं से किरणें निकलती हैं?" हाँ यहीं वह बिन्दु है जो कोलाईडर टनल से जुड़ा है और यहीं पर अत्यन्त उच्च-शून्यता, हाई-वैकुअम उत्पन्न किया जाता है।" डॉ. पार्कर ने बताया।
डॉ. पार्कर को लगा कि इंसपेक्टर कुछ वेचैन से हैं, इस कारण उन्होनें इंसपेक्टर से पूछा कि क्या ऊपर चल कर- इस संयत्र से थोड़ी दूर पर, दूसरे भवन में स्थित, आटोमेटिक कैन्टीन में, चलना पसन्द करेंगे।’ इंसपेक्टर का उत्तर सकारात्मक रहा।
ऊपर आकर कोई 20 मीटर दाहिने की ओर चलने पर एक छोटे से द्वार से बाहर आने पर वे एक विस्तृत सुरंग में थे। जिसमें करीब सौ मीटर चलने के बाद वे बाहर आये। सुन्दर उद्यान में सूर्य चमक रहा था।
दोनों तरफ फूलों के बीचे में निर्मित पतली सड़क पर चलते हुए इंसपेक्टर मूर लड़खड़ा गए और उनके दाहिने हाथ को पकड़कर डॉ. पार्कर ने सहारा दिया। इसके कारण इंसपेक्टर गिरने से बच गए। वे रोमांचित हो उठे और कहने लगे "दो दिनों पूर्व जॉगिंग करते समय मेरे पैर में मोच आ गई थी ... वह एकाएक उभर आई। मानव शरीर भी प्रकृति की रचना है- इसकी भी मर्यादाएं हैं, इसे उतना ही चलाना चाहिए- कष्ट देना चाहिए, जितना यह सहन कर सके।" "आप तो डॉ. अलबर्तो की भांति बातें कर रहे हैं" डॉ. पार्कर ने कहा। ‘किस भांति?’ इंसपेक्टर ने पूछा। जब शाम को कभी कभी हम इस उद्यान में टहलते थे तो डॉ. अलबर्तों कहा करते थे " इस शरीर के रहते ही जितना कुछ मिल जाता है-जो कुछ व्यक्ति प्राप्त कर लेता है- वही उसके लिए संतोषदायक, आनन्ददायक होता है ... मृत्यु के बाद यदि कुछ मिला भी तो संबंधित व्यक्ति को क्या पता चलता है? क्या वह कभी जान सकता है कि उसे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है? मृत्यु एक सत्य है, उसके आने के पूर्व मैं ख्याति चाहता हूँ यश चाहता हूँ... मृत्यु के बाद नहीं।" "मुझे लगता है कि डॉ. अलबर्तो समय सीमा को तोड़ कर आगे जाना चाहते थे" इंसपेक्टर मूर ने कहा। "ठीक उसी प्रकार जैसे वे जे-वोसानो को सर्वमान्य करा देना चाहते थे।" डॉ. पार्कर का उत्तर था।
"तुम जे-वोसानों के विषय में कुछ जानते होंगे इंसपेक्टर"? डॉ. पार्कर ने पूछा।
"थोड़ा सा ... यह एक विशिष्ट परिस्थिति में, एक विशेष क्षेत्र ... कुछ क्षण इन वोसानों ... जे-वोसानों को उत्पन्न करते हैं" इंसपेक्टर मूर का उत्तर था। वे दोनों कुछ क्षणों तक ऐसवेस्टास से ढके पथ पर चलते रहे... "शायद तुम्हें याद हो कि इनकी, जे-वोसानों की खोज यहाँ पर पन्द्रह वर्ष पहले हुई थी, आज सन 2030 से ठीक 15 वर्ष 8 मास पूर्व डॉ. जे. थाम्पसन ने इनको लताशा था।" डॉ. पार्कर ने कहा। "इसके विषय में परिचित हूँ, इन्ही पर मैने अपनी एम.एस.सी. की थीसिस जो डॉ. जे-थाम्पसन के ओरीजिनल शोध पत्र पर आधारित थी, लिखी थी" इंसपेक्टर मूर ने उत्तर दिया।" परन्तु इन वोसानों की उपस्थिति अन्तिम रूप में सिद्ध करने में, प्रयोग को परिष्कृत करने में डॉ. अलबर्तो का मुख्य योगदान था परन्तु इसका श्रेय... इस प्रयोग का श्रेय जे. थाम्पसन को मिला न कि डॉ. अलबर्तो को"। ये वोसान उन्हीं के नाम पर जे-वोसान कहे गए। डॉ. पार्कर ने स्पष्ट किया। उस आटोमेटिक कैन्टीन में 10-12 कुर्सियां और 4-5 मेजें थीं। दीवार के सहारे आइसक्रीम और कोक की मशीनें, खड़ी थीं तथा एक माइक्रोवेव ओवेन काफी स्टैन्ड पर लगी थी। "कोक लेंगे या काफी" डॉ. पार्कर ने पूछा। "बिना दूध की ब्लैक काफी ही मेरा सर दर्द दूर कर सकती है..."दो स्टोरोफ्रोम के कपों में वे, काफी लेकर एक दूसरे के सम्मुख बैठ गए। उस शान्त वातावरण में मात्र काफी-सिप करने की ध्वनि कुछ पलों तक आती रही। कुछ स्वस्थ होने के बाद इंसपेक्टर मूर ने पूछा, "तो डॉ. अलबर्तो का भी नाम था, पर श्रेय तो डॉ. थाम्पसन को ही मिला।" जिस विवशता से, जिस विषादपूर्ण ढंग से डॉ. पार्कर ने उत्तर दिया था उसने इंसपेक्टर को चकित कर दिया।
"डॉ. पार्कर आप डॉ. अलबर्तो से प्यार करती थीं... इसी कारण आप को भी कष्ट रहा होगा- इस अप्रिय तथ्य के विषय में" इंसपेक्टर ने संवेदना प्रकट करते हुए कहा।
"हाँ एक समय हम दोनों की समीपता... जिसे आप प्यार कह सकते हैं... अवश्य थी। आप जानते ही हैं कि भौतिकविद भी सामान्य व्यक्तियों की भाँति हैं, पर छिद्रानुवेषण में रुचि लेते हैं," आप मुझे क्षमा करें, कुमारी डॉ. पार्कर मेरा अभिप्राय आप को आघात पहुंचाना नहीं था... आप मेरी परिस्थिति पर ध्यान दें क्या डॉ. अलबर्तों भी आपको उतना ही प्यार करते थे?" इंसपेक्टर ने पूछा।
डॉ. पार्कर के चेहरे पर तनाव उभर आया, वे सर को हिलाती हुई कहने लगीं। "यह तथ्य आपकी रिपोर्ट में अंकित है, पर आपको मैं स्पष्ट करना चाहूँगी कि हमारा संबंध कुछ समय बाद मधरु नहीं रह गया था"। "ओह... मुझे दुःख है, डॉ. पार्कर" इंसपेक्टर ने कहा। और वार्ता की धारा में परिवर्तन लाने की इच्छा से उन्होनें पुनः पूछा "डॉ. अलबर्तो विश्वविख्यात परमाणु भौतिकीविद थे... उनका प्रयोग में, परिणाम प्राप्त करने की इच्छा ने,लालसा ने, उन्हें कैसे अदृष्य कर दिया... वे प्रयोग के प्रारम्भ होते ही कैसे अदृश्य हो गये..."।
"हम लोग विज्ञान सम्मत भाषा में, इस घटना को अदृश्य होना नहीं कहते... सामान्य जनता अधिकारीगण और इस तथ्य की छानबीन करने वाले व्यक्ति ही यह अवैज्ञानिक...इस अवैज्ञानिक एवं मूर्खता पूर्ण शब्दावली का प्रयोग करते हैं.. आई पे ए डैम टू देम..." आवेश में डॉ. पार्कर कह उठीं।
इंसपेक्टर मूर की काफी समाप्त हो चुकी थी.. वे डॉ. पार्कर की काफी के समाप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे थे... कुछ पलों बाद, उन्होनें डॉ. पार्कर से पूछा "क्या आप इन जे. वोसानों के विषय में कुछ बतायेंगी?"
डॉ. पार्कर के माथे पर लकीरे उभर आयीं और नेत्र बन्द हो गए.. पुनः कुछ संयत होने के उपरान्त जैसे वे गहरी ध्यान समाधि से उभर आईं हों... उनके होठों पर हल्की मुस्कान आ गई और वे बताने लगीं "आपने हैडरान कोलाइडर को देखा है... नवीन विचारों का, इस दिशा में 1959 से 1990 के मध्य में, विकसित होना प्रारम्भ हो गया था। इनमें से कम शक्ति की...वीक इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स जो चार शून्यता युक्त परमाणु कणों से उत्पन्न होती है.. को दो विभिन्न गुणवाली शक्तियों में विभाजित किया जा सकता है- और इनमें से एक शक्ति अथवा फील्ड अधिक भार के कणों से युक्त हो जाती है। अवधारणा है कि इस प्रकार की शक्ति ब्रह्माण्ड के निमार्ण में कार्य करती थीं, और इसी के फलस्वरूप, भारी कणों की, हैवी पार्टिकल्स की उत्पत्ति भी होती है। इसी फील्ड को हम लोग भौतिकविद, जे-फील्ड कहते हैं। इस प्रकार के परिणामों का सत्यापन इस कोलाइडर में होता है"।
"इस प्रकार यदि हम कोलाइडर में दो प्रकार के प्रोटानो युक्त वीमों को दस टेराबोल्ट पर टकराने दें तो अतीव आश्चर्याजनक परिणाम प्राप्त होंगे"। "ओह तो क्या इस प्रकार काल-यात्रा...समय में विगत और आगत काल की यात्रा संभव है" इंसपेक्टर ने पूछा। प्रश्न सुन कर डॉ. पार्कर, मुस्करा उठीं। और बोली "चलिए इस उद्यान में थोड़ा टहल लें.. मैं थोड़ी सी शुद्ध आक्सीजन चाहती हूँ" और डॉ. पार्कर के उठते ही इंसपेक्टर भी उठ खड़े हुये... वे कैन्टीन से बाहर आ गए। उद्यान परिभ्रमण के उपरान्त डॉ. पार्कर ने कहा "चलिए मैं आपको मैगाटेक कक्ष दिखाऊँ।" वे थोड़ा आगे बढ़े और सामने के विशाल द्वार में प्रविष्ट हो गए।
डॉ. पार्कर ने कहा "इंसपेक्टर तुम्हारे नाम का एक विख्यात भौतिकीविद हुआ था ... उसके विषय में तुम कुछ अवश्य जानते होंगे?" हाँ मेरी माँ प्रतिदिन मुझे भौतिकी अध्ययन हेतु उत्साहित किया करती थी। एक बार जब मैं एम.एस.सी. का छात्र था तो मेरी माँ ने, मेरी भौतिकी के अध्ययन में परेशान देखकर, बताया था कि विल्हेल्म वाल्टर मूर, मेरा वृद्ध प्रपितामह था... पर ... इससे भी ... इस तथ्य को जानने के बाद भी मैं उच्च श्रेणी का भौतिकीविद् न हो सका... और मैं मात्र इंसपेक्टर मूर रह गया।"
"आश्चर्य है मुझे" डॉ. पार्कर ने कहा। "और आप की शैक्षिक योग्यता सर्व-विदित है "डॉ. पार्कर" इंसपेक्टर मूर ने का उत्तर था। "हाँ वह भी आपके फाइल में है- मेरा जीवन वृत्त शैक्षिक योग्यता आदि" डॉ. पार्कर ने सकटाक्ष उत्तर दिया और कहा "पर डॉ. अलबर्तो तो मुझे सदैव प्रतिद्विन्दनी समझता रहा, क्यों मैं आज तक जान न सकी।" "हो सकता है वह आप की मेधा शक्ति से, आपके सावधानी से किये गये प्रयोगों से... उनके परिणामों .... से...वह आप से प्यार भी करता रहा हो और घबराना भी रहा हो" इंसपेक्टर ने किंचित मुस्कान के साथ उत्तर दिया।
"अलबर्तो सदैव कहता था कि मुझमें और अधिकांश स्त्रीयों में महिलाओं में टनेल ऐफेक्ट रहता है। महिलाएँ स्त्रीयाँ भौतिकी के तथ्यों को प्रयोगात्मक स्वरूप देने में अक्षम होती हैं, उनमें कल्पना शक्तियों का अभाव होता है। मैने तो उसकी आज्ञा का अनुसरण किया था, उस प्रयोग की विफलता का, उसके अदृश्य हो जाने के कारणों से, मैं परिचित अवश्य हूँ पर आदेश तो उसी का था ....इंसपेक्टर वह मेरा बॉस था... इस संस्थान का निदेशक था"। मैं उस प्रयोग के समय अकेली नहीं थी, और वैज्ञानिक गण थे, फिर अलबर्तो के अदृश्य होने और आपके शब्दों में हत्यामें मै ही एक मात्र क्यों शामिल मानी जाती हूँ।
इंसपेक्टर मूर ने कुछ कहा नहीं वे कुछ सोचते हुए डॉ. पार्कर के साथ "मेगाटेक" का सूक्ष्मता से निरीक्षण करते रहे। "मेगाटेक" में अनेकों प्रकार के टर्मिनलस कम्प्यूटरों से जुड़े थे। यत्र तत्र छोटे छोटे यंत्र भी लगे थे, पर उन सबके मध्य में थी दो विशालकाय मशीने जो कि वीडियोंगेम्स की मशीन भांति थी, इनके द्वारा कोलाइडर-सेल में हो रहे परिवर्तन को, कम्प्यूटर एन्हास्ड- चित्रों को, देखा जा सकता था।
"लोगों का कहना है कि यदि आप डॉ. पार्कर, चाहतीं तो डॉ. अलबर्तो को रोक सकती थी"। इंसपेक्टर ने कहा "मैने पूरी कोशिश की थी- पर उसने मेरी बातें मानी ही नहीं- पूर्णरुपेण अनसुनी कर दी’ दुखित स्वर में डॉ. पार्कर ने उत्तर दिया।
"लेकिन मुख्य प्रयोग की स्विच तो आपने ही आन किया था" इंसपेक्टर पार्कर ने कहा "उसके आदेश पर, एलवर्तों के आदेश पर, मुझे करना पड़ा, पर क्या मात्र इसी कारण, मैं हत्यारणी मान ली गई।" डॉ. पार्कर ने अपने को संयत करते हुए उत्तर दिया और इससे, उसकी आज्ञा का पालन न करने के परिणाम से आप परिचित नहीं है। क्या डॉ. अलबर्तो यह नही जानते थे कि वे क्या कर रहे हैं?" कह कर, डॉ. पार्कर ने प्रश्न वाचक मुद्रा में इंसपेक्टर मूर की ओर देखा। कुछ सोचते हुए इंसपेक्टर ‘मेगाटेक’ की एक बेंच पर बैठ गए और सम्मुख रखे कम्प्यूटर की बटनों को दबाने लगें। "डॉ. पार्कर आप जो कह रही हैं वह विचारणीय तो है पर... इंसपेक्टर ने बात पूरी नहीं की वे रुक गए और कुछ पलों बाद कहने लगे "डॉ. अलबर्तो के मस्तिष्क में काल-यात्रा की अवधारणा-कल्पना कैसे आई, डॉ. पार्कर?"
प्रश्न सुनकर डॉ. पार्कर उठीं, एक कम्प्यूटर की बटनों को प्रेस करने लगीं... कुछ पलों बाद वे बोली... कहने से, प्रत्यक्षीकरण बेहतर होता है, आप स्वतः देखिये इंसपेक्टर मूर!"
कुछ क्षणों बाद उस बड़ी मशीन पर डिटेक्टर ने होलोग्राफिक प्रोजेक्शरनो का उभरना प्रारम्भ कर दिया - केन्द्रीय भाग के हेतु सिलेन्डर उससे बड़ा सिलेन्डर, चुम्बीकीय कैलोरोमीटर के लिए, एक चतुष्कोण हैडरानिक कैलोरी मीटरों के लिए; स्पष्ट दिख रहा था। डॉ. पार्कर के एक दूसरी बटन दबाई ही थी कि स्क्रीन पर 30-40 त्रियक रेखाएँ उभरने लगीं, उन्हें कुछ पलों तक देखने के बाद डॉ. पार्कर बोलीं "अब आप 2030 नवम्बर के घटना क्रम को देखेंगें तथा इस चित्र में डिटेक्टर संयंत्र में वह भाग आप देखेंगे जहाँ पर प्रोटोन एक दूसरे से टकराते हैं।
इतना बताकर डॉ. पार्कर ने एक दूसरे बटन को प्रेस किया, फलस्वरूप रेखायें स्क्रीन से समाप्त हो गई और उन्होने परिवर्तन से संबधित बटन, को दबा दिया। परिणाम था एक तीन इंच लम्बे ट्रैक का एक बिन्दु से उभरना। "यह जेट है, इससे आप परिचित हैं, इसके लिए 14 टेराबोल्ट की ऊर्जा चाहिए, और अब मैं आप को समय से इसका संबंध दिखाना चाहती हूँ " यह कहते हुए डॉ. पार्कर ने कुछ बटनों को पुनः प्रेस कर दिया। उस पूर्ववर्ती जैट का क्षेत्र बढ़ने लगा। डॉ. पार्कर बता रही थीं "प्रत्येक इंच उभरने में 2 पिको सेकेण्ड का समय लेता है। एकाएक इंसपेक्टर मूर ने देखा कि करीब चार इंच का जेट एक दूसरे जेट से, जो उसी से उत्पन्न हुआ था, से जुड़ा- दोनों संयुक्त रूप में करीब एक इंच तक बढ़े और फिर अदृश्य हो गए। इंसपेक्टर मूर कुछ क्षणों तक विचारों में डूबे रहे फिर स्वतः कह पड़े "मैं इसे समझ नहीं सका।" "आप ही नही... कुछ न समझ पाने वाले अधिक हैं" डॉ. पार्कर ने उत्तर दिया।
"इस प्रयोग में फर्मी नम्बर-एक से सम्बद्ध समान गुणधर्मा कण कहीं से उत्पन्न हो जाते हैं- यही पूर्ववर्ती कणों से संयुक्त होते दिखते हैं जेट में... और इसी तथ्य पर डॉ. अलबर्तो ने ध्यान केन्द्रित किया था "डॉ. पार्कर ने बताया। "ओह- तो यह नए कण-नए पार्टीकिलस नहीं थे... वे पुराने पार्टिकिल्स, ओरीजिनल पार्टीकिल्स समय से पीछे लौट गये और प्रकारान्तर से कुछ निमेष बाद उन्होनें ऊर्जा युक्त होकर पुनः ओरिजिनल कणों से अपने को संबद्ध कर लिया।" इंसपेक्टर मूर चकित से, मंत्रमुग्ध से, कह उठे। डॉ. पार्कर ने स्वीकारात्मक रूप में सर हिलाया और बताने लगी" जे-फील्ड टूट जाती है- मेल्ट कर जाती है... पदार्थ का मास-भार-वजन अदृश्य हो जाता है... वह पदार्थ 3 पिको सेकेन्ड के लिए पीछे चला जाता है- समय से पीछे, यानी समय के परिपेक्ष्य में भूत काल में चला जाता है। यद्यपि इस क्रिया में कुछ ऊर्जा नष्ट हो जाती है- यह गणना करने पर स्पष्ट हो जाता है" इसी को डॉ. अलबर्तो टी-सब-ई प्रभाव कहते थे।"
इंसपेक्टर मूर ने इन परिणामों को सर्वथा-नवीन और अप्रत्याशित बताया। लेकिन जब डॉ. पार्कर ने उन्हें इंगित किया कि यही परिणाम डॉ अलबर्तो के लिए कल्पना-उत्प्रेरक बन गए।... उस समय उन्हें तथ्यों का दूसरा पक्ष भी कुछ स्पष्ट होने लगा था।
डॉ. पार्कर के स्पष्टीकरण का प्रभाव इंसपेक्टर मूर के मानस में घूमता रहा। उनका ध्यान भंग डॉ. पार्कर के उन्हें संबोधित करने के उपरान्त हुआ। वे कह रही थीं "इंसपेक्टर मूर! इन परिणामों को लेकर उसकी विवेचना कर डॉ. अलबर्तो अत्याधिक उत्साहित थे। वे हम लोगों को, हम 90 भौतिकविदों से अकसर कहा करते थे कि मुझे तो दो नोबेल पुरस्कार मिलने चाहिए... एक, मेरे भूतकाल में जाने के लिए और दूसरा वर्तमान मे आने के लिए।"
"वह अत्याधिक उत्साहित थे... वे अपनी इस अवधारणा को विश्व के अनेक देशों मे जाकर स्पष्ट करने में लगे थे, और हम लोग यहाँ र्सन में इस अवधारणा को प्रयोगात्मक स्वरूप देने मे व्यस्त थे।"
"इस अवधारणा का प्रयोगात्मक स्वरूप तो आपने ही विकसित किया था डॉ. पार्कर" इंसपेक्टर मूर ने पूछा। "हाँ मैं इस प्रयोग के लिए लीडर चुनी गई थी- हाँ यह भी एक सत्य तथ्य है कि मैने ही इस प्रयोगात्मक अवधारणा को स्वरूप प्रदान किया गया था।" डॉ. पार्कर का उत्तर था।
"वह किस प्रकार?" इंसपेक्टर ने पूछा। "मैं और मेरी टीम ने एक 6 घनमीटर के टेस्ट-चैम्बर को चुम्बकीय प्रभाव द्वारा शून्य में, वैकुअम में तैरा दिया....छोड़ दिया तथा जब उस पर प्रयोग किया गया तो वह चैम्बर शून्य स्थित से 3.3 पिको सेकेण्ड के लिए एक मिलीमीटर के पीछे की ओर, डॉ. अलबर्तों के शब्दों में विगत काल-विगत समय ...भूतकाल में चला गया।" "इस परिणाम से तो आप डॉ. पार्कर अत्याधिक प्रसन्न हुई होंगी।"
"नहीं-वस्तु स्थिति ऐसी नहीं थी। मैं चिन्तित थी- मुझे लग रहा था कि कहीं पर प्रयोगात्मक त्रुटि हो रही है।"कह कर डॉ. पार्कर ने एक गहरी साँस ली। "फिर इसी कारण से आपने र्सन के सभी वैज्ञानिकों, भौतिकविदों के सम्मुख ... डॉ. अलबर्तों की अध्यक्षता में...भाषण देने की घोषण की...इस प्रयोग के परिणाम पर प्रकाश डालने... डिस्कस करने हेतु" इंसपेक्टर मूर ने कहा।
"स्वीकारात्मक ढंग से डॉ. पार्कर ने अपना सर हिलाया और उनके अब तक सामान्य आनन पर, विषाद सा छा गया। इंसपेक्टर मूर ने उनके मानसिक अवसाद को देख सा लिया। कुछ स्वस्थ हों, संयत हों, डॉ. पार्कर ने इंसपेक्टर मूर को बताया" उस सभाकक्ष में, उस दिन सभी एक सौ दस वैज्ञानिक उपस्थित थे। वे सभी उस अर्द्धचंद्राकार सभा कक्ष में, लगी कुर्सीयों पर बैठ गए। उनके सम्मुख ब्लैक बोर्ड था- दाहिने तरफ टी. वी. रेकार्डिंग के यंत्र लगे थे। इस वार्ता हेतु डॉ. अलबर्तो को टोकियों-जापान से कुछ जापानी वैज्ञानिकों और धन कुबेरों के साथ आना पड़ा था। वे सभी डॉ. अलबर्तो के समीप बैठ गए थे। मैने अपना भाषण प्रारम्भ किया- स्लाइडों के माध्यम से, क्रमशः मैने सारे प्रयोगों का वर्णन प्रस्तुत किया। यह भी मैने स्पष्ट किया कि उस 6 क्यूबिक मीटर, 6 घनमीटर के टेस्ट चैम्बर पर प्रयोग करने पर वह 3.3 पिको सेकेण्ड के लिए एक मीलीमीटर हट जाता है और इस क्रिया में जो ऊर्जा का विनाश होता है.. क्षरण होता है... वह सम्भवतः इस तथ्य का द्योतक है कि...। मैं अपेन वाक्य को पूरा भी नहीं कर पाई थी कि डॉ. अलबर्तो ने मुझसे कहा "तुम्हारे यह फोटोग्राफ स्पष्ट नहीं हैं, कैमरे का लेंस ठीक से साफ नहीं था?"मैने कहा "नहीं कैमरे का लेंस पूर्ण रूपेण साफ था और उसकी फोकसिंग चेक कर ली गई थी।"
"तो तुम कहना क्या चाहती हो? व्यंगात्मक रूप में डॉ. अलबर्तोंने कहा। मेरा उत्तर संक्षिप्त था" डॉ. अलबर्तो इस टाइम-ट्रेवेल, काल-यात्रा से संबंधित प्रयोग में कुछ त्रुटि है.. कुछ गणनाएं आवश्यक है.. उन्हें चेक करने पर ही यह प्रयोग व्यावहारिक होगा।" मेरी बात सुनकर जापानी वैज्ञानिक अपनी भाषा में कुछ बातें करने लगे। यह देखकर डॉ. अलबर्तो के चेहरे पर क्षोभजनित परिवर्तन के भाव छा गए। वे मुझसे बोले, डॉ. पार्कर आपका डाटा स्पष्ट नहीं है, यह मेरी की गई गणनाओं के विपरीत है... आप मेरे 2030 फिजिकल रिव्यू में प्रकाशित शोध पत्र के अन्तिम परिणामों को तथा सारांश को पुनः पढ़िए। आपकी गणना भ्रामक है। क्या आप यह बताने की कृपा करेंगी कि आपने टेस्ट चैम्बर के पीछे हटने को लकड़ी की स्केल से नापा था?" डॉ. अलबर्तों की बात पर सभी वैज्ञानिक हंस पड़े। क्षोभ के कारण मेरा कण्ठ रूद्ध हो गया। मैं कुछ क्षणों तक अवाक सी डॉ. अलबर्तो को देखती रही, संयत हो मैने उत्तर दिया " डॉ. अलबर्तो मैने यह दूरी को मापने के लिए लेजर-कैलीपर का प्रयोग किया था लकड़ी के स्केल का नहीं.. मैं पुनः दुहराती हूँ. लेजर कैलिपर.. का प्रयोग हमने इस प्रयोग में... किया था...शायद आप जापान में रहें होंगे जब मेरी टीम ने इस प्रयोग को 4 बार रिपीट किया था।"
यह कह कर मैं भाषण स्थल से हट कर सभा कक्ष से बाहर चली गई। हतप्रभ वैज्ञानिक गण भी कुछ समय बाद उठने लगे। इन तथ्यों की प्रतिचर्चा करते करते डॉ. पार्कर का चेहरा रक्ताम हो गया। कुछ संयत दिखने पर इंसपेक्टर मूर ने उनसे पूछा "डॉ. पार्कर "डॉ. अलबर्तो आपकी गणना को महत्व क्यों नहीं देना चाहते थे?"डॉ. पार्कर का उत्तर था "एक तो उन पर इस संस्थान के निदेशक होने का मद तथा सभी वैज्ञानिकों में श्रेष्ठ होने का अभिमान,तो था ही, सर्वोपरि था उस विशाल धन के हाथ से जाने का भय जो जापान हाई पार्टिकिल फिजिक्स शोध में लगाना चाहते थे।"
मुझे भी यह तथ्य समझ में आता है, क्या इसी कारण से जापनी धन कुबेरों का और वैज्ञानिकों का दल आया था?" इंसपेक्टर मूरे ने कहा।
"यही अभिमान, दर्म और मुझे, मेरे सहयोगियों की गणनाओं को, व्यर्थ, निरर्थक और अतर्कपूर्ण सिद्ध की प्रबल इच्छा ने, उसे डॉ. अलबर्तो को एक्सीपेरीमेन्टल चैम्बर में जाने को प्रेरित किया था।" डॉ. पार्कर की बात पूरी नहीं हो सकी उस स्थल पर र्सन के दो वैज्ञानिक डॉ. पार्कर की खोज करते हुए आ गए। उन्हें देखकर डॉ. पार्कर उठकर उनके साथ कुछ विचार-विमर्श करने लगीं। अनुमानतः वे पन्द्रह मिनट बाद पुनः इंसपेक्टर मूर के साथ थीं। इंसपेक्टर मूर के उन दोनों वैज्ञानिकों के विषय में पूछने पर डॉ. पार्कर ने "बताया यह मेरे सहयोगी हैं और एक विशेष यंत्र की संरचना में व्यस्त हैं जो भविष्य में उन जे-वोसनों के विषय में विस्तृत अध्ययन हेतु उपयोगी सिद्ध हो सकेगा।"
"ओह तो मैं आप से वार्ता के सूत्र को पुनः जोड़ना चाहता हूँ। डॉ. अलबर्तों ने किस प्रकार अपने को प्रयोग हेतु- तैयार किया था? तथा प्रयोग को सफल सिद्ध करने की उसकी अवधारणा क्या थी? इंसपेक्टर ने पूछा।
"जे-फील्ड को निष्पादित करने के लिए जिस मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है वह हमें ज्ञात थी इस कारण डॉ. अलबर्ती का विचार था कि यदि वह पांच सेकन्डों के लिए समय से पीछे जाने का प्रयोग होने दें तो वह पुनः इस समय सीमा के पूर्ण होने के उपरान्त वापस आ जायेगा। इसको सिद्ध करने के लिए उसने ज्यूरिच की बाजार में स्वर्ण का भाव 5 सेकेन्ड पूर्व नोट करा देनें का, उसे एक सील्ड घड़ी के साथ रख देने का निर्देश दिया था।"डॉ. वार्कर ने अपने बालों को कंघी से व्यवस्थित करते हुए बताया। इंसपेक्टर मूर ने पुनः उनसे पूछा "र्सन में कार्यरत अन्य भौतिकविदों ने डॉ. अलबर्तों के इस अभिनव प्रयोग के विषय में क्या विचार व्यक्त किए थे"? "ओह! सबका विचार था कि डॉ. अलबर्तो का स्वतः प्रयोग का अंश बनना का जो विचार है, पागलपन भरा विचार है और वे सस्ती लोकप्रियता पाने हेतु यह कर रहे हैं। पर उससे कहता कौन? उसे समझाता कौन और रोकता कौन? "यदि आप चाहें तो मैं उस सारे घटनाक्रम की वीडियो रेकार्डिंग दिखा सकती हूँ।"
"मैं अवश्य देखना चाहूँगा, आपके साथ" इंसपेक्टर मूर ने कुछ सोचते हुए कहा। कुछ क्षणों बाद विडियो रिकार्ड की गई फिल्म स्क्रीन पर आने लगी। डॉ. पार्कर बता रहीं थी" यह टी.वी. ई.-115 कक्ष हैं। इसमें लगे 50 टी.वी. सेटों को और 25 भौतिकविदों को विभिन्न नियंत्रक यंत्रों के समीप बैठे देख रहे हैं। वह देखिए डॉ. अलबर्तो सीढ़ियों से उतर कर उस प्रयेाग में आने वाले चैम्बर का निरीक्षण कर रहे हैं। एकाएक डॉ. अलबर्तो ने अपनी ड्रेस बदली- नारंगी रंग का जम्प सूट पहन लिया, साथ खड़े वैज्ञानिक से जापानी वैज्ञानिक से कुछ बातें करने लगे, वह वैज्ञानिक मुस्करा रहा था। दूर नियंत्रण कक्ष से एक वैज्ञानिक की आवाज गँूज रही थी- "मैं कमांड की प्रतीक्षा कर रहा हूँ....वेटिंग फार कमान्ड। दूसरी आवाज स्पष्ट सुनाई पड़ रही थी, क्या काउन्टर सही रूप से कार्य कर रहा है? इट इज ओके।" प्रोटन चेक ओ. के.।" और स्क्रीन पर अनेक ग्राफ और कर्व उभरने लगे। इंसपेक्टर मूर मंत्रमुग्ध से उन्हें देखते रहे।
कुछ पलों के उपरान्त दूर से "आल ओ.के... ओके की ध्वनि आ रही थी और तभी स्क्रीन पर कंट्रोल रूम में बैठी डॉ. पार्कर का चित्र उभर कर सामने आ गया। उसे देखकर इंसपेक्टर ने पूछा "यदि डॉ. अलबर्तो को आप पर अविश्वास था... आपकी गणना पर संदेह था तो उसने आपको कंट्रोल रूम में क्यों भेजा?" डॉ. पार्कर ने धीरे से कहा "सिर्फ मुझे प्रताड़ित करने हेतु...मुझे अपमानित करने हेतु और यह दिखाने के लिए कि वह हम सब का बॉस है उसकी धारणा सही है और मेरी गलत। स्क्रीन पर डॉ. अलबर्तों सभी को वेव करते, हाथ हिलाते उस टेस्ट चैम्बर में प्रवेश किए। उस कक्ष में, टेस्ट चैम्बर की प्रयोग हेतु तत्पर-अवस्था के इंडीकेटर सब कुछ सुचारु रूप से तैयार है, का संकेत देने लगे। डॉ. अलबर्तो चैम्बर में लेट गये और एक दूरस्थ रोबो की यंत्रिक ध्वनि गँज उठी " वीम स्कैनिंग सीक्वेंस रेडी"। कंट्रोल केन्द्र में बैठी डॉ. पार्कर हाथ हिला हिला कर कह रही थीं" प्लीज डॉ. अलबर्तो अपने पर प्रयोग मत करो... प्लीज सोचो।" कुछ पल बाद डॉ. अलबर्तो की आवाज धीमे स्वर में आने लगी "ज्यूरिच की गोल्ड प्राइस आ गई.. डॉ. पार्कर जब काउन्टर 2 पर पहुंचे तो तुम जोर से उस समय स्वर्ण का रेट बोलो...मैं तुम्हारा बॉस तुम्हें आज्ञा देता हूँ।"
स्क्रीन पर डॉ. पार्कर के चेहरे पर छा गया तनाव स्पष्ट दिख रहा था... वे चिन्तित भाव से अपने सहयोगी भौतिकीविद को देख रही थीं... उसके चेहरे पर तटस्थता का भाव स्पष्ट दिख रहा था। हेड-फोन लगाए-एक वैज्ञानिक डॉ. पार्कर से कुछ कह रहा था... रोबो की आवाज तेज थी, वह घोषणा कर रहा था "फर्स्ट साइकिल-चक्र-शुरू और उसने शून्य से उल्टी गिनती प्रारम्भ कर दी। सेकेन्ड राउन्ड पर डॉ. पार्कर ज्यूरिम की गोल्ड प्राइस-सुवर्ण मूल्य, यूरो मुद्रा में घोषित कर रही थीं.. 30-32 यूरो प्रति आंउस... उस कक्ष में मृत्यु की सी शान्ति थी। "आल ओके रेडी" रोबो की आवाज गँजी। इंसपेक्टर स्क्रीन पर देख रहे थे, काँपते हाथों से डॉ. पार्कर ने स्वीच दबा दी...तत्क्षण टेस्ट चैम्बरसे डॉ. अलबर्तो अदृश्य हो गए सभी चकित से उस चैम्बर को देख रहे थे। स्क्रीन पर कुछ बिन्दु उभरे और फिर सभी दृश्य समाप्त हो गए।
इंसपेक्टर कुछ पलों तक आंखें बन्द कर सोचते रहे फिर बोले "कितनी दूर डॉ. अलबर्तो स्पेस में 3.3 सेकेन्ड में गए होंगे अनुमानतः आपकी गणना के अनुसार डॉ. पार्कर? "मात्र 1.5 मिलियन किलोमीटर"। "और उनके वापस न आ पाने के कारण... डॉ. पार्कर?" "डॉ. अलबर्तो द्वारा विज्ञान सम्मत- भौतिकी सम्मत- हाई एनर्जी पार्टीकिल फिजिक्स सम्मत... तथ्यों की उपेक्षा और इस सर्वविदित तथ्य की उपेक्षा, कि प्रयोग के उपरान्त टेस्ट चैम्बर एक मिलीमीटर पीछे तो हटता है पर प्रयोग समाप्ति के उपरान्त अपनी पूर्व स्थिति में वापस नहीं आता, यही उनकी हठधर्मिता थी।" कह कर डॉ. पार्कर उठ पड़ीं और कहने लगीं "काल यात्रा- टाइम-ट्रेवेल संभव नहीं है, विज्ञान सम्मत नहीं है और इंसपेक्टर एक प्रश्न आपसे "सभी तथ्यों के अवलोकन करने के बाद... आप ही बताएँ, क्या मेरे ऊपर डॉ. अलबर्तो की हत्या का अभियोग बनता है?" नहीं- डॉ. पार्कर नहीं कह कर इंसपेक्टर मूर ने डॉ. पार्कर से हाथ मिलाया और कक्ष से बाहर आ गए। डॉ. पार्कर के चेहरे पर उदय होते सूर्य की आभा छा गई थी, मानसिक कुहासा छट चुका था। इंसपेक्टर मूर की कार तेजी से अपने आफिस की ओर चली जा रही थी। आज ही उन्हें इस केस की फाइल को क्लोज करना था।