मोहन के घर अफरा-तफरी मची थी। गॉव के कई लोग उसके घर के सामने इकठ्ठा हो गए थे। मोहन के घर वाले भी घर के बाहर ही खडे थे। उनके घर में एक अजीब सा जानवर घुस गया था। खपरैल की तरह के शल्कों वाले इस जानवर को देखकर मोहन की माँ इतना तेज चिल्लाई कि लगा अचानक कोई बादल फट पड़ा हो। उनके चिल्लाने से घर के सभी सदस्य मोहन की माँ की ओर दौड़े। जानवर भी इतनी तेज चीख से डर कर कमरे के बाद बने ओसारे की ओर भागा और ओसारे के कोने में जहॉ थोड़ा अंधेरा था, वही दुबक गया। मोहन की माँ सबको लेकर घर के बाहर भागी और दरवाजे की कुंडी चढ़ा कर हॉफते हुए पूरी घटना बतायी।
"मैं चूल्हे पर खाना पका रही थी की वह जानवर घर के अन्दर घुसा। यह तो अच्छा हुआ की मैं उस जानवर को पहले ही देख गयी और चिल्ला दी।"
लोग जुटने लगे थे। जितने लोग उतनी बातें। तभी वह जानवर खिड़की पर दिखा और अगले ही क्षण घर के अंदर भाग गया। उसके दिखते ही भीड़ में भगदड़ सी हुई। कुछ कदम इधर-उधर भाग कर लोग खिड़की की ओर देखे। अब सभी अपनी-अपनी समझदारी दिखाने लगे।
"इस तरह के जीव तो बहुत पुराने समय में पाये जाते थे। मेरे दादा जी इसके बारे में बताया करते थे।" गॉव के गपोड़ी गोपीचंद ने अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को फैलाते हुए कहा।
"हूंँ तुम्हारे दादा जी।" गाँव के मोटा बनिये ने गोपी की बात काटी।
"यह जंगल का सबसे खतरनाक जीव है। एक बार में 8-9 साल के छोरे को सफाचट्ट कर सकता है। देखा नहीं कैसे खिड़की से थूथन निकालकर गंध ले रहा था।"
"इस खतरनाक जीव का नाम क्या है दादा?" चिन्टू ने पूछा। मोटा बनिया बस डींग हॉक रहा था। नाम तो दूर उसने तो इस जानवर को पहली बार देखा ही था। वह झेंप गया और खीझ कर बोला, "नाम क्या करेगा, बस यह जान लो कि बहुत खतरनाक जानवर है यह।"
रहमान स्कूल जाने को तैयार हो रहा था। वह गाँव के ही जूनियर हाई स्कूल में कक्षा आठ का विद्यार्थी था। मोहन उसका सहपाठी एवं जिगरी दोस्त था। घटना सुनकर वह भी भागता हुआ मोहन के घर पहुंचा। उसने सुना लोग तरह-तरह की उटपटाँग बातें कर रहे थे। तभी वह जानवर एक बार फिर खिड़की के पास आ गया और जंगले में लगी छड़ों के बीच अपना मुँह घुसाने का प्रयास करने लगा। भीड़ में एक बार फिर भगदड़ हुई। रहमान खिड़की के नजदीक पहुंच गया। रहमान को अपने नजदीक देखकर वह जानवर अंदर की ओर भाग गया। तब तक मोहन भी आ गया जो आटा चक्की पर गेहूँ रखने गया था। भीड़ में से कुछ लोगों ने कहा,"अरे रहमान पीछे हटो, बहुत खतरनाक जानवर है, नुकसान पहुँचा देगा।"
रहमान धीमें से मुस्कुराया, "यह कोई खतरनाक जानवर नहीं है। यह तो बहुत ही शान्ति प्रिय और दब्बू जीव है जिसे पैंगोलिन के नाम से जाना जाता है।"
"नही बेटा यह जहरीला भी है और खतरनाक भी। देखा नहीं तुमने उसकी लम्बी जीभ और खतरनाक पैने नाखून?" मोहन की मॉ अभी भी बहुत घबड़ाई हुई थी।
"नहीं चाची यह पैंगोलिन ही है। चीटी और दीमक इसके मुख्य आहार हैं जिसकी बॉबी यह अपने मजबूत पैजों से तोड़ देता है एवं लम्बी लिसलिसी जीभ से उन्हें सुडक लेता है।" रहमान बोला।
"हॉ अम्मा रहमान ठीक कह रहा है। इसे सभी वन्य जीवों के बारे में खूब पता है। इसने वन्य जीवों पर खूब किताबे तढ़ी है। मास्टर जी भी जब पर्यावरण विज्ञान वाली पुस्तक में अटकते हैं तो रहमान से ही पूछते है।