भाल रचे कुंकुम केसर, निज हाथ में प्यारा तिरंगा उठाये। राष्ट्र के...
कविता बनती है, करुणा दया ममता और प्रेम की- अनुभूति से; और-...
पंडितजी ने पत्रा पढ़ा, और- गणना करके बताया, जज़मान ! प्रभु के -...
आकाश गंगा के कोने में तीव्र प्रकाश और फिर एक विस्फोट टिमटिमाती मण...
फिज़ा अब बस करो क्यों पीट रही हो लकीर तेरी लुट चुकी है तकदीर...
भेजी हैं नासा ने मंगल से कुछ तस्वीरें, कहा मंगल...
युग बदला दुनिया बदली कम्प्युटर आया। सबल सूचना तंत्र...
अगर तुम चाहो तो परिवर्तन संभव है ! पर, तुम इस चाह से परे...
आसमान ढका है बादलों के शामियाने से जिसे ठीक से धो नहीं पाया मुहल्ले का...
मृत्यु तुम आना जैसे आती है पवन गुलाब के बग़ीचे में दबे पांव ओस की...
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