कवितायेँ

  • भारत माता -- डा श्याम गुप्त

    भाल रचे  कुंकुम केसर, निज हाथ में प्यारा तिरंगा उठाये।
    राष्ट्र के...

  • अति सर्वत्र वर्जयेत -- डा श्याम गुप्त

    कविता बनती है,
    करुणा दया ममता और प्रेम की-
    अनुभूति से;  और-...

  • प्लास्टिकासुर -- डा श्याम गुप्त

    पंडितजी ने पत्रा पढ़ा, और-
    गणना करके बताया,
    जज़मान ! प्रभु के -...

  • प्रकृति और हम -- हेमन्त द्विवेदी

    आकाश गंगा के कोने में तीव्र प्रकाश
    और फिर एक विस्फोट
    टिमटिमाती मण...

  • चाँद और फिज़ा -- निर्मला कपिला

    फिज़ा अब बस करो
    क्यों पीट रही हो लकीर
    तेरी लुट चुकी है तकदीर
    ...

  • मंगल -- निर्मला कपिला

    भेजी हैं
    नासा ने
    मंगल से
    कुछ तस्वीरें,
    कहा
    मंगल...

  • कम्प्यूटर आया -- डा श्याम गुप्त

    युग बदला दुनिया  बदली  कम्प्युटर आया।

    सबल सूचना तंत्र...

  • परिवर्तन -- रश्मि प्रभा

    अगर तुम चाहो
    तो परिवर्तन संभव है !
    पर,
    तुम इस चाह से परे...

  • श्री सूर्य -- राजेश्वर वशिष्ठ

    आसमान ढका है बादलों के शामियाने से
    जिसे ठीक से धो नहीं पाया मुहल्ले का...

  • मृत्यु -- राजेश्वर वशिष्ठ

    मृत्यु तुम आना
    जैसे आती है पवन गुलाब के बग़ीचे में
    दबे पांव ओस की...