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बोन्साई

पेड़ों को गहरी धरती चाहिए होती है ; पेड़ों को प्रशस्त आकाश चाहिए

आज के संपन्न, सभ्य आदमी के पास न धरती है, न आकाश

पर पेड़ उसे चाहिए।

वह पेड़ को बोन्साई बना लेता है गमलों में पेड़ उगाए जाते हैं

पेड़ बौना हो जाता है, पर पूर्ण रूप से उपयोगी रहता है;

बिना धरती के, बिना सम्भावनाओं की भूख के ।

चतुर आदमी अपनी सन्तान को बोन्साई बना लेता है ।

रचना: 


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by Dr. Radut.