मैं बचपन में
तितलियों के पीछे भागता था
फूलों को तोड़ कर
किताबों में दबाकर सुखाता था
और इसके लिये
मार खाता था
आज आंगन की तितलियों को
मारकर किताबों में दबाकर सुखाती है
दीवारों पर रबर की
छिपकलियां सजाकर,
शान से सबको दिखाती है
मेरी इककीसवीं सदी की बेटी
रचनाकार:
रचना: