Jump to Navigation

साइ-फाइ-कू

इस आलेख का उद्देश्य हिन्दी कविता प्रेमियों को हिन्दी कविता की नवीनतम और अब तक लगभग अनजानी विधा से परिचित कराना है, इस विधा का नाम है साइ-फाइ-कू।

हिन्दी विज्ञान कथा कविता

अब तक हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस. एफ. पोइट्री) के नाम पर छपने वाली हिन्दी कविताओं में अधिकांश या तो विज्ञान कवितायें है या सामान्य कवितायें। अब तक छपीं कुछ कवितायें ही हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस. एफ. पोइट्री) की श्रेणी में आतीं हैं। वस्तुत: विज्ञान कथा कविता (एस. एफ. पोइट्री) में एक विज्ञान कथा अन्तर्निहित होती है। सादे शब्दों में कहें तो विज्ञान कथा कविता (एस. एफ. पोइट्री) वह होती है जिसके कथ्य पर एक विज्ञान कथा लिखी जा सके।

हाइकू

तीन पंक्तियों  और 17 मात्राओं में प्रकृति पर लिखी जाने वाली परम्परागत जापानी कविता को हाइकू कहा जाता है । मानवीय अन्तदृष्टि के साथ-साथ सीधी, संक्षिप्त अभिव्यक्ति तथा आडम्बरहीन सरलता इसकी विशेषता है। पर हिन्दी के शीर्ष कवियों में से ‘‘अज्ञेय’’ से लेकर आज तक कई लोग हाथ आजमा चुके हैं।

साइ-फाइ-कू: साइ-फाइ-कू वास्तव में विज्ञान कथा कविता (एस. एफ. पोइट्री) का हाइकू संस्करण ही है।

पश्चिम में  लिखी जा रही विज्ञान कथा  कविता के अन्तर्गत हाइकू  की तर्ज पर (Sci-Fi- Ku)  के नाम से टाम ब्रिंक ने इसका शुभारम्भ किया। किन्तु मूल हाइकू के विपरीत प्रकृति के स्थान पर विज्ञान कथा इसकी विषय वस्तु होती है। गो कि प्राकृतिक तत्वों का समावेश करने एवं 17 से अधिक मात्राओं की इसमें मनाही नहीं है। साइ-फाइ-कू लम्बी कविता के रूप में भी लिखा जा सकता है, मगर प्रत्येक साइ-फाइ-कू अपने आप में स्वतन्त्र हो। उपलब्ध जानकारी के आधार पर ये कहा जा सकता है कि अब तक हिन्दी में (शायद पूरे भारत में) साइ-फाइ-कू कभी नहीं लिखे गये हैं। आलेख लेखक की व्यक्तिगत जानकारी में हिन्दी भाषा में (शायद पूरे भारत में) मात्र तीन-चार लोग ही इस विधा में लिख् रहे हैं। आलेख लेखक भी उनमें से एक है। इससे अन्य हिन्दी कविता हिन्दी विज्ञान कथा कविता लेखकों को भी प्रेरणा मिले ऐसी अभिलाषा है। पाठकों की टिप्पणियों की व्यग्रता से प्रतीक्षा है।

प्रस्तुत हैं कुछ चुनी हुई रचनाएँ-

हेमन्त द्विवेदी  के कुछ साइ-फाइ-कू


ब्रह्माण्ड में
कुछ भी नियत नहीं
सिवा इस कथन के !
 

तुम कभी देखोगे
रोबोट को पढ़ाते हुए
मानवता का पाठ !


भस्मासुर-
निर्णय लेने वाला
रोबोट !


मिष्तष्क  की खिड़की में
विचारों की
सैर !
 
५.
पृथ्वी-एक विमान
जिस पर सवार
दुनिया सारी !


पानी का उद्दाम आवेग
पनचक्की का मधुर संगीत
ऊर्जा कभी बेकार नहीं जाती !

७ 
ब्रह्माण्ड में 
कुछ भी नियत नहीं 
सिवा इस कथन के !
 

पेण्डुलम  जैसा ही जीवन 
एक कोने से दूसरे कोने तक
वैसे ही बैटरी चुक जाने पर रुक जाना!
 

तुम कभी देखोगे
रोबोट को पढ़ाते हुए
मानवता का पाठ !
 
१०.
तालाब में फेंका पत्थर
तरंगो का उठना-गिरना 
जीवन की भान्ति !
 
११.
कुछ भी निरपेक्ष नहीं
टिमटिमाते तारे 
बिना प्रकाश के दमकता चान्द !
 
१२.
तुमने चान्द पर कदम रखा
हमने चान्दनी को 
पैरों तले कुचल डाला !
 
१३.
कुछ दिन बाद देखोगे
रोबोट्स की टीम को
क्रिकेट खेलते हुए !
 
१४.
भस्मासुर-
निर्णय लेने वाला
रोबोट !
 
१५.
गैस के अणु जैसे
मिष्तष्क में तैरते शब्द
पकड़ में नहीं आते सब !

अरविन्द दुबे (आलेख लेखक के कुछ) साइ-फाइ-कू

इन्टर गैलेक्सियल विरह गीत
मंगल से लौटा यान
नहीं लौटा मेरा एलियन 
मेरी जीवन आशा

स्पेस युग का प्रेम गीत
परमाणु में उर्जा से मुझमें हो तुम 
मैं ढ़ूंढ़ती फिरी 
अल्फा सेन्टारी पर

मेरे प्रभु
सप्तवणी प्रकाश मैं
कृश्ण विवर तुम
मेरे प्रभु

डीप इम्पैक्ट
ऐसे टकराये तुम मुझसे
दिख गया तुम्हारा
असली रूप मुझे

क्लोनित समस्यायें
(1)
मेरी क्लोन बेटी
चूमती है मेरे पति को 
मेरी ही तरह

(2)
मेरे पति के क्लोन
कौन हो तुम मेरे 
बेटे या........

(3)
मैं जिसका क्लोन हूं 
उस व्यक्ति की पत्नी
मेरी मॉ (?)

4)
क्लोन भार्या
क्या पुकारू तुम्हें
पतोहू या...?



Main menu 2

by Dr. Radut.