भेजी हैं
नासा ने
मंगल से
कुछ तस्वीरें,
कहा
मंगल पर कभी
हुया करती थी
नहरें,
शायद कभी टकराया था
केतू कोई
और कर दिया था
मंगल के दिल पर छेद्
मगर मैं जानती थी
बहुत पहले
सुना भी था कि मंगल का
संबन्ध तुम से था
और मेरा वीनस [शुक्र] से
मुझे पता है
वो नहर मेरे
आँसूओँ का समुद्र था
जो तुम्हारी की
निर्दयता पर
मैने ने बहाये थे
वो केतू और कोई नहीं
मेरी आहों का
धूम केतू था
जिसने तुम पर बरसाये
तमाम उम्र आँसू
मगर तोड सकी न
तेरा गरूर
और सूख गया
वो दरिया भी
ज्यों ज्यों जली मेरे
जज़्बातों की अर्थ
शाप दिया था मैने
नहीं पनपेगा
तुझ पर जीवन
मेरे बाद
और आज भी तू
पत्थर ही है
केवल पत्थर की चट्टान
-- निर्मला कपिला