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परिवर्तन

अगर तुम चाहो
तो परिवर्तन संभव है !
पर,
तुम इस चाह से परे
दूसरों  की प्रतीक्षा करते हो
और उसकी आलोचना में
वक्त बरबाद करते हो !
उठकर देखो -
धीरे-धीरे कई कदम साथ दिखेंगे.....
चलाने से पहले
ख़ुद चलना होता है,
सीख देने से पहले
सीखना होता है............
असंभव को संभव का आयाम तुम दो।
पानी की धारा को बदलने का सामर्थ्य
तुम्हारे ही भीतर है !
पीछे मुड़कर मत देखो,
शुरुआत हमेशा घर से हो
तभी परिवर्तन होता है !!!

-- रश्मि प्रभा

रचनाकार: 


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by Dr. Radut.