कवितायेँ

  • कृष्ण लीला: वैज्ञानिक व सामाजिक तत्वार्थ... -- डा श्याम गुप्त

    (कुण्डली छंद )

    १. राक्षस नाश.....
    विविध रूप बहुभाव युत, असुर किये स...

  • कन्या कुमारी पर... -- डा श्याम गुप्त

    सागर की उत्ताल तरंगो, लहर लहर कर लहराती हो,
    भारत मां की चरण-वन्दना में मधु...

  • दुःस्वप्न -- हेमन्त द्विवेदी

    जाने कैसे खंडहर कालेजों में
    छात्रों का रूटीन लौट आया-
    क्यों प्रेम...

  • उदास प्रतिमा -- हेमन्त द्विवेदी

    वो कहता है कि उसके कम्प्यूटर की
    हर फाइल के पीछे उसे एक
    बेचैन आदमी...

  • भयभीत -- हेमन्त द्विवेदी

    विकास एक शब्द नहीं
    एक पैना अस्त्र है
    जिसने मानव जाति पर
    सदि...

  • भस्मासुर -- हेमन्त द्विवेदी

    मैंने एक रोबोट देखा है
    जो हूबहू हमारे जैसा है
    उसके आपरेटर ने चलाक...

  • आंगन में ओजोन -- हेमन्त द्विवेदी

    मेरे आंगन में जो पौधा
    रोपा था तुमने
    निरे बचपन में
    आज हवा की...

  • ईश्वर, विज्ञान व धर्म -- डा श्याम गुप्त

    जब् ईश्वर नहीं था,
    कितना सादा था जीवन,
    रहा करते थे हम-
    पेडो...

  • उड़न तश्तरी -- हेमन्त द्विवेदी

    मेरे घर के पिछवाड़े
    ईसाइयों की सेमंट्री है
    चारो ओर चारदीवारी से घि...

  • साइ-फाइ-कू -- डॉ. अरविन्द दुबे


    इस आलेख का उद्देश्य हिन्दी कविता प्रेमियों को हिन्दी कविता की नवीनतम औ...