पिछले हफ़्ते नासा ने चांद पर दो मानव निर्मित उपकरण गिराये थे, जिनमे से एक था राकेट और दूसरी थी एक प्रयोगशाला। इस मिशन का उद्देश्य वहाँ पानी की खोज था। रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ता अब इस टक्कर द्वारा एकत्रित आकडों का अध्यन कर रहें है और किसी भी रिपोर्ट के आने मे लगभग २ हफ़्ते का समय लग जायेगा, और त...
आजकल आधुनिक समाज मे रोबोट के उपयोग का प्रचलन बढता जा रहा है। लोग रोबोट का इस्तेमाल घरेलू कामों, संचार, मनोरंजन तथा एक साथी की तरह करते हैं। एक शोध के अनुसार रोबोट के इस बढते इस्तेमाल से होने वाले खतरों पर जरूरी ध्यान कभी नही दिया गया। इस शोध का आधार विज्ञान कथाओं के 'दुष्ट रोबोट' नही वरन...
अत्यंत दुख: की बात है कि ईडियन साईस राईटर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य श्री रान किशोर सहाय जी ने देह त्याग कर इस संसार को अलविदा कह दिया है। वे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा सी.एस. आई. आर. के सेवानिवृत सम्पादक भी थे।
आज शाम लगभग ७.३० बजे एक दो टन का राकेट चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव के एक क्रेटर (गढ्ढे) से टकरायेगा। इससे उठने वाले गुबार -- जो कि गैस और धूल से भरा होगा -- मे वैज्ञानिक चन्द्रमा पर बर्फ़ या पानी की मौजूदगी का पता लगाने की चेष्ठा करेंगे।
सन 2004 मे एपोफ़िस क्षुद्रग्रह की खोज ने वैज्ञानिक समुदाय के बीच भय स्थापित कर दिया था, जब गणनाओं से यह तसवीर सामने आयी थी कि यह क्षुद्रग्रह सन 2036 मे पृथ्वी से टकरा कर यहाँ महा-विनाश ला सकता है। इस खुलासे के बाद से विश्व भर के वैज्ञानिक इस क्षुद्रग्रह के पथ और पृथ्वी से उसकी टक्कर की गणना करने मे प...
कल्किआन अंग्रेजी मे प्रकाशित एक समाचार के अनुसार नासा ने शनि ग्रह का एक नया छल्ला खोजा निकाला है। यह नया छल्ला इतना विशाल है कि इसमे १ अरब प्रथ्वी समा जायेंगी। यह छ्ल्ला नासा के स्पिट्जर खगोल दूरबीन ने खोजा है।
चन्द्रा अन्तरिक्ष दूरबीन ने दो आपसे मे टकराते ब्लैक होल्स (श्याम विवर ) का दुर्लभ चित्र लिया है। यह महाकाय श्याम विवर एन.जी.सी. ६२४० नामक आकाश-गंगा मे हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि यह टकराव या संगम कुछ ३०० लाख साल पूर्व प्रारंभ हुआ था और कुछ हजारों लाखों साल बाद भविष्य मे पूरा होगा।
सर्न के पार्टिकल कोलाइडर को लेकर तरह तरह की शंकाये पैदा हुइ थीं, कुछ वैज्ञानिकों ने तो यह तक कह डाला था कि इससे एक छोटे "श्याम विवर" का निर्माण हो सकता है जो शायद सम्पूर्ण प्रथ्वी को ही अपने ग्रास मे ले ले।
सन १९८० मे लुइस अल्वारेज़ और उनक सहयोगियों ने दुनियाँ को इस खोज से चौंका दिया था कि ६५० लाख वर्ष पूर्व एक उल्का-पात मे प्रथ्वी के अधिकतर प्राणी तथा डायनासोर का समूचा विनाश हो गया था। लेकिन उसके बाद से लगातार यह बहस चली आ रही है कि इस महाविनाश के उपरान्त प्रथ्वी पर जीवन पुन: कब पनपना प्रार...