कैलीफ़ोर्निया विश्वविध्यालय के शोधकर्ताओं ने उन महत्वपूर्ण जैव-रसायनिक मार्गों (पाथवे) का पता लगा लिया है जो कि संभवत: मासपेशियों के बुढापे के लिये जिम्मेवार् हैं। और मजे की बात यह है कि इन मार्गो को परिवर्तित् करके वे शोधकर्ता मानव मासपेशियों की घडी को उल्टी करने से सफ़ल हो गये और मासपेशियों को फ़िर से जवान कर दिया।
"हमारा प्रयोग यह दर्शाते है कि यदी सही जैव-रसायनिक सकेतों का प्रयोग किया जाये तो पुरानी मासपेशियों मे मसल स्टेम सेल द्वारा युवा मासपेशियों की तरह ख़ुद को रिपेयर करने और फ़िर से युवा होने की क्षमता पुन: विकसित की जा सकती है," ईराना कोन्बोय, शोधकर्ता, ने बताया।
इससे पूर्व जानवरों पर किये गये शोध से पता चला था कि वयस्क स्टेम सेल की ख़ुद की मरम्मत करने की क्षमता बहुत कुछ उन संकेतो द्वारा नियंत्रित होती है जो उन्हे आसपास की मासपेशियों के ऊतकों से मिलते हैं। और यह संकेत उम्र के साथ इस तरह बदलते है जिससे इन कोशिकाओ मे मरम्मत का काम ठ्प्प पड जाता है और यह बूढी और कमजोर हो जाती है।
इन शोधों ने यह भी दर्शाया कि पुरानी स्टेम सेल मे पुनर्योजी (रिजेनेरेटिव) क्षमाताओं को पुन: विकसित किया जा सकता है, बशर्ते उन तक सही संदेश भेजे जायें। इस शोध से पहले तक यह स्पष्ट नही था कि क्या यह प्रक्रिया इन्सानों मे भी दोहराई जा सकती है या नही। क्योकि प्रयोगशाला मे प्रजनित पशुओ मे एक समान जैविक गुणों या समान जीन होते है, उनहे एक जैसे वातावरण मे रखा जाता है। अत: मानव के मामले मे भी यह तकनीक कारगर है, यह बात बहुत सी बीमारियों के इलाज मे बहुत सहायक होगी।
यह जरूरी नही, जैसा की शीर्षक कहता है कि मानव चला अमरत्व की ओर, कि इसे अमरत्व की तरफ़ कदम माना जाये, हाँ चिकित्सा विज्ञान मे इस शोध से अवश्य सहायता मिलेगी।
आभारः कल्किआन अंग्रेजी