जीवाश्म ईंधन न केवल अधिक प्रदूषण करता है, वैश्विक तापन बढ़ाता है, और संकट पैदा करता है वरन वह समाप्त भी हो रहा है। अतएव विश्व में जीवाश्म ईंधन के विकल्पों की, यथा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, समुद्र ऊर्जा, भूमिगत ऊर्जा आदि को व्यावहारिक एवं किफ़ायती बनाने पर अनुसंधान हो रहे हैं। हवा से चलने वाली मोटर साइकिल इस दिशा में अपने आप वैकल्पिक ऊर्जा का कार्य तो नहीं करेगी किन्तु अंतर दाह एंजिनों के जीवाश्म ईंधन के भारी मात्रा में हो रहे खर्च को बचाएगी। क्योंकि अंतर दाह एंजिन तो जीवाश्म ईंधनों से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वैकल्पिक ऊर्जा की असली बचत तो तब होगी कि जब इन सिलिंडरों में संपीडित हवा भरने का कार्य भी वैकल्पिक ऊर्जा से हो। अस्तु।
एक उपयुक्त सिलिंडर में अधिक दाब पर संपीडित कर हवा के द्वारा टरबाइन चलाई जाएगी; इससे एंजिन का अभिकल्प भी सरल होगा और मरम्मत तथा एंजिन का निर्माण भी। इस पर अनुसंधान में बहुत आगे बढ़ गए हैं भरत राज सिंह और ओंकार सिंह द्वय। उनका ऐसा अभिकल्प 'जर्नल आफ़ रिन्यूएबल एन्ड सस्टैनैबल इनर्जी' में प्रकाशित हुआ है।
इसमें बाधा है एक सश्क्त किन्तु हल्के सिलिंडर की जो अधिक दाब पर अधिक मात्रा में हवा का भंडारण कर सके। इस समय तो जो सिलिंडर है वह एक मोटर साइकिल को ४० मिनिट ही चला सकता है। आधुनिक धातु कर्म के लिये यह कार्य दुष्कर नहीं होगा।