४ जुलाई को जर्मनी की एल्प्स पर्वत श्रंखला पर मानव ने प्रकृति के नयनाभराम के लिये एक और पुल बांधा।
गार्मिश-पार्टेन्किर्कन वैसे भी जर्मनी का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है। इसकी कई खूबियाँ हैं। १. जर्मनी की सबसे ऊची चोटी जुग्सपित्ज यहीँ पर है। यह सुन्दर और नायाब शहर जर्मनी की बवेरियन परंपराओं का गढ है -- हर तरफ आपको बवेरियन संस्कृति देखने को मिल जायेगी। इसके अलावा यह शहर सन १९३६ मे शीत-काल ओलंपिक्स का मेजबान था और सन २०१८ के लिये दावेदारी मे है। आधुनिक वैज्ञानिक समाज, परंपराओं, खेतीबाडी और उत्सवों का शहर/गांव है गार्मिश।
अमरीकी मार्शल सेन्टर होने के कारण यहाँ अंतराष्ट्रीय समुदाय भी आता जाता रहता है। पत्नी अमरीकी सेना से सेवा-निवृत हैं और इसी केन्द्र मे अमरीकी डिपार्टमेट आफ डिफेंस मे कार्यरत हैं। अत: उच्चस्तरीय अंतर्राष्ट्रीय मेहमानो से मुलाकात होती रहती है।
गार्मिश अपने आप मे एक स्वर्ग के स्मान है। मेरी स्टडी की बडी खिडकी के ठीक सामने एल्पस पर्वत धूनी रमाये बैठे हैं। कल अमरीकी स्वतंत्रता दिवस था और क्लास नापर सरीखा महान व्यक्ति हमारा मेहमान। तो हमने इस शुभ-अवसर पर एल्प्सपिक्स जाने की योजना बनायी। तिहरा लाभ तो था ही:
१. नापर परिवार के लिये घूमना फिरना
२. उद्द्घाटन वाले दिन इस मानव-प्रकृति सामनजस्य को देखना और
३. अमरीकी होने के नाते स्वतंत्रता दिवस का उत्सव।
हमने एक केबल कार ले ली जो हजारों फीट ऊपर हमे पर्वत पर ले गयी। बीच मे जब भी कार किसी खंबे से गुअजरती तो वह किसी हींडोले की तरह हवा मे झूलने लगती, मासूम बच्चे डर कर चीखने लगते। सच तो यह था कि हमारी भी घिघ्घी बंध जाती थी।
खैर हम ऊपर पहुँचे, और दृश्य देखे कर डरे भी और भाव विभोर भी हो गये। पत्त्नि और मेरी, दोनो की सिरे पर जा कर नीचे झांकने की हिम्मत नही हुई। नापर दंपत्ति के बच्चे दौड दौड कर नीचे झांक रहे थे -- शायद बच्चों मे व्यस्क वाला भय नही होता। डरने की वजह भी थी -- एल्प्सपिट्ज पर्वत कि चोटी से यह एक्स सरीखे प्लेटफार्म हवा मे हजारों फीट ऊपर टंगे है और आप जालीदार इस्पात से पैरो तले हजारों फीट नीचे जमीन देख सकते है। अंतिम सिरे शीशे के बने हैं जिससे आप झांक सकते है। कोई कडे दिल वाला ही यहाँ से नीचे झांक सकता है।
मैने पत्नी से कहा की पहले कुछ खा लेते है तब ही मै कोशिश करूगा। तो मैने एक प्रेत्सल, एक और २ गिलास उम्दा वीसबियर के बाद खुद को तैयार किया। उसके बाद तो बस प्रकृति थी और मानव। यह रहे चित्र। वीडियो शीघ्र।
क्या आप इसे मानव-ब्नाम मानते हैं या मानव और प्रकृति?
