यह अभी तक नहीं बन सकते क्योंकि अभी तक वैज्ञानिक हरे रंग का ठोस अवस्था वाला लेज़र नहीं बना पाए हैं।
ठोस अवस्था वाले लेज़र का उपयोग ही इतने छोटे प्रदर्श बना सकते हैं कि जो सैलफ़ोन के लिये उपयुक्त हों।
लाल रंग के लेज़र तो बहुत पहले बन चुके थे। नीले रंग के लेज़र का २००७ में सान्टा बैरबैरा कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक नाकामूरा ने आविष्कार किया था। और उसके तुरंत बाद उऩ्होने नीले- बैंगनी लेज़र का अविष्कार कर लिया था। उनके अनुसंधान से यह आशा बलवती हो रही है कि वे शीघ्र ही हरे रंग के लेज़र का भी आविष्कार कर लेंगे।
अत: शीघ्र ही ठोस अवस्था वाले लेज़र का उपयोग कर इतने छोटे प्रदर्श बन सकेंगे कि जो सैलफ़ोन के लिये उपयुक्त हों। और तब हमें ऐसे वीडियो प्रदर्श मिलेंगे जो चमकदार रंगों से चित्र दर्शा सकेंगे तथा जिनकी आयु लम्बी होगी और जो सस्ते भी होंगे।