कलिफ़ोर्निया विश्व विद्यालय डेविस के वैज्ञानिको के अनुसंधान के अनुसार जौ से बनाई गई बियर में आहारी सिलिकान होता है जो हड्डियो का घनत्व बढाने में मदद करता है। यह शोध 'जर्नल आफ़ द साइन्स आफ़ फ़ूड एन्ड एग्रिकल्चर' के फ़रवरी अंक में प्रकाशित हुई है। स्वाभाविक है कि बियर प्रेमी अब अधिक जोर से 'चियर्स' घोष करते हैं।
उऩ्होनें लगभग १०० प्रकार की बियरों का परीक्षण किया और पाया कि जौ की माल्ट पद्धति से बनी और हाप्स द्वारा स्वादवर्धित बियरों में अधिक सिलिकान मिला। उनका सुझाव है कि कम मात्रा में बियर लेने से हड्डियां मजबूत हो सकती हैं।
हमें यह भी सोचना चाहिये कि बियर पान में कुछ नुकसान भी हैं; इससे हमारे यकृत (लिवर) पर अधिक जोर पड़ता है, यह शरीर से पानी अधिक मात्रा मे निकालती है, और इसे पीने से हम 'बहक' भी जाते हैं, विवेक का अंकुश हम पर कमजोर हो जाता है। और जब बियर पीते हैं तो दवा पीने तो नहीं बैठते, अतएव अधिकतर कम मात्रा में नहीं पीते वरन अधिक मात्रा में ही पीते हैं।
इस तरह के अनुसंधान करते हुए सिगरैट कम्पनियों ने जनता को सिगरैट के नुकसानों के ज्ञान से वंचित रखा था, और इस तरह के अनुसंधान मदिरा पान के लिये, वाइन पान के लिये होते रहते हैं और 'अच्छे' संदेश मिलते रहते हैं। अधिक सावधानी की आवश्यकता इसलिये भी होती है क्योंकि इस तरह के अनुसंधान अक्सर निहितस्वार्थों वाली कम्पनियों द्वारा प्रायोजित होते हैं।
खैर मेरी बात को कौन मानेगा, 'फ़ार योअर हैल्थ, 'चियर्स टु बियर्स!!!'