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गुरुत्व बल तथा विद्युत चुम्बकीय बल में संबन्ध

यह तो हम जानते हैं कि ब्रह्मान्ड में चार ही मूल बल हैं - विद्युतचुम्बकीय बल, दुर्बल नाभिकीय बल, तीव्र नाभिकीय़ बल तथा गुरुत्वाकर्षण बल। दुर्बल नाभिकीय बल तथा विद्युतचुम्बकीय बल में सम्बन्ध स्थापित किया जा चुका है। अर्थात आइन्स्टाइन के चारों बलों के एकीकरण के स्वप्न की दिशा में एक कदम रखा जा चुका है।

रेमन्ड कियाओ यदि अपनी परिकल्पना को मूर्तरूप दे सके तो विश्व प्रसिद्धि के साथ नोबेल पुरस्कार तो गारन्टीड है। रेमन्ड किआओ कोई दिवास्वप्न देखने वाले अफ़ीमची तो नहीं‌ है क्योकि कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय 'बार्क्ले' में‌ क्वाण्टम प्रकाशिकी के कार्य के लिये वे प्रसिद्ध हैं। बचपन से ही उनकी रुचि 'रेडियो' के विज्ञान में रही है, वरन यह अधिक सत्य है कि उनके भाई ने उऩ्हें जब पहला क्रिस्टल रेडियो का अनुभव कराया तब से ही वे भौतिकी के दीवाने हो गए थे। और अब वे एक ऐसा प्रयोग करने में व्यस्त हैं जो सफ़ल होने पर उऩ्हें विज्ञान जगत में अमर कर देगा।

कियाओ का मानना है कि एक अतिचालक (सुपर कंडक्टर) रेडियो की तरंगों को (या किऩ्ही भी विद्युत चुम्बकीय तरंगों को) गुरुत्वीय तरंगों में बदल सकेगा; और गुरुत्वीय तरंगों को विद्युत चुम्बकीय तरंगों में !! अतिचालक वह धातु होती है जिसकी विद्युत प्रतिरोधकता अतिशीत के तापक्रमों पर लगभग शून्य हो जाती है। इसका अर्थ यह हुआ कि यह कार्य आइन्स्टाइन के सपने 'एकीकृत क्षेत्र सिद्धान्त' को मूर्त करने की दिशा में दूसरा कदम कहलाएगा ! यहां मुझे विज्ञान कथा के शीर्ष कथाकार आर्थर सी क्लार्क के एक कथन की याद आ रही है - कोई भी अत्युच्च विज्ञान – प्रौद्योगिकी का कार्य एक जादू की तरह दिख सकता है। अब रे कियाओ का प्रयोग ही दर्शाएगा कि उनका यह कार्य जादू‌ है या उच्च विज्ञान- प्रौद्योगिकी की कृति।

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by Dr. Radut.