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सुन्दरियों के लिये मँहगा चावल

एक कम्पनी अपने ब्रैन्ड नाम का लाभ उठाकर एक प्रकार के चावल को बाजार में 'सुन्दरियों के लिये' घोषित कर मँहगा बेच रही है; और उसकी विशेषता क्या है? उसका ग्लाइसैमिक सूचकांक (इण्डैक्स) (जी आई) अन्य चावलों से 'बैहतर' है।

क्या है यह जी आई (ग्लाइसैमिक सूचकांक) ?

यह बतलाता है कि वह आहार कितने जल्दी ग्लूकोज़ में‌ बदलता है। कम जी आई वाला आहार ग्लूकोज़ में धीरे बदलता है इससे रक्त में चीनी के बढ़ने की दर कम होती है जो मधुमेह के रोगियों के लिये कम नुकसान दायक होता है। किन्तु कम्पनी दावा करती है कि इससे हृदय रोगियों को लाभ मिलेगा, जिसका कोई तर्क नहीं‌ है और न कोई प्रमाण दिया गया है।

मधुमेह वालों को कितना लाभ होगा? इस का जी आई ५४.१ है तथा सामान्य चावल का ५८ ! अरे भाई ५४ और ५८ में कितना अन्तर है, १९ और २० का भी नहीं, नगण्य!

और सुन्दरियों के लिये क्या लाभ हैं?

आजकल सुन्दरता का, सम्भवत:, सर्वाधिक सम्मान है, अन्य सभी गुणों से अधिक ! और उसमें भी दुबली पतली होने का अर्थ है अधिक सुन्दर होना ! उनका दावा है कि ज्यादा  जी आई वाला चावल चूंकि जल्दी ग्लूकोज़ में बदलता है अत: वह वसा (फ़ैट) में बदल जाता है, और मोटापा बढ़ाता है। जैसे ५४ वैसे ५८, इसमें कौन सा बड़ा अंतर है? ५५ से कम  जी आई वाले आहारों को 'कम जी आई' वाला माना जाता है; अत: ५८ जी आई वाला अधिक जी आई वाला हो गया ! तो? हमें परिभाषा देखना है या अन्तर ? अन्तर तो नगण्य है।

भूरा चावल भी कम जी आई वाला चावल होता है, जब कि उसमें पौष्टिकता भी इन झक्क सफ़ेद चावलों से कहीं अधिक होती है, किन्तु पैसे वाले उसे पसंद नहीं करते।

अब सैक्सी विज्ञापनों के बल पर यह कम्पनी अपना मँहगा चावल बेच लेगी, हम मूर्खों को।

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by Dr. Radut.