एक अद्भुत आविष्कार है जिसमें एक एम१३ (एम५ नहीं !) वाइरस से जल का विद्युत अपघटन करवाया जा सकता है। यह आविष्कार एम आइ टी की वैज्ञानिक एन्जैला बैल्चर ने, पौधों से सीखकर, किया है। (वे साइंटिफ़िक अमैरिकन की वर्ष २००६ की अनुसंधात्री घोषित की गई थीं)।
सस्ती, पर्यावरण मित्र तथा नवीकरणीय ऊर्जा तो आज की सर्वोच्च आवश्यकता है। यह तो हम जानते ही हैं कि जल विद्युत अपघटन करने से हाइड्रोजन तथा आक्सीजन पैदा की जा सकती है, किन्तु प्रचलित पद्धतियां ऊर्जा की दृष्टि से दक्ष नहीं हैं।
यह वाइरस, जो अन्य वाइरसों के समान दुष्ट नहीं है, प्रकाश ऊर्जा को ग्रहण कर उसे विद्युत में बदलता है जिससे जल का विद्युत अपघटन किया गया, तथा जिससे हाइड्रोजन बन सकती है। किन्तु इस कार्य हेतु इस वाइरस के साथ नवाचारी 'इंजीनियरी' की गई थी।
इसके एक छोर पर उत्प्रेरक 'इरिडियम आक्साइड' लगाया गया था, और दूसरे छोर पर प्रकाश संवेदनी रंग 'ज़िंक पारफ़िरिन्स' लगाए गए थे । यह 'ज़िंक पारफ़िरिन्स' प्रकाश को ग्रहण कर उसे वाइरस के द्वारा दूसरे छोर तक पहुँचाते हैं, जहां वे उत्प्रेरक 'इरिडियम आक्साइड' को क्रियाशील करते हैं, जो विद्युत अपघटन कर जल को आक्सीजन तथा हाइड्रोजन के प्रोटान तथा इलैक्ट्रान में अपघटित करते हैं। हमें तो हाइड्रोजन चाहिये, जो इनसे निश्चित ही बनाई जा सकती है, जिसका उपयोग एंजिनों में या ऊर्जा कोशिकाओं में हो सकता है।
सीन्थिया ग्रैबर, साइंटिफ़िक अमैरिकन में, लिखती हैं कि यह अनुसंधान कार्य आगे तेजी से चल रहा है, जो सस्ती, पर्यावरण मित्र तथा नवीकरणीय ऊर्जा पैदा करने में बहुत मदद करेगा।