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क्वान्टम उलझन, प्रकाश संश्लेषण और बेहतर सौर बैटरियां

डा. मोहन सरोवर कैलिफ़ोर्निया विश्व विद्यालय बर्कले में रासायिनिकी में अनुसंधान करते हैं। उनके अध्ययन ने दर्शाया है कि हरित प्रकाश संश्लेषण करने वाली बैक्टीरिया किस तरह लगभग १००% दक्षता से प्रकाश ऊर्जा को अपने लिये उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

आश्चर्य की बात यह है कि यह क्वाण्टम उलझन की प्रक्रिया का उपयोग करती है। क्वाण्टम उलझन हमारे लिये एक नई शाखा है।

क्वाण्टम उलझन प्रक्रिया बहुत अजीब या अद्भुत है। इस प्रक्रिया में उलझे हुए दो क्वाण्टम कण अलग दिशाओं में जाते हुए भी, कितनी भी दूरी होने पर भी,  एक दूसरे के 'तत्काल' सम्बन्ध में रह्ते हैं और एक का  दूसरे पर प्रभाव 'तत्काल' ही पड़ जाता है, बिना एक क्वाण्टम विलम्ब के!

अभी तक हमारे वैज्ञानिक प्रचलित प्रौद्योगिकी के द्वारा बहुत प्रयत्न करने के बाद ४२.८% दक्षता पर पहुँचे हैं। हमारा स्वप्न है कि हम ५० % दक्षता प्राप्त कर लें। अब मनुष्य इनसे शिक्षा लेकर सौर ऊर्जा के उत्पादन में दक्षता बढ़ाएगा !!

वैसे वास्तव में सौर ऊर्जा के उपयोग में जो असली बाधा है वह है भंडारण बैटरियों की, जैसे सीसे- अम्ल की, क्षमता बढ़ाना। अन्यथा सूर्यास्त के बाद तो विद्युत ऊर्जा की लगभग उतनी ही आवश्यकता तो बनी रहेगी।

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by Dr. Radut.