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किसने नर मेंढको को मादा बनाया?

अपतृणनाशक वास्तव में बहुत ही शक्तिशाली रसायन होते हैं और जो हमारी स्राव- ग्रन्थियों (ग्लैन्ड्स) को प्रभावित करने की क्षमता रख सकते हैं। अल्ट्राज़ीन अपतृणनाशक मके तथा अन्य फ़सलों के लिये यू एस में बहुत उपयोग किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षॊं में किये गए अनुसंधानों से यह स्पष्ट हो रहा है कि एट्राज़ीन  पक्षियों, मछलियों, चूहों और मेंढकों की स्रावग्रन्थियों के कार्य में व्यवधान डालती है। अनेक अनुसंधानों में यह देखा गया कि वह लगभग १० % नर मेंढकों को मादा बना देती है जो प्रजनन भी करने लगते हैं। यूनिवर्सिटी आफ़ कैलिफ़ोर्निया बार्क्ले के प्रोफ़ैसर टाइरोन हेइस ने दर्शाया है कि ऐसे नर मेंढक पूर्ण मादा बन गए थे किन्तु उनके जीन्स पूरे के पूरे नर के थे। ऐसी मादा ने जो पहले नर थी जब शिशुओं को जन्म दिया तब सारी संतानें पुरुष थीं, क्योंकि माता पिता दोनों के जीन्स पुरुष के ही थे !! और यह तब हुआ कि जब जल में एट्राज़ीन की मात्रा पूरी तरह से सुरक्षित सीमा के भीतर थी।

 
किन्तु तब भी इसकी निर्माता कम्पनी का दावा है कि यह जानवरों तथा मनुष्यों को हानि नहीं पहुँचाती।

 
किन्तु हमें तो बहुत सावधान रहना चाहिये।  वैसे ही इन रसायनों ने हमारी  मिट्टी, वायु तथा जल को विषैला कर दिया है। कम से कम भारत में जहां मजदूर सस्ते मिल जाते हैं, सर्वोत्तम गोबर खाद, तथा नीम, हींग आदि कीट नाशक उपलब्ध हैं वहां तो रासायनिक अपतृणनाशक, कीटनाशक तथा उर्वरकों का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिये ।

 

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by Dr. Radut.