एक नयी खोज ने अभी तक की सभी मान्यताओं की धता बजा दी है। वैज्ञानिकों ने पौधों मे मादा लिंग हार्मोन प्रोजेस्टेरोन की मौजूदगी की विस्मयकारी खोज की है। अभी तक वैज्ञानिक यही मानते थे कि केवल पशु ही प्रोजेस्टेरोन का निर्माण कर सकते हैं। इस नवीनतम खोज को अमरीकम कैमिकल सोसाईटी मे प्रकाशित किया गया है। अंग्रेजी समाचार यहाँ पढें।
प्रोजेस्टेरोन एक प्रकार का स्टेराईड हार्मोन होता है जो कि अंडाशय से स्रावित होता है। यही हार्मोन गर्भाशय को गर्भ के लिये तैयार करता है और गर्भधारण के उपरान्त भी उसकी रख रखाव करता है। इसी का इस्तेमाल गर्भ निरोधक तथा अन्य दवाईयों मे भी किया जाता है।
गुइडो एफ पाली ने इस पत्रिका मे प्रकाशित लेख मे लिखा है, "प्रोजेस्टेरोन की इस सपष्ट पहचान को अतिरंजित नही किया जा सकता। पशुओं मे इस हार्मोने की जैविक भूमिका पर गहन अध्यन किया गया है, लेकिन पौधों मे इसकी मौजूदगी को लेकर इतनी स्पष्टता नही थी।
इन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हार्मोन, अन्य स्टेराईड की ही तरह ही एक जैव नियामक रहा होगा को करोडों साल पूर्व विकसित हुआ होगा। कालान्तर मे आधुनिक पौधों और पशुओं के आगमन के साथ इस हार्मोन ने भी इन जीवों, पौधों मे प्रवेश किया।
इस महत्वपूर्ण खोज के बाद यह संभावना है कि जीवों मे प्रोजेस्टेरोन की भूमिका को समझने मे मदद मिलेगी। इसके अलावा यह खोज विकासवाद के सिद्धांत को एक नयी दिशा प्रदान करेगा।
वैज्ञानिकों ने इससे पूर्व भी पौधों मे प्रोजेस्टेरोन सरीखे पदार्थ का पता लगाया था। उस समय यह धारण बलवति हो उठी थी कि शायद पौधों मे यह प्रोजेस्टेरोन स्वंय भी मौजूद हो। लेकिन वैज्ञानिको को पौधों मे इस हार्मोन की मौजूदगी का अभी तक कोई निशान नही मिला था। इस खोज ने उनकी कोशिशों को फलीभूत कर दिया है।
विज्ञान की महिमा भी अनंत है। जितना गहरे जायेंगे उतनी गहराई मिलती जायेगी।