भारत भेजेगा अंतरिक्ष मे मानव

भारत ने अंतरिक्ष मे मानव भेजने की घोषणा कर दी है। भारतीय संसथा इसरो के अनुसार भारत सन २०१६ मे अपने अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष मे भेजेगा। इस पूरे मिशन की लागत लगभग ४.८ बिलियन अमरीकी डालर आंकी गयी है।



इसरो ने इस मिशन के लिये यान की रूपरेखा बनाना प्रारंभ कर दिया है। योजना के अनुसार अंतरिक्ष यात्रियों का एक जोडा एक सप्ताह के लिये अंतरिक्ष मे ३०० किलो मीटर की ऊंचाई पर भेजा जायेगा। इस योजना मे होने वाले खर्च के बजट को स्वीकृति के लिये सरकार के पास भेज दिया गया है।

इन अंतरिक्ष यात्रियों को अभ्यास कराने के लिये दक्षिण भारत के किसी क्षेत्र को चुना जायेगा।

सन १९८४ मे राकेश शर्मा अंतरिक्ष मे जाने वाले पहले भारतीय बने थे। वह रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा थे। राकेश शर्मा इसरो का हिस्सा नही थे। वे उस समय भारतीय वायू सेना मे थे। जब रूस ने अन्य देशो की तरह भारत से भी एक यात्री भेजने का अग्रह किया तो इसरों ने खुद उसमे हिस्सा लेने की‌ बजाये मामला वायू सेना को सुपुर्द कर दिया। राकेश शर्मा का चुनान हो गया। लेकिन अब भारत अपने दम पर अंतरिक्ष यात्री भेजने मे सक्षम है।

सन २००८ मे भारत ने चांद पर अपना पहला मिशन -- चन्द्रयान -१ -- भेजा था। इस यान ने चन्द्रमा पर एक उपकरण छोडा था जिससे चन्द्रमा का अध्यन हो सके। चन्द्रयान ने मानव द्वारा चांद पर पानी की खोज मे एक अहम भूमिका अदा की थी। इस यान पर अमरीकी उपकरण लगे थे जिनसे चांद पर पानी की खोज की कोशिश की जानी थी।

इन उपकरणों ने चंद्रयान के नाकाम होने से पहले आवश्यक तथ्य जुटा लिये थे। इसरो के सतीश ने सी.एन.एन. को बताया कि भारत सन २०१२ मे चन्द्रयान २ की‌ तैयारी कर रहा है।

भारत विश्व के गिने चुने राष्ट्रों मे से है जिसके पास अंतरिक्ष मे यान भेजने की क्षमता है। भारत उन चंद देशों मे से है जिसने चंद्रमा पर जाने से सफलता हासिल की है।

बहुत से लोग अज्ञानता वश इन मिशनों पर प्रश्नचिन्ह लगाते है कि भारत के लिये चंद्र यात्रा से ज्यादा सडके आवश्यक हैं। इसरो एक मुनाफे वाली संस्था है। वह भारतीय करदाताओं का धन अनावश्यक कार्यक्रमों‌ पर नही वरन खोज कार्यों‌ मे लगाती है। प्रत्येक मिशन के साथ कुछ विदेशी मिशन भी भेजे जाते हैं‌ जो धनोपार्जन का साधन होते हैं। भारत सरीखी विज्ञानोन्मुख सभ्यता लिये इस प्रकार की योजनाये अत्यंत आवश्यक हैं।

-- स्वप्निल भारतीय