साहित्य

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कल्किआन मे प्रकाशन के लिये रचनाये भेजें।

प्रिय पाठकों,

कल्किआन अब सामान्य साहित्य भी प्रकाशित करेगी

प्रिय पाठकों,

कुछ दिनो पहले हमने एक लघु-कथा प्रकाशित की थी - 'विज्ञान और कला, एक लघु कथा'। संपादक तिवारी जी ने टिप्पणी की थी -- "यह लघु कथा विज्ञान और कविता का सम्बन्ध दर्शाती है, और उनके बीच कोई विरोध नहीं है यह भी।"

स्पाईडर-मैन ४ मे अब नही दिखेंगे टोबी मैग्यूआयर

सोनी पिक्चर्स की आगामी स्पाईडर-मैन फिल्म उस समय खटाई मे पड गयी थी जब सूचना आई कि निर्माता फिल्म की‌ मौजूदा कहानी से खुश नही हैं।

हिंदी लेखकों का किताबी चेहरा: फेस-बुक

किताबी चेहरा या फेस-बुक अब धीरे-धीरे नुक्क्ड वाली चाय की दुकान, रेल्वे स्टेशन का स्टाल बनता जा रहा है। रोज नयी नयी बातें होती है, नयी नयी चर्चायें होती हैं।

हरीश गोयल बने कल्किआन हिंदी सह-सम्पादक

कल्किआन हिंदी के सम्पादक तारा समूह मे एक और नक्षत्र जुड गया है। वरिष्ठ तथा लोकप्रिय विज्ञान साहित्यकार हरीश गोयल को कल्किआन का सह-संपादक नियुक्त किया गया है। अब तक हरीश गोयल के सैकडों‌ लेख तथा विज्ञान कथायें विभिन्न पत्र पत्रिकाओं मे प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमे प्रमुख हैं - विज्ञानं  प्रगति, विज्ञानं कथा पत्रिका, विज्ञानं,आविष्कार, वैज्ञानिक, मधुमती, (राज. साहित्य अकादमी), नंदन, सरिता, अवध अर्चना, नवभारत टाईम्स, दैनिक नवज्योति, राजस्थान पत्रिका वैचारिकी, इलेक्ट्रोनिकी आदि।

विश्व मोहन तिवारी, मानद सम्पादक कल्किआन, ने हरीश गोयल का स्वागत करते हुए कहा, "हरीश गोयल जी मेरे पुराने मित्र हैं, स्थापित विज्ञान कथाकार हैं। उन्हें सम्पादन का विपुल अनुभव है क्योंकि वे हिंदी की एकमात्र पत्रिका 'विज्ञान कथा' के सह-संपादक हैं। वे विचारों में खुले हैं एक विज्ञान विद्यार्थी की तरह ... अतएव उनकी विज्ञान कथाएँ भाविश्यओंमुख तो हैं ही विज्ञान कथाएँ अधिक हैं फंतासी कम। फंतासी उनमें ठीक उतनी होती है जितनी की एक कथा को भाविष्योंमुखी होने के लिए आवश्यक होती है। उन्होंने शायद हिंदी जगत में सर्वाधिक विज्ञान कथाएँ लिखी हैं। हिंदी कल्किआन उनके अनुभव से लाभान्वित होगा। उनका हिंदी  कल्किआन मे मैं ह्रदय से स्वागत करता हूँ और वायदा करता हूँ की कल्किआन दल के साथ काम करने में उन्हें आनंद आएगा। क्योंकि यहाँ हमारा सभी का एक ही लक्ष्य है 'हिंदी में विज्ञान साहित्य' की प्रगति -- कि विश्व के पटला पर उसका स्थान बने। यह अभी तो एक स्वप्न ही है, हम सब मिलकर उसे यथार्थ बनाएंगे।"

कल्किआन कार्यकारी सम्पादक, डा. अरविंद दुबे ने हरीश गोयल का कल्किआन परिवार मे स्वागत करते हुये कहा कि, "हरीश जी एक विशाल परिमाण में रचना करनेवाला लेखक हैं‌ और कल्किआन परिवार मे उनका स्वागत है।"

इस नियुक्ति पर कल्किआन समूह हरीश गोयल को हार्दिक बधाई देता है!

कल्किआन सम्पादक मंडल का स्वरूप अब यह हो गया है:

मानद संपादक -- विश्व मोहन तिवारी
कार्यकारी संपादक -- डॉ अरविन्द दुबे
सह-संपादक -- हरीश गोयल

उप-संपादक
अमित कुमार -- (प्रभार) विज्ञानं कथा व् कविता
जीशान जैदी -- (प्रभार) समाचार, ब्लॉग/चिट्टा व् विज्ञानं कथा
राजेश जैन -- (प्रभार)

संपादक मंडल
संपादक  (विज्ञान) -- शास्त्री जे. सी. फिलिप
चिट्टाकार समिति -- बालसुब्रमण्यम लक्ष्मीनारायण
इरफान ह्यूमन


प्रधान सम्पादक, संस्थापक एवं प्रकाशक
स्वप्निल भारतीय


 

Keywords: Science Fiction Writer, Harish Goyal

भारतीय साहित्य में विज्ञान कथा दो दिवसीय संगोष्ठी

विज्ञान कथा प्रेमियों के  लिये खुश खबरी - सरस्वती भुवन एजुकेशन सोसायटी. औरंगाबाद' तथा 'विज्ञान प्रसार, नई दिल्ली' के  सहयोग से 'इंडियन एसोशिएशन आफ़ साइन्स फ़िक्शन स्टडीज़ (IASFS) वैल्लोर तमिलनाडु ' एक दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन कर रही है.

संगोष्ठी का विषय है - 'भारतीय साहित्य में विज्ञान कथा'
समय है - १४ और १५ नवंबर
स्थान है - औरंगाबाद

औरंगाबाद एक विश्वविख्यात पर्यटन स्थल है, जो कि  एलोरा की मूर्तियों और अजंता के  भित्तिचित्रों की प्राचीन गुफ़ाओं के  लिये विशेषरूप से प्रसिद्ध है। यह दोनॊं दर्शनीय स्थल यूनॆस्को द्वारा घोषित 'विश्व विरासत' स्थल हैं. औरन्गाबाद रेल तथा विमान सेवाओं द्वारा अच्छी तरह पहुंचा जा सकता है.
इस समय औरंगाबाद का मॊसम १४ से २५ शतांश के  भीतर सुहावना रहेगा।

पूरी जानकारी के  लिये कृपया संगोष्ठी के  संचालक डाक्टर वाई एच  देशपान्डे से संपर्क करें-
ई मेल : yhdeshpande@yahoo.co.in:

श्रद्धाँजली: रान किशोर सहाय

अत्यंत दुख: की बात है कि ईडियन साईस राईटर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य श्री रान किशोर सहाय जी ने देह त्याग कर इस संसार को अलविदा कह दिया है। वे एक वरिष्ठ वैज्ञानिक तथा सी.एस. आई. आर. के सेवानिवृत सम्पादक भी थे।

आथर्स गिल्ड आफ इंडिया ने विज्ञान कथाकारों को आमंत्रित किया

४ सितम्बर ०९ को एक ऐतिहासिक संगोष्ठी संपन्न हुई। स्थान था नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित पुस्तक मेले के ८वें हाल का सभागार। संगोष्ठी का विषय था 'भारतीय साहित्य में विज्ञान कथाएं', और यह आयोजित हुई थी अखिल भारतीय प्रसिद्ध संस्था 'आथर्स गिल्ड आफ इंडिया' के तत्वावधान में। संगोष्ठी की अध्यक्षता की विश्व प्रसिद्ध 'सुलभ संस्थान' के अध्यक्ष डा. बिन्देश्वर पाठक ने।

कथाकार जीन वान ट्रोयेर नही रहे!

अमरीकी विज्ञान कथा लेखक तथा कवि जीन वान ट्रोयेर का देहांत हो गया है. उनकी मृत्यु १७ जुलाई २००९ को हुई. वो ५८ वर्ष के थे. जीन जापान में अंग्रेजी के अध्यापक थे और भारतीय विज्ञान कथा साहित्य से जुड़े हुए थे.

भारत् मे पहली बार : मुख्य् धारा साहित्यिकॊ द्वारा विग्यान कथा पर‌ सम्गोष्ठी

आथर्स गिल्ड आफ़ इंडिया द्वारा विज्ञान कथा पर ४ सितंबर ०९ को विज्ञान कथा  पर संगोष्ठी.

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