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घरेलू रोबोट, खतरे की घंटी?

आजकल आधुनिक समाज मे रोबोट के उपयोग का प्रचलन बढता जा रहा है। लोग रोबोट का इस्तेमाल घरेलू कामों, संचार, मनोरंजन तथा एक साथी की तरह करते हैं। एक शोध के अनुसार रोबोट के इस बढते इस्तेमाल से होने वाले खतरों‌ पर जरूरी ध्यान कभी नही दिया गया। इस शोध का आधार विज्ञान कथाओं‌ के 'दुष्ट रोबोट' नही वरन वह रोबोट हैं‌ जिनका दुरुपयोग किया जा सकता है। हिंदी विज्ञान साहित्य पर रोबोट के दुरुपयोग पर कई कहानियाँ लिखी गयी हैं। कल्किआन ने हाल ही मे एक कथा प्रकाशित की थी। लेकिन इस पक्ष का चित्रण शायद ही हिंदी विज्ञान साहित्य मे हुआ हो, अत: यह हिंदी विज्ञान साहित्यकारों के लिये के नया 'विषय' हो सकता है।

वाशिंगटन विश्वविद्यालय की शोधकर्ता तदायोशी कोह्नो के अनुसार,"इस बात पर अत्याधित ध्यान दिया गया है कि रोबोट बुद्धिमान होने के बाद विनाशकारी हो जायें, लेकिन इससे बडे खतरे हैं‌ और यह खतरे ना केवल मौजूदा समय मे संभव हैं‌ बल्कि जयादा खतरनाक हैं‌ और वह है गलत लोगों‌ द्वारा रोबोट का दुरुपयोग।"

उन्होने सहयोगी शोधकर्ताओं‌ के साथ इस समय बाजार और घरों‌ मे मौजूद तीन तरह के रोबोट्स का परीक्षण किया और उनमे सुरक्षा संबंधी कमियाँ पायीं। जिन रोबोट्स का उन्होने आकलन किया इनमे शामिल थे: वोवी रोवियो, जो कि एक वायर-लेस कीट सदृश्य लुढ्कने वाला रोबोट है जिसका उपयोग घर की निगरानी के लिये किया जाता है। इस रोबोट मे एक कैमरा, माईक्रोफ़ोन, तथा स्पीकर लगा होता है। इस रोबोट को 'स्वामी' इंटरनेट के जरिये नियंत्रित कर सकता है। दूसरा रोबोट है इरेक्टर स्पाइकी। यह एक खिलौना सरीखा जासूस रोबोट है जिसमे भी एक कैमरा, माईक्रोफ़ोन, तथा स्पीकर लगा होता है। और तीसरा रोबोट है वोवी रोबोसेपियन वी-२, जिसका नियंत्रण इन्अफ़्रा-रेड तरंगों द्वारा किया जाता है।

इन रोबोट्स के साथ सुरक्षा संबंधी सबसे बडी समस्या यह है कि घर के वायर-लेस नेटवर्क (बेतार जाल) द्वारा प्रेषित संदेशों के जरिये किसी रोबोट की घर मे मौजूदगी का पता आसानी से लगाया जा सकता है। रोबोट के आडियो तथा वीडियो (ध्वनि तथा दृश्य) संदेशों, प्रसारणों को आसानी से इंटरनेट के द्वारा देखा या सुना जा सकता है। इसके आलावा सिर्फ़ कुछ ही रोबोट है जो कि एक यह बताने के लिये बीप या अलार्म बजाते हैं‌ जब कोई उनमे लाग-इन करता है। कुछ ही रोबोट है जो उस समय किसी प्रकार का शोर उत्पन्न करते है जब वे शांत खडें रह कर सूचना इक्ट्ठा कर रहे होते हैं।

शोधकर्ताओ ने आसिमोव के तथाकथित, तथा कालांतर मे लेखकों‌ द्वारा शोषित, कथन का खंडन सा किया जब उन्होने कहा कि एक रोबोट अपने स्वामी या आसपास की वस्तुओं को भी नुक्सान पहुँचा सकता है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह खतरे अभी उतने बडे नही है, लेकिन जैसे जैसे रोबोट परिश्कृत होते जायेंगे और उनका प्रयोग बढता जायेगा, यह खतरे भी बडे होते जायेंगे।

इसके आलावा अगर विज्ञान साहित्यकार इस विषय पर विचार करें‌ तो वे न केवल लोगों को अन्य खतरों के बारे मे बता सकते हैं‌ बल्कि उनके सुझाव भी दे सकते है।

इस जरह के जासूस रोबोट जहाँ आफ़िस मे बैठे बैठे भी आपको अपके घर की तसवीर दिखा सकते है कि सब कुछ ठीक ठाक है या नही, या आप यह देख सकते है कि आपकी बिल्ली या कुत्ते ने खाना खाया या नही, वही दूसरी तरफ़ कोई भी इस प्रणाली मे घुस कर आपके घर का नजारा ले सकता है। चोर इत्यादि आपके रोबोट की प्रणाली मे घुस कर यह देख सकते है कि कब आप घर खाली छोड कर जाते हैं। और यह भी पता लगा सकते है कि आमुक समय आप किसी मीटिंगे मे होंगे और वे कुछ देर के लिये रोबोट को निष्क्रिय करके, जिससे कि उनकी तसवीर कैमरे मे ना आये, आपके घर की सफ़ाई कर सकते हैं। खतरे बहुत है लेकिन रास्ते भी है।

अपडेट: इन खतरों से निपटने के लिये सुझाये गये रास्तों मे प्रमुख हैं अपने रोबोट के सभी संपर्क माध्यमों तथा संदेशों को कूट-बद्ध (इनक्रिप्ट) करना जिससे अन्य कोई इन संदेशों को न पढ पाये। बेतार-जाल की सुरक्षा के लिये जो भी उपाय किये जाते है -- उन्हे "पास-वर्ड" प्रोटेक्टेड बनाना -- इत्यादि वे भी यहाँ अनिवार्य हैं। जैसा कि लेख कहा गया है कि इस् शोध का उददेश्य उन सुरक्षा कमियों‌ को उजागर करना था जिनका संज्ञान लेने के उपरान्त निर्माता कम्पनिया इन् उपायों को प्रयोग करना शुरू करें।

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by Dr. Radut.