सन 2004 मे एपोफ़िस क्षुद्रग्रह की खोज ने वैज्ञानिक समुदाय के बीच भय स्थापित कर दिया था, जब गणनाओं से यह तसवीर सामने आयी थी कि यह क्षुद्रग्रह सन 2036 मे पृथ्वी से टकरा कर यहाँ महा-विनाश ला सकता है। इस खुलासे के बाद से विश्व भर के वैज्ञानिक इस क्षुद्रग्रह के पथ और पृथ्वी से उसकी टक्कर की गणना करने मे प्रयास-रत् हैं। इस क्षुद्रग्रह का आकार फ़ुटबाल के ढाई मैदानों जितना विशाल है अत: आप इस टकराव से होने वाले विनाश का अंदाजा लगा सकते हैं।
पूर्व गणनाओं के अनुसार यह क्षुद्रग्रह जब सन 2029 मे पृथ्वी के अत्यंत करीब से गुजरेगा तो इसकी पृथ्वी या चाँद से टकराने की संभावनायें व्यक्त की गयी थीं। गणनाओं ने यह भी आशंका जताई थी कि संभवत: सन् 2029 मे यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी के एकदम नजदीक उस क्षेत्र से गुजरे जिसे ग्रेविटेशनल की-होल (गुरुत्वाकर्षणीय छिद्र) कहते हैं। यह गुरुत्वाकर्षणीय छिद्र अन्तरिक्ष मे वह स्थान है जिससे हो कर यदि कोई पिण्ड गुजरता है तो पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उसके पथ को इस तरह प्रभावित कर सकता है कि वह अगले चक्कर मे पृथ्वी से टकरा जाये। तो वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार एपोफ़िस सन 2029 मे गुरुत्वाकर्षणीय छिद्र से गुजरेगा और यह घटना उसके पथ को इस कदर प्रभावित कर देगी कि अपनी वापसी के दौरान 13 अप्रैल 2036 को वह पृथ्वी से टकरा जाये।
प्रारंभ मे वैज्ञानिक मानते थे कि इस क्षुद्रग्रह के सन 2029 मे पृथ्वी से टकराने की संभावना 2.7 प्रतिशत थी, लेकिन आकडों ने किसी टकराव को खारिज कर दिया था। 13 अप्रैल 2029 को यह क्षुद्रग्रह आपके सिर से मात्र 18,300 मील ऊपर से गुजरेगी - और गुरुत्वाकर्षणीय छिद्र उसके पथ को प्रभावित कर सकता है और सन 2036 मे वापसी के दौरान यह क्षुद्रग्रह शायद पृथ्वी से टकरा जाये।
आज नासा ने इस क्षुद्रग्रह के पथ की नयी गणनाओं की घोषणा की है। इन गणनाओं के अनुसार क्षुद्रग्रह के पृथ्वी से टकराने की संभावना मे थोडी कमी आयी है। गणनाओं की विस्तृत घोषणा शीघ्र ही की जायेगी और कल्किआन आपको नवीनतम सूचनाओं से अवगत कराता रहेगा। नये आकडों की गणना 'नियर अर्थ आब्जेक्ट्' के वैज्ञानिक स्टीव चीस्ले तथा पाल चोडस ने नासा की जेट प्रपल्शन लैब मे की है।
नासा पृथ्वी के नजदीक से गुजरने वाले प्रत्येक पिण्ड पर अपनी नजर रखती है और लगातार उन्हे ढूंढती रहती और उनकी निशानदेही करती रहती है, इस कार्य के लिये वह धरती, तथा अन्तरिक्ष मे स्थापित दूरबीनों का सहरा लेती है। नासा के इस कार्यक्रम का नाम है -- "स्पेस गार्ड" या "अन्तरिक्ष-प्रहरी"।
विज्ञान साहित्य के लिहाज से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है और आप ऐसे तरीकों पर विज्ञान कथा, कविता या लेख लिख सकते है कि किस प्रकार इस आपदा से बचा जा सकता है। कल्किआन ऐसी किसी भी विज्ञान/तथ्य सम्मत कथा,लेख तथा काल्पनिक कविता को प्रकाशित करने के लिये तत्पर है। -- प्रमुख सम्पादक