चन्द्रा अन्तरिक्ष दूरबीन ने दो आपसे मे टकराते ब्लैक होल्स (श्याम विवर ) का दुर्लभ चित्र लिया है। यह महाकाय श्याम विवर एन.जी.सी. ६२४० नामक आकाश-गंगा मे हैं। वैज्ञानिकों का मत है कि यह टकराव या संगम कुछ ३०० लाख साल पूर्व प्रारंभ हुआ था और कुछ हजारों लाखों साल बाद भविष्य मे पूरा होगा।
क्या यह संभव नही है कि इस आकाश-गंगा के कुछ ग्रहों पर जीवन हो? कैसा अनुभव होगा वहाँ के वासियों के लिये यह महा-टकराव? ब्लैक होल्स तो समय-स्थान के वक्र (स्पेस-टाईम कर्व) को झकझोर डालेंगे। क्या क्या घट रहा होगा वहाँ? जरा सोचिये। क्या हो अगर यही घटना हमारी आकाश-गंगा मे घटती?
यह घटना निश्चित रूप से वैज्ञानिकों को श्याम विवर के टकराव को समझने मे सहायता करेंगे।

इस तस्वीर मे एन.जी.सी. ६२४० का चन्द्रा दूरबीन द्वारा खींचा गया एक्स-रे चित्र है, जिसमे लाल, नारंगी तथा पीले रंगों द्वारा श्याम विवर को दिखाया गया है। इस एक्स-रे चित्र को वास्त्विकता का पुट देने के लिये इसे सन २००८ मे हबल दूरबीन द्वारा लिये गये प्रकाशीय (आपटीकल) चित्र के साथ मिला दिया गया है।
सन २००२ मे इन टकराते श्याम विवरों का पता लगाया गया था। यह दोनो श्याम विवर एक दूसरे से मात्र ३००० प्रकाश वर्ष की दूरी पर हैं और इस चित्र मे मध्य मे चमकीले बिन्दूओं की तरह दिखाई दे रहे हैं। है न आश्चर्य की बात -- दो श्याम विवरों को साक्षात देखना!
वैज्ञानिक मानते हैं कि इन दोनो के बीच इतनी नजदीकी की वजह शायद यह है कि यह दोनो एक दूसरे के ऊपर सांप की तरह कुंडली मार रहे है -- यह कुंडली मारने की प्रक्रिया शायद ३०० लाख साल पहले शुरू हुई थी। श्याव विवर की खोज व अध्यन हाल के वर्षों मे शोध का बेहद सक्रिय क्षेत्र हो गया है। खासकर एन.जी.सी. ६२४० पर तो वैज्ञानिकों की नजरें हमेशा टिकी रहती हैं।
अफ़सोस की बात है जहाँ इस प्रकार की घटनाये हमे यह सनद कराती हैं कि हमारा इस ब्रहाण्ड मे अस्तित्व कितना सूक्ष्म/क्षुद्र है और कितना कुछ है अर्जित करने को -- वहीं दूसरी तरफ़ विधवंसक शक्तियाँ हमारी दुनिया को अनावश्यक कारणों से नष्ट कर देने पर तुली हुई हैं।
-- स्वप्निल भारतीय (प्रधान सम्पादक)