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वेक फ़ील्ड नष्ट कर सकती है एक पार्टिकल कोलाइडर!

सर्न के पार्टिकल कोलाइडर को लेकर तरह तरह की शंकाये पैदा हुइ थीं, कुछ वैज्ञानिकों‌ ने तो यह तक कह डाला था कि इससे एक छोटे "श्याम विवर" का निर्माण हो सकता है जो शायद सम्पूर्ण प्रथ्वी को ही अपने ग्रास मे ले ले।

सर्न के पार्टिकल कोलाइडर को लेकर तरह तरह की शंकाये पैदा हुइ थीं, कुछ वैज्ञानिकों‌ ने तो यह तक कह डाला था कि इससे एक छोटे "श्याम विवर" का निर्माण हो सकता है जो शायद सम्पूर्ण प्रथ्वी को ही अपने ग्रास मे ले ले।

खैर मामला कोर्ट तक पहुँचा, यहाँ योरोप मे मानव-अधिकार व स्वतंत्र्ता का अत्यंत महत्व है, लेकिन कोर्ट मे मामला रफ़ा-दफ़ा हो गया। संश्यवादियों को फ़िर से मौका मिलने वाला है कि वे अपनी मुहीम तेज कर दे। आने वाले कुछ दिनों‌ मे मीडिया शायद इसी समाचार से प्रदूशित रहेगा। इसका स्रोत है एक नया समाचार।

कल्किआन अन्ग्रेजी मे प्रकाशित एक समाचार के अनुसार, शक्तिशाली पारटिकल एक्सलेटर मे 'वेक फ़ील्ड' निर्मित होती है जो इतनी शक्तिशाली होती है कि समूचे पार्टिकल एक्सिलेटर के ही परखच्चे उडा दें। यह पेपर मैनचेस्टर विश्व विद्ययालय के भौतिक शास्त्री प्रो. राजर जोन्स ने प्रकाशित किया है।

इन एक्सीलेटर मे कण अत्यंत ऊर्जा के साथ गतिमान होते है और वेक फ़ील्ड इन सूक्षम कणों‌ को पूरा का पूरा एक्सीलेटर उडा देने की क्षमता प्रदान करती है। इस पेपर का मूल मकसद भविष्य के पार्टिकल एक्सलेटर मे इन वेक फ़ील्ड को कमजोर करने के साधन ढूढ्ना है।  

उनके अनुसार यहाँ सबसे बडी चुनौती है -- सांप् भी मर जाये और लाठी भी‌ न टूटे -- सीधे शब्दों मे वे एसा रास्ता ढूढ रहे है जिससे वेक फ़ील्ड भी कमजोर हो जाये लेकिन कणों की शक्ति भी कम न हो जिससे कि कणों‌ का टकराव बाधित न हो।

इससे पहले कि पत्रकार और ब्लागर दूर की कौडी फ़ेकने लगें‌ यह स्पष्ट कर दूं कि मौजूदा सर्न के लार्ज हाडरान कोलाईडर (एल. एच. सी.) मे वेक फ़ील्ड को बहुत ही सावधानी के साथ नियंत्रित किया जा रहा है, अत: वहाँ चिन्ता की कोई बात नही है, चिन्ता की बात है एल. एच. सी. की अगली पीढी, जो कि इससे भी‌ अधिक शक्तिशाली होगी।

जोन्स के अनुसार, "एक 'एलेक्ट्रान -पाजीट्रान' कोलाइडर ही एल. एच. सी. का नजदीकी उत्तराधिकारी है। और यह भी सच है कि इस प्रकार के शक्तिशाली लीनियर कोलाईडर मे वेक फ़ील्ड अत्यंत शक्तिशाली व उनकी क्षमता बेहद भयावाह होती हैं। सच तो यह है कि कणों‌ को कुछ दसियों किलोमीटर के दायरे मे अत्यंत अति तीव्र गति से गतिमान करना काम्पेक्ट लीनियर कोलाईडर के निर्माताओं के लिये एक बडी चुनौती है। ऊर्जा कणों की किरण जिसमे आपसे मे गुंथे और अत्य़ंत आवेशित कण मौजूद हों‌ वह आसानी से वेक फ़ील्ड का निर्माण कर सकती है।"

जोन्स ने अपने पेपर मे इसके दो समाधान सुझाये हैं। उनके समाधान इन वेक फ़ील्ड को सोखने के तरीके पर कन्द्रित हैं।

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by Dr. Radut.