Jump to Navigation

महा-प्रलय के बाद प्रथ्वी पर जीवन की वापसी

सन १९८० मे लुइस अल्वारेज़ और उनक सहयोगियों‌ ने दुनियाँ को इस खोज से चौंका दिया था कि ६५० लाख  वर्ष पूर्व एक उल्का-पात मे प्रथ्वी के अधिकतर प्राणी तथा डायनासोर का समूचा विनाश हो गया था। लेकिन उसके बाद से लगातार यह बहस चली आ रही है कि इस महाविनाश के उपरान्त प्रथ्वी पर जीवन पुन: कब पनपना प्रारंभ हुआ।

सन १९८० मे लुइस अल्वारेज़ और उनक सहयोगियों‌ ने दुनियाँ को इस खोज से चौंका दिया था कि ६५० लाख  वर्ष पूर्व एक उल्का-पात मे प्रथ्वी के अधिकतर प्राणी तथा डायनासोर का समूचा विनाश हो गया था। लेकिन उसके बाद से लगातार यह बहस चली आ रही है कि इस महाविनाश के उपरान्त प्रथ्वी पर जीवन पुन: कब पनपना प्रारंभ हुआ।

आज कल्किआन अंग्रेजी मे प्रकाशित समाचार के अनुसार एम. आई. टी. के शोधकर्ताओ ने पता लगाया है कि कुछ प्रारंभिक प्रकार के सूक्ष्म-जीव -- 'एल्गी' तथा 'साइनो-बैक्टेरिया' -- संभवत: उस महाविनाश के मात्र १०० साल बाद ही महासागरों मे वापस आ गये थे। इससे पहले किये गये शोध यह दर्शाते थे कि जीवन की पुनरावॄत्ति शायद लाखों साल बाद ही संभव हो पायी थी।

इस तथ्य को उजागर करने मे इतना समय शायद इस लिये लग गया क्योंकि इससे पूर्व के शोध प्राय: उस काल के जीवाश्मों के अध्यन पर आधारित थे। चूकीं‌ जीवन की वापसी की शुरूआत साइनो-बैक्टेरिया ने की थी, जिसके पास 'खोल' या कठोर हड्डियां इत्यादि नही होती जिस्से की सामान्य जीवाश्म बनते हैं। अत: उनके विषय मे शोधकर्ता जान ही नही पाये। जबकि नयी शोध का आधार रसायनिक जीवाश्म को बनाया गया है, इससे जीवों का समूचा शरीर नष्ट हो जाने के बावजूद भी उनके रसायनिक चिन्ह तो मिल ही‌ जाते हैं।

इस शोध से महा-प्रलय को समझने मे भी सहायता मिली है। शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे है कि महा-प्रलय के दौरान घटनायें‌ किस प्रकार घटित हुई होंगी। उल्का के प्रथ्वी से टकराने के तुरंत बाद सागर के एक बडे हिस्से मे आकसीजन की जबरदस्त कमी हो गयी होगी। यह हिस्से एलेगी के जीवन के लिये अयोग्य हो गये होंगे। लेकिन अगले १०० वर्षों‌ मे एलेगी ने वापसी की। एलेगी भोजन का प्ररंभिक स्रोत होने की वजह से उस काल मे विनाश के उपरांत भोजन की कमी जीवन की वापसी मे विलम्भ का कारण नही बनी।

हालाकि पूरा इको-सिस्टम के पुनर्स्थापन मे एक लम्बा समय लग गया। इससे उस धारणा को भी बल मिला है कि महा-प्रलय के उपरांत 'भूमण्डलिय अंधकार' का दौर उतना लम्बा नही था जितना पहले माना जाता था। वातावरण शायद अपेक्षा से पहले ही साफ़ हो गया था और जीवन चक्र के लिये रास्ते फ़िर से खुल गये थे।.

इस शोध ने उस धारणा को खंडित कर दिया है जिसमे यह संभावना व्यक्त की गयी थी कि प्रथ्वी से भोजन के प्राथमिक स्रोत एक अपेक्षाकृत लम्बे समय तक लुप्त रहे थे - इस पर आधारिक एक फ़िल्म भी बनी थी जिसका नाम था -- "डा. स्ट्रेन्ज-लव".

विनाश के बाद जीवन की वापसी को इस कविता मे प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है: पृथ्वी का शोक गीत!

विषय: 


Main menu 2

by Dr. Radut.