वाद

प्रतिवाद :- "यहाँ‌ शोध मे बहु-पत्नियों का जिक तो खैर नही किया गया है इस लिये उस पर कोई टिप्प्णी नहीं। अब आते है तार्किक्ता पर। खेतिहर पुरूष और शिकारी तथा घूमन्तू पुरूष मे समसे बडा अंतर है स्थायित्व। जहाँ घुमन्तु पुरूष...

प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिय...

चिट्ठाकार अनुबंध

चिट्ठाकार अनुबंध

कल्किआन चिट्ठाकार के रूप में आपको विज्ञान व साहित्य से जुड़े विषयों पर चिट्टे लिखने की पूर्ण स्वतंत्रता है. कृपया निम्न बिंदुओं पर ध्यान दे.
1. कल्किआन समूह गनु लिनुक्स व् उपभोअकता की स्वतंत्रता का समर्थक है, अतः किसी भी प्रकार से किसी किसी भी प्रकार के स्वमित्त्वावादी (proprietary) सॉफ्टवेर या तकनीक का प्रचार न करें.
2. कृपया ऐसी कोई भी बात न लिखें जो की किसी धर्म, जाती, संप्रदाय, राष्ट्र या व्यक्ति के प्रति पूर्वाग्रहों से ग्रसित हो.
3. किसी पर प्रत्यक्ष आरोप न लगायें.
4. अपने चिट्टों में दिए गए तथ्यों की जांच कर ले.
5. यदि आपके चिट्टों से किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होता है तो कल्किआँन समूह उसके लिए उत्तरदायी नहीं होगा. सारे वाद विवाद आपको ही निपटाने होंगे.
6. यदि आपके चिट्टों के खिलाफ कोई कॉपीराइट सम्बन्धी शिकायत आती है तो उसकी सूचना आपको दे दी जाएगी और आपसे चर्चा करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जायेगा. शिकायत के स्वरुप को देखते हुए, यदि आवश्यक हुआ तो कल्किआंन संपादक उस रचना को अस्थाई रूप से अप्रकाशित कर सकते हैं. रचनाकार के स्पष्टीकरण के बाद ही उसे साईट पर पुनः प्रकाशित किया जायेगे. रचनाकार के पास किसी आरोप का जवाब देने के लिए 30 दिन का समय होगा. संपर्क का माध्यम दिया गया ईमेल होगा. यदि रचनाकार 30 दिन में आरोप का जवाब नहीं देता है तो वह रचना साईट से डिलीट कर दी जायेगी. कल्किआन संपादकों को किसी भी समय किसी भी रचना को अप्रकाशित/डिलीट करने का अधिकार रखता है.

उपरोक्त कथन किसी भी समय परिवर्तित या सन्शोधित किया जा सकता है!

-- प्रधान सम्पादक