विज्ञान कथा

  • बर्बरीक उवाच -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

    कितना अन्तर है, इस प्राकृतिक वायु में, जो अभी भी परिस्थितियों के कारण अपने नैसर्गिक रूप में सुरक्षित है। उन एटामिक-शेल्टरों में, परमाणु रोधी सुरक्षा कक्षों में वास कर रहे व्यक्तियों को यह सौभाग्य कैसे मिल सकेगा। हिमालय के उस ऊंचें शिखर पर बैठा मैं, असुर बालक बर्बरीक पृथ्वी पर...

  • वह आदमी -- प्रताप सहगल

    महेश डलहौजी पहली बार आया था. अपनी शादी के तीस साल बाद. इससे पहले वह कई  हिल-स्टेशन घूम चुका था, लेकिन डलहौजी के बारे में उसके मन में एक उजाड़ हिल-स्टेशन की छवि बनी हुए थी. इसलिए डलहौजी आना वह बार-बार टालता रहा.



  • तुझ संग प्रीति लगाई... -- डॉ रचना भारतीय

    इसे कहानी माने या फिर किसी रचनाकार की अभिव्यक्ति। चाहे तो इसे आप हर आम औरत की जिन्दगी से जुड़ा किस्सा मान सकते हैं। भारतीय समाज में विवाह संस्था का जितना अधिक महत्व है उतनी ही ज्यादा इसके भीतर वो खामियां हैं जो इसका अटूट हिस्सा बन चुकी हैं। संयुक्त परिवारों से एकल और एकल से...

  • एक शहर की मौत -- डॉ. अरविन्द दुबे

    आज उस शहर की अन्तिम निशानी भी पानी में समा गई। ये उसके घंटाघर के ऊपर लगे तड़ित चालक की नोंक थी। वैसे तो ये अपने आप में कोई खास चीज नहीं थी पर परिस्थितियों के चलते ये उस मरते शहर की पहचान बन गई थी। हर रोज कुछ तमाशबीन उस डूबते हुये शहर को देखते जुड़ते, आपस में बातें करते, "अर...

  • उंगलियाँ -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

    इस जगह पर आने की कभी भी उसकी इच्छा नहीं थी पर क्या करे। कोई दूसरा विकल्प भी तो उसके पास नहीं था। उस पर बेहोशी के इंजेक्शन का प्रभाव क्रमशः उसी भाँति छाता जा रहा था जिस प्रकार वर्षा ऋतु में बादल धीरे-धीरे सूर्य को अच्छादित कर लेते हैं। उसका अचेतन मस्तिष्क कार्यरत था।



  • डॉ. अलबर्तो वापस न आ सके -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

    उसकी गैस चालित पीजो कार का पैडिल, हाँ वह एक्सीलेटर को पैडिल ही कहता था, कुछ ढीला हो गया था। उसे टाइट कराना आवश्यक हो गया...वह ड्राइव करते हुये अगले गैस-फिलिंग स्टेशन पर रुका, मैकेनिक को समस्या बताई और कार से उतर पड़ा। वह गैसे ड्रिवेन कार को पूर्णतः प्रदूषण मुक्त मानता था....इसी...

  • दान -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

    "तुमने राजा रवि वर्मा का नाम तो सुना होगा?"

    "हाँ क्यों नहीं। वे तो आधुनिक भारतीय चित्रकला के प्रणेता थे" जार्ज पोलस का उत्तर था। कुछ पल बाद उसने मेरी ओर देखा और कुछ सोचकर कहने लगा- "तुम्हारी राजा रविवर्मा की पेन्टिग कुमुद सुन्दरी के विषय म...

  • 2021 -- अभिषेक मिश्र

    वर्ष 2021, सूचना क्रांति के दौर की जो शुरुआत 20 वीं सदी के उत्तरार्ध में आरम्भ हुई थी, वह अब अपने चरम पर थी. सूचना के निर्बाध प्रवाह ने आम जीवन शैली को काफी सरल बना दिया था, वहीँ कई नई किस्म की समस्याएं भी खड़ी होने लगी थीं. पूरे विश्व में फैले विभिन्न आतंकी संगठन भी अब उच्च त...

  • मुर्दे की आवाज़ -- जीशान हैदर जैदी

    एक पूरी तरह सुनसान सड़क थी यह। दूर-दूर तक फैले जंगल अमावस्या की रात को और भयावह बना रहे थे। यह दृश्य किसी भी अकेले व्यक्ति का रक्त जमा देने के लिये पर्याप्त था। लेकिन यह व्यक्ति शायद कुछ ज्यादा ही निडर था। काली जैकेट और इसी रंग की पैंट में वह बहुत आराम से चलता हुआ एक दिशा में ब...

  • रोबोटों‌ का पुनर्जागरण -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

    "थर्टी डिग्री साउथ, फाइव एण्ड वन थाउजेन्ड मीटर टू गो..डाउन...हार्ड आइस-आइडियल फार गुड लैण्डिंग...गुड लक। मंगल के बेस सालमा को इस संदेश के उपरान्त कक्ष में शान्ति छा गयी। कमान्डर रिमेक ने अपने यान के गाइरोस्कोप और स्टीयरिंग को प्रेरित करना प्रारम्भ कर, नीचे के लैण्डिग स्थल...

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