Jump to Navigation

जीन् वान् ट्रायर्

मुझे यह जानकर दुख हुआ कि जीन वॉन ट्रॉयर नहीं रहे. मैं उनसे कभी मिला नहीं , उनसे आमने सामने कोई सम्वाद नहीं, और विग्यान के याहू ग्रूप के सद्स्य के नाते ई मेल पर कभी किसी गम्भीर विषय पर विचारों का आदान प्रदान हो जाता था. यह सम्पर्क मात्र बौद्धिक और कुछ क्षणों के होते थे. तब ऐसे व्यक्ति की मॄत्यु पर अफसोस तो हो सकता है किन्तु दुख क्यों?

उस कवि ह्र्दय तथा मनीषी की बात तर्क संगत, सटीक तथा विद्वत्तापूर्ण लगती थी और उसकी सह्र्दयता मन को छू जाती थी. बस सारी बात उनके मानव मन तथा नैतिक चरित्र की है. मुझे दुख एक बात का और है कि उनकी संतति वाली मानवता, भलमन्साहत तथा ज्ञान प्रेम अब दुर्लभ होने लगा है. वे भोगवादी समाज के व्यक्ति थे किन्तु भोगवाद के ऊपर उठ चुके थे. अब यह जापान की संस्कॄति का प्रभाव था या उनकी सहजता का यह कहना मेरे लिये कठिन है क्योंकि यह मेरे सौभाग्य में नहीं था कि मैं उन्हें इतनी निकट्ता से जानूं.

मैं कैल्किऑन परिवार की और से उन्हें श्रद्धान्जलि अर्पित करता हूं.

-- विश्व मोहन तिवारी



Main menu 2

by Dr. Radut.