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स्वप्निल भारतीय

हिन्दी फान्ट कन्वर्टर

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विषय: 

एक महान व्यक्ति की आवभगत: क्लास नापर आये मेहमान बन कर

क्लाज नापर से तो आप परिचित ही होंगें। गनू/ लिन्क्स के उपयोग कर्ता जो जरूर ही परिचित होंगे। अगर नही हैं तो थोडा बता देता हूँ या यह विकीपीडिया पेज देख लें।

२६ जनवरी विशेषांक: विन्डोज 'अन-इंस्टाल' आन्दोलन

बहुत से लोग सोचते होंगे कि मै 'बधुआ' साफ्टवेयर बेचने वालो के लिये इस प्रकार के "बधुआ" जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोय क्यों करता हूँ! उसका कारण है सूद के साथ उधार चुकता करना। अगर आप से मै कोई किताब मांगू या आप खुशी खुशी मुझे अपनी किताब पढने के लिये दें तो क्या मै चोर, लूटेरा, डकैत, हत्यारा हो गया? नही। ज्ञान के प्रसार का तो आधार ही है बांटना। और ज्ञान का मिल बांट कर उपयोग करना ही मानव विकास की सबसे महत्वपूर्ण शर्त। लेकिन उन बंधुआ साफ्टवेयर बेचने वाले साम्राज्यवादी आपको पाईरेट और इसे पाइरेसी कहेंगे। जरा देखें कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली 'स्वेट वेयर' उद्यम जो दूसरों को लुटेरा कहती है खुद कितने पानी मे है। 

युरोपीय पुरूष पूर्व से आये किसानो के वंशज हैं: प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिये हम 'जानकारी के लिये आभार' सरीखी उपस्थिति दर्शाने वाली टिप्पणियाँ नही छापते। आज से हम 'वाद-प्रतिवाद' नामक स्तंभ प्रारंभ कर रहे हैं‌ जिसके अन्तर्गत कल्किआन पर प्रकाशित रचनाओं पर बहु-पक्षीय चर्चा-परिचर्चा होगी।  आप सभी पाठको से सहभागिता की अपेक्षा है।

विषय: 

सन २०१०, विज्ञान साहित्य पर ग्रहण?

नया दशक प्रारंभ हो गया है। सन् २००९ अपने साथ बहुत कुछ लाया और बहुत कुछ ले कर गया। भारतीय विज्ञान साहित्य के लिये वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण घटना रही कल्किआन रूपी सूर्य का उदय। भारतीय हिंदी विज्ञान साहित्य जिस तरह धीरे धीरे मुख्य विज्ञान पत्रिकाओं की सूची मे नीचे गिरता जा रहा है वह चिंता का विषय है। उनकी समस्या है स्तरीय रचनाओं का अभाव। अब मृत्यूश्य्या पर पडे हिंदी विज्ञान साहित्य को पुनर्जीवित करने के प्रयास करने होंगे। डा राजीव रंजन उपाध्याय के सम्पादन मे "विज्ञान कथा" पत्रिका तथा कल्किआन हिंदी ही अब एकमात्र सहारा हैं।

कुत्ते क्यों‌ होते हैं‌ वफादार और बिल्लियाँ अहसानफरामोश!

कुत्ता इंसान का परम मित्र है -- यह एक अंग्रेजी कहावत है। बिल्लियाँ उसके विपरीत विश्वासपात्र नही मानी जातीं। क्या सत्य है? क्या कहता है विज्ञान इस विषय पर?‌ कुछ पशु ऐसे है जिन्हे हम घरेलू या पालतू कहते हैं और कुछ होते है जंगली। कुत्ते और बिल्ली दो अलग प्रजाति के पशु हैं‌ और उनका व्यवहार, सामाजिकता, उतरजीविता, सब कुछ एक दूसरे से विपरीत है। सबसे पहले बात करते है कुत्तों‌ की।

हिन्दी विज्ञान साहित्य: दशा और दिशा

भारत को एक ज्ञान राष्ट्र या नालेज नेशन कहा जाता है। विश्व के अधिकांश वैज्ञानिक, साफ़्टवेयर इन्जीनीयर, डाक्टर इत्यादि भारतीय मूल के हैं। राज्य सभा मे मानव संसाधन मंत्री द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट् के अनुसार, अमेरिका के १२ प्रतिशत वैज्ञानिक, तथा ३८ प्रतिशत डाक्ट

यह प्रथ्वी का भाग्य

क्षितज छोर पर चमका मधिम सा एक गोला
पर्वत, टीलों, गड्ढों को किरणों से तोला
उसके पीछे क्रोधित अंधी फिर फुफकारी
अट्टहास करती भीषण भवरों के धुधकारी
धरती की सूखी घटी पर घूम रही है
मौत हठीली यम् तांडव में झूम रही है

वह दिनकर उठकर लटक गया सीने में नभ के
आग बरसती धरती की नंगी छाती पे
सूखे बदल सूखी नदियाँ सूखे सागर

पृथ्वी का शोक गीत

जाग उठी सदियों से सुप्त पड़ी कृतियाँ,
उठने लगा बुझी आग से पुनः श्वेत धुआं,

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by Dr. Radut.