डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय

बर्बरीक उवाच

कितना अन्तर है, इस प्राकृतिक वायु में, जो अभी भी परिस्थितियों के कारण अपने नैसर्गिक रूप में सुरक्षित है। उन एटामिक-शेल्टरों में, परमाणु रोधी सुरक्षा कक्षों में वास कर रहे व्यक्तियों को यह सौभाग्य कैसे मिल सकेगा। हिमालय के उस ऊंचें शिखर पर बैठा मैं, असुर बालक बर्बरीक पृथ्वी पर चल रहे मृत्यु के नर्तन को, हत्या, मानव हत्या के ताण्डव को जाग्रत होकर तटस्थ भाव से देख रहा हंू। एक पल रुकिये। वह विनाशकारी विस्फोट, परमाणु बम का विस्फोट जो अभी अमेरिका के न्यूयार्क नगर पर हुआ है उसकी सेसमिक वेब्ज, कम्पन युक्त भू-तरंगों की अनुभूति मैं कर रहा हूँ। मैं आप को उन आतंकवादियों की नृशंस गतिविधियों से, जो मानव के मानवता के विनाश के प्रयास में लिप्त हैं, के विषय में बताता रहूंगा।"

उंगलियाँ

इस जगह पर आने की कभी भी उसकी इच्छा नहीं थी पर क्या करे। कोई दूसरा विकल्प भी तो उसके पास नहीं था। उस पर बेहोशी के इंजेक्शन का प्रभाव क्रमशः उसी भाँति छाता जा रहा था जिस प्रकार वर्षा ऋतु में बादल धीरे-धीरे सूर्य को अच्छादित कर लेते हैं। उसका अचेतन मस्तिष्क कार्यरत था।

डॉ. अलबर्तो वापस न आ सके

उसकी गैस चालित पीजो कार का पैडिल, हाँ वह एक्सीलेटर को पैडिल ही कहता था, कुछ ढीला हो गया था। उसे टाइट कराना आवश्यक हो गया...वह ड्राइव करते हुये अगले गैस-फिलिंग स्टेशन पर रुका, मैकेनिक को समस्या बताई और कार से उतर पड़ा। वह गैसे ड्रिवेन कार को पूर्णतः प्रदूषण मुक्त मानता था....इसी कारण वह लेड-विहीन पेट्रोल के स्थान पर गैस-चालित कार,  पीजो कार, चलाता था। फिर इस में प्रदूषण टेस्ट नहीं कराना पड़ता था और न ही किसी प्रकार के फाइन की ही समस्या रहती थी, वह सोच रहा था।

दान

"तुमने राजा रवि वर्मा का नाम तो सुना होगा?"

"हाँ क्यों नहीं। वे तो आधुनिक भारतीय चित्रकला के प्रणेता थे" जार्ज पोलस का उत्तर था। कुछ पल बाद उसने मेरी ओर देखा और कुछ सोचकर कहने लगा- "तुम्हारी राजा रविवर्मा की पेन्टिग कुमुद सुन्दरी के विषय में क्या राय है?" मैनें उससे कहा कि "वह तो बिलकुल तुम्हारे बगल में बैठी, सुन्दरी मित्र फिलोमिना की तरह है।" मेरी बात सुनकर फिलोमिना जो अभी तक कॉफी के घूँट ले रही थी बरबस बोली "यह बात मात्र अंशतः सत्य है, मैं कुमुद सुन्दरी की भाँति पृथुल नहीं हूँ और न ही मैं बंगलौरी पद्द्ति पर साड़ी ही पहनती हूँ।"

विज्ञानकथा : अतीत वर्तमान एवं भविष्य

वैदिक वाङ्मय, महाभारत, रामायण और पुराणों में उल्ल्खिखित विविध प्रकार के आख्यान, कथाएँ भारतीय जीवन के संवेग और संकल्प के मुख्य बिन्दु हैं। ये आख्यान और रोचक विवरण हमारी सांस्कृतिक शाश्वतता और सततता के ऊर्जा स्रोत हैं। भारतीयता की भागीरथी के अक्षुण्ण प्रवाह के कारक हैं। ये कथाएँ भारतीय मनीषी ऋषियों की उर्वर मेधा की सजनात्मक शक्ति की जीवंत प्रतीक है। इन आख्यानों, कथाओं की मधुमय शक्ति है कथ्यों तथा

रोबोटों‌ का पुनर्जागरण

"थर्टी डिग्री साउथ, फाइव एण्ड वन थाउजेन्ड मीटर टू गो..डाउन...हार्ड आइस-आइडियल फार गुड लैण्डिंग...गुड लक। मंगल के बेस सालमा को इस संदेश के उपरान्त कक्ष में शान्ति छा गयी। कमान्डर रिमेक ने अपने यान के गाइरोस्कोप और स्टीयरिंग को प्रेरित करना प्रारम्भ कर, नीचे के लैण्डिग स्थल की बर्फ कठोरता का अनुमान लगाने वाले यंत्रों को आनकर दिया। बात कुछ ही सेकेण्डों की थी, "बर्फ की सतह दो हजार मीटर मोटी जमी हुयी है," की सूचना ने कमाण्डर रिमेक को लैण्डिंग हेतु अश्वस्त कर दिया और इन्टरकाम के द्वारा उन्होंने यह सूचना तीनों तीनों सहयोगियों को दे दी।

मानव निर्मित नवीन बैक्टीरिया, फफंदी समूह

विज्ञान कथा सृजन का अद्भुत क्षेत्र हम सभी जो वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं का अनुशीलन करने रहते हैं, विवादास्पद वैज्ञानिक क्रेग वेन्टर के नाम से परिचित हैं। क्रेग वेन्टर ने ही अपने संस्थान की प्रयोगशाला में ‘‘ह्यूमन जिनोम’’ परियोजना का प्रारम्भ किया था। उन्हीं की प्रयोगशाला से प्रकाशित शोध पत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है कि उनके सहयोगी निकट भविष्य में मानव निर्मित-टेलरमेड-बैक्टीरिया, फंजाई आदि को उपयोगी कार्यों हेतु, उपलब्ध करा देगें।

अनुभूतियाँ

आनन्द से उसका तात्पर्य था कि जो भी आनन्द हो सके वह सब कुछ। इसमें निहित था अपने बच्चों का सानिध्य और फिर आनन्द की अनुभूति हेतु एक पुरुष जो विवेकवान हो धैर्यवान हो और सर्वोपरि धनवान हो। हाँ! व्यक्ति से, पुरुष से उसका मतलब था एक सुदर्शन पुरुष से। जिसके उम्र की कोई बाध्यता नहीं थी। पर जो  उससे दीर्घकालीन संबंध बनाए रखने में सक्षम हो......और यदि ऐसा न हो सके तो........ ओह! अभी क्यों  (इस विषय पर चिन्ता की जाए) । खैर! इसके बाद सबसे बड़ी जरूरत है तीन चार गर्ल-फ्रेन्डस की। जिनके साथ वह निजी, व्यक्तिगत बातें कर सके और कभी-कभी मूड बदलने के लिए गम्भीर बातें...... जिनमें वैश्विक अर्थ व्यवस्था, विकास की, औद्योगिक विकास की टेकनालॉजी की हृदय हीन प्रगति, उससे जनित याँत्रिक दासता और इन सब से ऊपर ...... पुरुषों की आधिपत्यवादी प्रवृत्ति में परिवर्तन में चर्चा। इस परिवर्तन में निहित है : पुरुषों का महिलाओं के विशिष्ट संदर्भों पर मौन। निश्चय ही इसी भावना का शिकार उसका भावी मित्र..... पुरुष मित्र भी हो सकता है .... अब असंभव तो कुछ रहा नहीं।

विज्ञान कथा एवं विज्ञान-फिल्मों में विज्ञान के संंपुट की आवश्यकता

विज्ञान कथाओं की, फिल्मों की, चर्चा करते समय पाठक के अन्त:करण में, मानस में यह भावना विद्यमान रहती है कि अवश्य ही इसके विवरण में, चित्रण में, निरूपण में, विज्ञान का संपुट कहीं न कहीं निश्चय ही होगा। इस प्रकार का विचार तर्क संगत भी है और महत्वपूर्ण भी।

प्रिया पकड़ी गयी

उस दिन दोपहर को घटित घटना को देखकर मुझे ऐसा लगा कि मैं अपने प्रतिद्वन्दी से पराजित हो जाऊँगा। मेरी गर्ल फ्रेन्ड प्रिया मुझ से दूर चली जायेगी। मेरे प्रतिद्वन्दी ये बुद्धिमान-प्रोद्योगिकी जनित नवीन, घर के कार्यों में उपयोग किये जाने वाली कुछ वस्तुएँ और एक वैकुअम क्लीनर, जिसमें अनेक प्रकार के इन्टर चेंज करने वाली प्रणाली गैजेट लग सकते थे।

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