अमित कुमार

किसने जकडा है अंतरिक्ष को बाहों में; तथा बहुत प्रश्न हैं

किसने जकडा है अंतरिक्ष को बाहों में

रचनाकार: 
रचना: 

एक सुलझा हुआ रहस्य

उसे एक बडे चोरी के सिलसिले में गिरफतार किया गया था । रकम इतनी बडी और चोरी का तरीका इतना बुद्धिमता भरा था कि यह दुनिया  भर की जॉंच एजेन्सियों को मुंंहं चिढा रहा था। साथ ही साथ  उन सभी लोगो को अपने उस निर्णय पर सोचने को विवश कर दिया जो नवीन तकनीकों को चार कदम आगे बढ कर अपनाते हैंं।

रचनाकार: 

वह खतरनाक जानवर

मोहन के घर अफरा-तफरी मची थी। गॉव के कई लोग उसके घर के सामने इकठ्ठा हो गए थे। मोहन के घर वाले भी घर के बाहर ही खडे थे। उनके घर में एक अजीब सा जानवर घुस गया था। खपरैल की तरह के शल्कों वाले इस जानवर को देखकर मोहन की माँ इतना तेज चिल्लाई कि लगा अचानक कोई बादल फट पड़ा हो। उनके चिल्लाने से घर के सभी सदस्य मोहन की माँ की ओर दौड़े। जानवर भी इतनी तेज चीख से डर कर कमरे के बाद बने ओसारे की ओर भागा और ओसारे

रचनाकार: 

भयाक्रान्त

इंस्पेक्टर वागले के घर की फोन की घंटी बज उठी। उनींदी आँखों से उन्होने हैंड सेट उठाया-"हैलो।"
"सब इंस्पेक्टर दिवाकर स्पीकिंग सर।"
"हाँ, बोलें।"
"सर प्रीतम नगर कालोनी के मकान नं। 150 में अभी-अभी एक हत्या हुई है।"
"क्या!" इंसपेक्टर वागले की नींद पूरी तरह गायब हो चुकी थी।

रचनाकार: