ब्लॉग/चिट्ठा

  • स्वप्निल द्वारा चिन्हित यह विषय पुराण, इतिहास और विज्ञान प्रेमियो के लिये रुचिकर तो है ही विज्ञान कथा प्रेमियो के लिये भी रुचिकर है। मै उस चर्चा को आगे बढ़ा रहा हूँ।

  • सैलामेंडर संबंधी समाचार पर डा श्याम गुप्त जी ने एक महत्वपूर्ण विषय उठाया है। उनके कथन से मै इस चिठ्ठा चर्चा को आगे बढा रहा हूँ।

  • मैं आत्म हूं। समस्त भूतों (पदार्थों) - जड, जंगम, जीव में अवस्थित, उनका स्वयं, उनका अन्तर; "सर्व भूतेषु आत्माः"। भौतिक विग्यानी मुझे ’एटम’ या ’परमाणु’ कहते हैं-अन्तिम कण, अर्थात प्रत्येक वस्तु का वह लघुतम अंश जिससे वह बनी है। अध्यात्म, मुझे...

  • परिकल्पनाएं आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति का आधार हैं. आज का विज्ञान जिन सिद्धांतों पर टिका हुआ है वे सिद्धांत प्रारम्भ में परिकल्पनाओं के रूप में जन्मे थे.

  • यहां बैठे बैठे मै यह सोच रहा था कि विज्ञान साहित्य की सबसे बडी त्रासदी यह है कि उसे अभी उसका मुकम्म्ल स्तर नही मिल पाया है। इस स्मस्या का करण ढूढने पाया कि इसका प्रमुख कारण विज्ञान कथाकारो व मुख्यधारा के कथाकारो के बीच संवाद कि कमी है. क्या इस संवाद कि कमी को पाटा जा सकता है?...

  • कल्किआन हिन्दी के अनावरण की सारी तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। मै यहाँ जर्मनी में बैठ कर साईट के निर्माण में लगा हुआ हूँ तो वहां भारत में बैठे मेरे मित्र कथाओ, आलेखों व् अन्य रचनायों को एकत्रित करने में लगे हुए है।...