भरपाई पैंतीस से ज्यादा क्या होगी। लगती जरूर पैंतालीस की है। लेकिन भरपाई जानती है कि वह पैंतीस से दो चार दिन नीचे भले ही हो, ऊपर एक घड़ी भी नहीं है। भीतर ही भीतर यह सोचकर, खुद को किसी जवान से कम नहीं समझती। पंद्रह साल की उम्र में ब्याह हो गया था। यह तो ऊपरा तली के पांच-सात बालक हो गये वरना पैंतालीस नहीं तीस की नजर आती। लेकिन भरपाई से कोई यह वाक्य बोल कर तो देखे। नोच न ले तो मुंह। सारा मुहल्ला सिर पर उठा लेगी। बड़े-बूढ़े भी अपने कान दबोचे बैठे रह जाएंगे। उस समय भरपाई जो कह दे वह कम है। वह यह भी कह सकती है....‘‘कौन सा किसी गैर का लंगोट ढ़ीला हो गया है। अपणे मर्द से जणे हैं... पांच हैं तो। दस हैं तो।’’ परिवार नियोजन वाले तक उसके मुंह लगते कांपते हैं। ऊपर की ऊपर निकल जाते हैं। कौन सुने उसकी खुल्लमखुल्ला बातें।