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दिविक रमेश

वापसी पर

हालांकि श्रीवास्तव ने मुझे बता दिया था कि मणि आज कल दिल्ली में ही है लेकिन मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि उससे अब मिला भी जा सकता है। दस साल पहले की वह मणि कैसी हो गयी होगी यह प्रष्न मन में उठा जरूर था लेकिन बिना कोई समाधान ढूंढे ही। अब मैं अधिक से अधिक इतना भर याद रख सकता हूं कि मणि मेरी पहली पत्नी थी
और अब नहीं है - बल्कि अब किसी और की है, शायद मिस्टर बत्रा या बंसल की।
 

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सुरजा

भरपाई पैंतीस से ज्यादा क्या होगी। लगती जरूर पैंतालीस की है। लेकिन भरपाई जानती है कि वह पैंतीस से दो चार दिन नीचे भले ही हो, ऊपर एक घड़ी भी नहीं है। भीतर ही भीतर यह सोचकर, खुद को किसी जवान से कम नहीं समझती। पंद्रह साल की उम्र में ब्याह हो गया था। यह तो ऊपरा तली के पांच-सात बालक हो गये वरना पैंतालीस नहीं तीस की नजर आती। लेकिन भरपाई से कोई यह वाक्य बोल कर तो देखे। नोच न ले तो मुंह। सारा मुहल्ला सिर पर उठा लेगी। बड़े-बूढ़े भी अपने कान दबोचे बैठे रह जाएंगे। उस समय भरपाई जो कह दे वह कम है। वह यह भी कह सकती है....‘‘कौन सा किसी गैर का लंगोट ढ़ीला हो गया है। अपणे मर्द से जणे हैं... पांच हैं तो। दस हैं तो।’’ परिवार नियोजन वाले तक उसके मुंह लगते कांपते हैं। ऊपर की ऊपर निकल जाते हैं। कौन सुने उसकी खुल्लमखुल्ला बातें।

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by Dr. Radut.