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हेमन्त द्विवेदी

भाग्य

बिना प्रकाश के चमकता चांद-
कुछ लोग निश्चय ही
भाग्यशाली होते हैं!

रचना: 

जीवन

आकशीय पिंडो के
आकर्षण में छिपा
अस्तित्व!

रचना: 

मानव

फुटबाल पर चलती चींटी
जैसे पृथ्वी पर विचरता
दिग्भ्रमित मानव!

रचना: 

खतरा

ओजोन की साड़ी में
बार-बार जिस्म छिपाती
पृथ्वी!

रचना: 

लंकादहन

युद्धक विमान की
विस्मयकारी
मिसाइलों का परिणाम!

रचना: 

टेलिस्कोप

संजय !
धृतराष्ट के
टेलीस्कोप!

रचना: 

दिमागी गति

कुछ भी निरपेक्ष नहीं,
भूखे रिक्शा चालक तथा शोफर की
दिमागी गति अलग अलग है!

रचना: 

दिमाग

दिमाग एक मशीन है
जिसका काम इसे
मूल प्रश्नों से हटाना है!

रचना: 

साइबर संसार

छोटे से साइबर संसार में भी
संगठित रह पाना
कितना मुश्किल !

रचना: 

गुरुत्वाकर्षण

अंतरिक्ष में आदमी हो या कुत्ता
गुरुत्व का उस पर
कोई असर नहीं पड़ता!

रचना: 

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by Dr. Radut.