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अभिषेक मिश्र

लव बियांड टाईम: Love Beyond Time

कोई कथा क्या सिर्फ़ विज्ञान के भारी - भरकम सिद्धान्तों पर आधरित होने पर ही विज्ञान कथा बनती है, या विज्ञान के तकनिकी स्पर्श से अभिभूत मानवीय अह्सास भी विज्ञान कथा का रूप ले सकते हैं, यह विमर्श समिक्षकों पर छोडते हुए बात करते हैं - राज की.  न - न, राज से मेरा तात्पर्य किसी सिक्रेट चीज से नहीं बल्कि तीसरी सहस्त्राब्दी के उन इन्सानों में एक से है, जिनके पास भूख - प्यास जैसी शारीरिक आवश्यकताओं

रचनाकार: 

2021

वर्ष 2021, सूचना क्रांति के दौर की जो शुरुआत 20 वीं सदी के उत्तरार्ध में आरम्भ हुई थी, वह अब अपने चरम पर थी. सूचना के निर्बाध प्रवाह ने आम जीवन शैली को काफी सरल बना दिया था, वहीँ कई नई किस्म की समस्याएं भी खड़ी होने लगी थीं. पूरे विश्व में फैले विभिन्न आतंकी संगठन भी अब उच्च तकनीक से लैस हो चुके थे, और वैश्विक अस्थिरता कायम करने के लिए विभिन्न देशों के इन आतंकी गुटों का एक कम्युनिकेशन नेटवर्क ही स्थापित हो चुका था. इस चुनौती से निपटने के लिए अन्तराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों की एकजुट पहल स्वाभाविक ही थी.

रचनाकार: 

भविष्य के लिए विज्ञान लेखन की दिशा

'विज्ञान' शब्द पर प्रारंभ से ही एक विशिष्ट वर्ग का एकाधिकार ही देखा गया है. यही कारण है कि आम जनमानस  सामान्यतः इसे एक आकाशकुसुम की तरह ही, सम्मान से मगर एक दूरी से ही देखता है. इस प्रवृत्ति ने एक विषय के रूप में विज्ञान को गरिमा तो दी है, मगर आम जनों से दूरी इसके दीर्घकालीन भविष्य के दृष्टिकोण से उचित नहीं कही जा सकती.

विज्ञान और विज्ञान लेखन की दशा में दिनों-दिन उन्नयन ने आज इसे एक महत्त्वपूर्ण मुकाम पर ला पहुँचाया है, किन्तु इसकी जनस्वीकृति सुनिश्चित करने हेतु विज्ञान लेखकों को ही आगे आ इसकी दिशा सुनिश्चित करने की जरुरत है.

इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण तत्त्व है इसकी भाषा. भाषा में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि क्लिष्ट विषयों की व्याख्या में प्रयुक्त भाषा और आम बोलचाल की  भाषा में काफी फर्क होता है. संस्कृत, अंग्रेजी जैसी विशिष्ट भाषाओँ में ही विज्ञान साहित्य की उपलब्धता इसकी लोकस्वीकृति में बाधक है. जनता को उसीकी भाषा में विज्ञान को पहुँचने के लिए कुलीन संकोच को तोड़ना होगा; तभी विज्ञान में स्वतंत्र चिंतन और लोक भागीदारी का संयोजन सुनिश्चित हो सकेगा.

रचनाकार: 

सत्यजित रे की विज्ञान कथाएँ

साहित्य और सिनेमा की अविश्मर्निय विभूति सत्यजित रे का विज्ञान साहित्य में भी अप्रतिम योगदान रहा है। विज्ञान कथाएँ उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण अंग रहीं। इन्होने न सिर्फ भारतीय साहित्य को समृद्ध किया बल्कि एक पूरी पीढी और समाज के एक बड़े वर्ग को विज्ञान की जटिलताओं से मुक्त कर विज्ञान को सहज और सुलभ बना दिया।

रचनाकार: 
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by Dr. Radut.