विश्व मोहन तिवारी

क्रान्ति की दस्तक

ब्रह्माण्डिकी के द्वार पर आज क्रान्ति दस्तक दे रही है। यह क्रान्ति किन्तु ‘अदृश्य पदार्थ तथा ऊर्जा’ के रूप में है।उपरोक्त चुनौतियों के समाधान प्राप्त करने के लिये आज उपग्रह स्थित वेधशालाएं तथा उच्चशक्ति वाले कम्प्यूटरों का उपयोग किया जा रहा है। अमेरिका में एक ‘ग्रैण्ड चैलैन्ज कॉज़्मोलॉजी कन्सोर्टियम’ की स्थापना हुई है जिसमें ब्रह्माण्ड विज्ञानी तथा कम्प्यूटर–विज्ञानी कार्य कर रहे हैं।

एक क्वेसार, एक अरब सूर्य

एस्ट्रॉनॉमिकल जर्नल के मार्च 2004 अंक में एक प्रपत्र प्रकाशित हुआ है जिसे प्रिंसटन विश्वविद्यालय ने प्रस्तुत किया है। इन्होंने दूरतम स्थित चार क्वेसारों का अध्ययन करने के लिये उपग्रह स्थित उच्च विभेदक हबल दूरदर्शी का उपयोग किया है। ये क्वेसार हमसे इतनी दूर स्थित हैं कि उनकी आयु ब्रह्माण्ड की आयु के 10 प्रतिशत से भी कम है।

अदृश्य ऊर्जा

ब्रह्माण्ड का प्रसार पदार्थों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के बावजूद त्वरण के साथ हो रहा है, अथार्त कोई शक्ति है जो गुरुत्वाकर्षण की विरूद्ध दिशा में कार्य कर रही है। ज्ञात शक्तियों में एसी कोई ऊर्जावान शक्ति नहीं है। यद्यपि फोटान जैसी ऊर्जा अपने संचरण की दिशा में दबाव डालती हैं, किन्तु गुरुत्वाकर्षण विरोधी ऐसे कोई फोटान अथवा अन्य ऊर्जा ‘दृष्टिगत’ नहीं हो पाई है। अतएव इस प्रसारकारी ऊर्जा का नाम ‘अदृश्य ऊर्जा‘ रखा गया है।

अदृश्य पदार्थ, अस्तित्व का सैद्धान्तिक आधार

अदृश्य पदार्थ के अस्तित्व का सैद्धान्तिक आधार भी है। स्फीति युग के सिद्धान्त के अनुसार स्फीति युग में तो पदार्थ का घनत्व क्रान्तिक घनत्व के बराबर था। अत: इस समय भी बराबर होना चाहिये। किन्तु आकलन करने के बाद यह स्पष्ट होता है कि ब्रह्माण्ड में पदार्थ का घनत्व क्रान्तिक–घनत्व से बहुत कम है। स्फीति सिद्धान्त के अनुसार प्रारम्भिक क्षणों में जब अकल्पनीय तीव्र स्फीति हुई, उस समय के सूक्ष्म ब्रह्माण्ड में सूक्ष्म अन्तरों के अतिरिक्त पूर्ण समांग था। यही सूक्ष्म अन्तर बाद में गुरुत्वाकर्षण की शक्ति के कारण विशाल शून्य के भीतर मन्दाकिनियां आदि पिण्ड बने।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 11: गुरुत्वाकर्षण का लैंस

जिस तरह कांच के लैंस किरणों को केन्दि`त या विकेन्दि`त कर सकते हैं, उसी तरह अत्यधिक द्रव्यमान वाले पिण्ड अथवा पिण्डों का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र प्रकाश के लैंस की तरह कार्य कर सकता है, आइन्स्टाइन ने अपने व्यापक सापेक्षवाद में ऐसी भविष्यवाणी की थी। जिसके फलस्वरूप कोई मन्दाकिनी अधिक प्रकाशवान दिख सकती है, तथा एक पिण्ड के अनेक बिम्ब दिख सकते हैं।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 10: अदृश्य पदार्थ और अदृश्य ऊर्जा

अदृश्य पदार्थ क्या केवल कल्पना है या इसके कुछ ठोस प्रमाण भी हैं? जब कोई पिण्ड गोलाकार घूमता है तब उस पर अपकेन्द्री बल कार्य करने लगता है। इसी बल के कारण तेज मोटरकारें तीखे मोड़ों पर पलट जाती हैं, मोटरसाइकिल वाला सरकस के मौत के गोले में बिना गिरे ऊपर–नीचे मोटरसाइकिल चलाता है।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 9: त्वरक ब्रह्माण्ड (एक्सिलरेटिंग यूनिवर्स)

‘प्रसारी ब्रह्माण्ड’ की एक घटना सर्वाधिक विस्मयकारी है और उसने दुविधाएं भी बहुत उत्पन्न की हैं, वह है ब्रह्माण्ड के प्रसार के वेग का दूरी के साथ बढ़ना।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 8: मन्दाकिनियों का विकास

सृष्टि की रचना में कणों के निर्माण पश्चात पहले तो हाइड्रोजन तथा हीलियम के विशाल बादल बनें। शनै: शनै: जब ये विशाल बादल इतने बड़े हो गये कि वे अपने ही गुरुत्वाकर्षण से दबकर संकुचित हो गये तब तारे तथा मन्दाकिनियां बनी। पहली मन्दाकिनियों तथा तारों को बनने में लगभग 100 करोड़ वर्ष लगे उस समय ब्रह्माण्ड का विस्तार आज के विस्तार का पंचमांश ही था।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 7: प्रकाश का अन्धमहासागर

लगभग तीन लाख वर्षों तक ब्रह्माण्ड में प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा अन्य नाभिक, फोटॉन, इलैक्ट्रॉन तथा न्युट्रनो के अपारदर्शी महासागर में एक दूसरे से टकराते रहे किन्तु दिख नहीं रहे थे! यह सब इतना घना था कि फोटान अन्य कणों से लगातार टकराते रहे और इसलिये वे बाहर नहीं निकल सकते थे और इसलिये ब्रह्माण्ड दिख नहीं सकता था। इसलिये इसे ‘प्रकाश का अन्धमहासागर’ भी कह सकते हैं।

ब्रह्माण्ड के खुलते रहस्य 6: नाभिकीय संश्लेषण युग

प्रसार का अगला चरण 1 सैकैण्ड से 100 सैकैण्ड तक चला, इसे ‘नाभिकीय–संश्लेषण युग’ (न्यूक्लीय सिन्थैसिस एरा) कहते हैं। प्रोटॉन तो इस नाभिकीय संश्लेषण युग के पूर्व ही बन चुके थे जो हाइड्रोजन के नाभिक बने। इन निन्न्यानवे सैकैण्डों के नाभिकीय संश्लेषण युग में आज तक मौजूद लगभग सारा हाइड्रोजन, हीलियम, भारी हाइड्रोजन आदि तथा अल्प मात्रा में लिथियम के नाभिक बने।

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