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विश्व मोहन तिवारी

राम ने न तो सीता जी को वनवास दिया और न शम्बूक का वध किया

चोरों की प्रशंसा कोई नहीं करता, किन्तु उनके चौर्य कौशल की प्रशंसा तो करना ही पड़ती है। क्योंकि हम सब ही‌ क्या, बैंक आदि भी पूरी सावधानी से पूरे प्रयत्न करते हैं कि चोरी‌ न हो, किन्तु चोरी‌ हो जाती है। चोरियां अनेक प्रकार की होती हैं। मैं इस समय लेखन की चोरी‌ की बात कर रहा हूं।

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देखिये बोलिविया की हिम्मत

दक्षिण अमैरिका में‌ एक ही देश है जहां मैक्डानल्ड, अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी, उपस्थित नहीं‌ है। २४ दिसंबर २०११ को बोलिविया ने उऩ्हें बिदा कर ही दिया।

मैक्डानल्ड या कोका कोला आदि बहुत सशक्त संस्थाएं हैं, इनके जाल दूर दूर तक फ़ैले रहते हैं।

बोलिविया की जनता ने 'फ़ास्ट फ़ूड' की संस्कृति का विरोध किया है। उऩ्होंने घोषणा की, “ भोजन को प्रेमे से, समर्पण के भाव से, एक विशेष शुद्धता से और उसे पकने के लिये पूरा आवश्यक समय देते हुए पकाना चाहिये।"

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श्रीमद्भगवद्गीता में समता की अवधारणा

समता शब्द तो आज की राजनीति में और सामाजिक सोचविचारों में बहुत ही चर्चित है। समता की अवधारणा हमारे यहां उतनी ही पुरानी है जितना कि ब्रह्म ज्ञान। यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम धर्मों में समता केवल क्रमश: यहूदियों, ईसाइयों तथा मुस्लिमों के लिये है अन्य तो पापी हैं और उनका मोक्ष तब तक नहीं हो सकता कि जब तक वे अपना धर्म बदलकर इन धर्मों में‌ न आ जाएं। अर्थात एक ईसाई के लिये मुस्लिम के साथ या एक मुस्लिम के लिये ईसाई के साथ समता नहीं हो सकती। यहां तक कि इन धर्मों में स्त्रियों की समता भी पुरुषों के साथ नहीं हो सकती। तभी तो स्त्री स्वातंत्र्य का आन्दोलन पश्चिम में १७९० के लगभग प्रारंभ हुआ था, और इस्लाम

आम आदमी और आइंस्टाइन

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1991 में जब मेरी पुस्तक ‘खाड़ीयुद्ध 91’ आई तब उसे देखकर विख्यात नाटकविद पद्मश्री नेमिचंद्र जैन ने मुझसे कहा था कि इसी तरह आइन्स्टाइन के ‘सापेक्षता सिद्धान्त’ को हिन्दी में आम पाठक को समझाने वाली पुस्तक की आवश्यकता है। वह कार्य मुझे करना चाहिये। फिर मैं पक्षियों वाली पुस्तक ‘आनन्द पंछी निहारन का’ इत्यादि में लग गया था। अभी तो एक लेख ही दे पा रहा हूं।आशा करता हूं कि पद्मश्री नेमिचंद्र जी का आग्रह शीघ्र पूरा करूंगा।
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गरीबी के मंच पर अमीरी का डिस्को

भारत में यह सामाजिक विषय नहीं है, राजनीतिक विषय है - देखा जाए भारत में तो राजनैतिक भी कम, शक्ति हथियाने का औजार अधिक है। जब कि इसे वास्तव में सामाजिक होना चाहिये और राजनीति को उसमें‌ उपयुक्त नीतियां बनाकर मदद करना चाहिये । अपनी‌ नीतियों से यह शासन समृद्धि तो बढ़ा रहा है, भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की और अमीरों की।

भ्रष्ट शासन से हमें किसी‌ भी प्रकार की उन्नति की आशा करना आकाश कुसुम तोड़ना है।

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प्रवासी होना सभीके लिये लाभदायक है

प्रवासी तंत्रिक (जंपिंग न्यूरल) डीएनए मस्तिष्क को अधिक सुनम्य बनाता है, कैसे ?

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हवा से चलेगी मोटर साइकिल : संपीडित हवा से

जीवाश्म ईंधन न केवल अधिक प्रदूषण करता है, वैश्विक तापन बढ़ाता है, और संकट पैदा करता है वरन वह समाप्त भी हो रहा है। अतएव विश्व में जीवाश्म ईंधन के विकल्पों की, यथा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, समुद्र ऊर्जा, भूमिगत ऊर्जा आदि को व्यावहारिक एवं किफ़ायती‌ बनाने पर अनुसंधान हो रहे हैं। हवा से चलने वाली मोटर साइकिल इस दिशा में अपने आप वैकल्पिक ऊर्जा का कार्य तो नहीं करेगी किन्तु अंतर दाह एंजिनों के जीवाश्म ईंधन के भारी‌ मात्रा में हो रहे खर्च को बचाएगी। क्योंकि अंतर दाह एंजिन तो जीवाश्म ईंधनों से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वैकल्पिक ऊर्जा की असली‌ बचत तो तब होगी‌ कि जब इन सिलिंडरों में संपीडित हवा भरने का

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तितली केवल देखने में ही सुन्दर नहीं होती‌!

तितली जैसी सुन्दरता, कोमलता और चन्चलता शायद ही किसी अन्य जीव में हो । यह तो आश्चर्य की ही बात है कि वे (मानर्क तितली) तब भी इतनी लम्बी प्रवास यात्राएं (हजारों किलोमीटर) करती हैं कि उसे पूरा करने में २ या ३ संततियां लग जाती हैं। और यह भी आश्चर्य की‌ बात है कि वे किस तरह बारिश की‌ बड़ी बड़ी बूंदों के आघात सह लेती हैं !

वैज्ञानिकों ने अनुसंधान किया और पता लगाया है कि उनके ( माउन्टैन स्वैलो हिल) सुंदर पंखों की सतह पर ऐसे सूक्ष्म बनावट होती‌ है जिसमें हवा फ़ँस जाती है जो एक तरह की गद्दी बन जाती‌ है जो पानी की बूँद के आघात से तितली को बचाती है !

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अब मच्छड़ खतम किये जा सकेंगे

पुडुचेरी स्थित 'रोगवाहक नियंत्रण अनुसंधान केन्द्र (Vector Control Research Centre) के वैज्ञानिकों ने प्रकृति से सीखकर मच्छड़ों को मारने वाली बैक्टीरिया को खोज निकाला है ! उऩ्हें आशा है कि अन्य मच्छड़नाशक प्रयत्नों की तरह यह असफ़ल ऩहीं होगा।

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बादाम कैन्सर को भी ठीक करती है !

बादाम में ओमेगा ३ फ़ैटी एसिड तथा पाली फ़ैनाल्स होते हैं जो एन्टिओक्सिडैन्ट्स का काम तो करते ही हैं। एन्टिओक्सिडैन्ट्स यह तो अब सभी कि ज्ञात है कि ये ओक्सिडैन्त्स् या फ़्री रैडिकल्स को समाप्त करते हैं और इस तरह हमारी कोशिकाओं की रक्षा करते हैं, और अन्तत: हमें अनेक रोगों से बचाते हैं।

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by Dr. Radut.