मैं आम आदमी हूँ ...
मै खरीद के आम ला नहीं सकता, शक्कर इतनी महंगी कि ख़ुशी में भी मीठा मँगा नहीं सकता।
मै भूखा रह नहीं सकता, और इस महंगाई में पेट भर खा नहीं सकता
अब तो बिना चेकिंग कराये में भगवान के दर भी जा नहीं सकता,
आरक्षण का डंक ऐसा कि, कितना भी पढ़ लूँ मैं अव्वल आ नहीं सकता।
घुटनों में रहता है दर्द हमेशा, पर मैं महंगे पेट्रोल का खर्चा भी उठा नहीं सकता
सपने रोज बुनता हूँ आशियाना बनाने के, लेकिन बढती ब्याज दरें, अब EMI चुका नहीं सकता।