प्रवासी तंत्रिक (जंपिंग न्यूरल) डीएनए मस्तिष्क को अधिक सुनम्य बनाता है, कैसे ?
जीन हमारे शरीर के गुणो की इकाई हैं। जीन मिलकर डीएनए बनाते हैं, और डीएनए मिलकर क्रोमोसोम बनाते हैं; क्रोमोसोम के अन्दर जिस हिस्से में अनुवंशिकी की पूरी जानकारी होती है उसे जिनोम ( जीन के दोनों अक्षर तथा क्रोमोसोम के ओम के दो अक्षर मिलकर जिनोम शब्द बना है।) कहते हैं। यह सामान्यतया माना जा रहा है कि हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका में जिनोम होता हाइ तथा वे जिनोम एक से ही होते हैं। साल्क इंस्टिटूट फ़ार बायोलाजिकल स्टडीज़ में की गई खोज दिखला रही है कि मस्तिष्क के डीएनए पर यह आदेश लागू नहीं होता। अवश्य ही प्रकृति ने यह नियम शरीर के अतिजैविक लाभ के लिये किया है।
यौन प्रजनन का लाभ ही यह है कि उसमें आनुवंशिक गुणों की विविधता बढ़ जाती है जिससे विभिन्न प्राकृतिक अवरोधों को पार करने में सहायता मिलती है। मस्तिष्क चूंकि सर्वाधिक मह्त्वपूर्ण अंग है अत: उसमें अवरोधों से लड़ने के लिये सर्वाधिक सुनम्यता चाहिये क्योंकि उसके शत्रु पुरानी लड़ाई से सीखकर वे गुण बनाकर लाते हैं जो मस्तिष्क के उसी सैनिक अर्थात उसके जीन को हरा सकें। अत: सैनिक में इतनी सुनम्यता होना चाहिये कि वह अपने पुराने किन्तु समुन्नत शत्रु को चकित कर हरा सके। यह तभी हो सकेगा कि जब वह अपने को बदल सके ।
तब बहुरूपिया वाली यह सुनम्यता मस्तिष्क में कैसे लाई जाए? मस्तिष्क में एक नए तरह के डीएनए का उद्भव हुआ, इसे प्रवासी डीएनए कहते हैं। इस डीएनए का एक जीन एक से दूसरी कोशिका में उछल कर प्रवास करता है, यह एक तरह का उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) है; और इस तरह वह जीन बदल जाता है। इससे प्रत्येक न्यूरान में डीएनए की मात्रा बढ़ जाती है, उनका वैविध्य बढ़ जाता है और उनकी सुनम्यता भी।