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मानव निर्मित नवीन बैक्टीरिया, फफंदी समूह

विज्ञान कथा सृजन का अद्भुत क्षेत्र हम सभी जो वैज्ञानिक शोध पत्रिकाओं का अनुशीलन करने रहते हैं, विवादास्पद वैज्ञानिक क्रेग वेन्टर के नाम से परिचित हैं। क्रेग वेन्टर ने ही अपने संस्थान की प्रयोगशाला में ‘‘ह्यूमन जिनोम’’ परियोजना का प्रारम्भ किया था। उन्हीं की प्रयोगशाला से प्रकाशित शोध पत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट हो जाता है कि उनके सहयोगी निकट भविष्य में मानव निर्मित-टेलरमेड-बैक्टीरिया, फंजाई आदि को उपयोगी कार्यों हेतु, उपलब्ध करा देगें।

इस दिशा में प्रयास तो काफी जोर-शोर के साथ पल रहे थे परन्तु इसको सफलता दिलाने में बाधा थी, इन सूक्ष्म जीवी प्रजातियों में एक विशेष रसायनिक प्रक्रिया 'मिथीलेशन' और तदजनित 'रिस्टिंक्शन-इंजाइमों के हस्तक्षेप की। जिसके फल स्वरूप प्रयास विफल होते रहे।

दृढ़ निश्चयी क्रेग वेन्टर सहयोगियों ने इस बाधा को दूर करने में, अन्ततोगत्वा सफलता प्राप्त कर ही ली और उनकी योजना है इन वैक्टीरिया फंफूदी आदि को नवनिर्मित कर कोयले से प्राकृतिक गैस, और कार्बन-डाई-आक्साइड को अवशोषित कर पेट्रोलियम  आदि पदार्थों का निर्माण। सराहनीय प्रयास होगा यह निकट भविष्य में।

इसी प्रकार शताब्दियों से ब्राह्ममुर्हूत में उठ जाना और क्रियाशील हो जाना, हमारी भारतीय संस्कृति का अंश रहा है। आज की अपसंस्कृति के प्रभाव से अधिकांश लोगों, का ब्राह्ममुर्हूत बेड-टी-चाय के प्याले के साथ आठ बजे के आस-पास होना है। भौतिक शास्त्रियों ने सप्रमाण सिद्ध किया है। कि ब्राह्म मुहूर्त में शरीर से ऊर्जावान फोटान निकलते हैं जो हमारी शारीरिक क्रिया की सक्रियता के संवाहक हैं एवं मानव-आनन की दीप्ति के कारण हैं। इस प्रकार विज्ञान और प्रौद्योगिकी की नवीन शोध, मात्र वैज्ञानिकों को ही नहीं वरन् विज्ञान संदेश संचार करने को समर्पित विज्ञान कथाकारों, विज्ञानकथा लेखकों को भी प्रचुरता से समाग्री प्रदान कर रही है। यह समय की पुकार है इस प्रकार के वैज्ञानिक तथ्यों को कथा माध्यम से जनसामान्य तक प्रेषित करने की।

[विज्ञान कथा पत्रिका मे पूर्व प्रकाशित संपादकीय]



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by Dr. Radut.