कार्बन: वैसे तो हर तत्व अपने अंदर कुछ खास नज़ारों की झलक समेटे हुए रहता है, लेकिन हम बात करते हैं उनमें भी खास तत्व कार्बन के बारे में।
कार्बन, जमीन पर पाया जाने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है। महत्वपूर्ण इस तरह कि जमीन पर ज़िंदगी पैदा करने के लिए कुदरत ने इसी तत्व को चुना। जिसके नतीजे में यह जमीन पर मौजूद हर जिन्दा चीज़ का महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा है।
आखिर कुदरत ने इसी तत्व को क्यों चुना? शायद इसकी वजह ये है कि जो चीज़ जितनी ज्यादा विनयशील होती है, जितना नर्म अंदाज़ अख्तियार करती है कुदरत उसे उतनी ही ऊंची जगंह पर पहुंचा देती है। आईए कार्बन पर गौर करें। आमतौर पर मिलने वाला यह काले रंग का हक़ीर सा माद्दा है जो आसानी से घिस जाता है। कुदरत ने इसी कार्बन को इतनी ऊंचाई बख्श दी कि यह हीरे की शक्ल में दुनिया का सबसे कीमती जवाहर बन कर भी मिलने लगा।
कार्बन आसानी से दूसरे एलीमेन्ट्स के साथ घुलमिल जाता है। यहां तक कि खुद उसी के एटम आपस में जुड़कर एक लम्बी चेन बना लेते हैं और अगर इस चेन में हाईड्रोजन, नाईट्रोजन, ऑक्सीज़न और सल्फर के भी एटम शामिल हो जायें तो मिलते हैं अमीनो एसिड व प्रोटीन, जो जिंदगी पैदा करने में कच्चे माल की तरह काम करते हैं। इस तरंह बेजान कार्बन जिंदगी की तख्लीक कर रहा है। और वैज्ञानिक इस पहेली से जूझ रहे हैं कि आखिर एक बेजान चीज में जान कैसे पड़ जाती है।
कार्बन अनोखे गुणों का मालिक है। एक तरफ तो यह हीरे की शक्ल में दुनिया का सबसे कठोर तत्व है तो दूसरी तरफ गीली मिट्टी में मिलकर यह सबसे नर्म तत्व की शक्ल अख्तियार कर लेता है। यही नहीं इसकी अनेकों और भी शक्लो सूरतें हैं। धुएं की शक्ल में यह गैस है, ग्रेफाइट की हालत में आधी धातु है तो पेट्रोल बनकर यह द्रव की शक्ल में दिखाई देता है।
कभी इसमें से बिजली रवाँ हो जाती है। जैसे कि ग्रेफाइट में। तो कभी यह बिजली को रोक लेता है। जैसे कि जब यह हीरे की शक्ल में होता है। एक ही तत्व में बिल्कुल विरोधी गुणों का होना इण्टेलिजेंट डिज़ाइन की तरफ पूरी तरंह इशारा कर रहा है।
जमीन पर दो तरह का पदार्थ पाया जाता है। एक वह जिसमें कार्बन शामिल है, और दूसरा वह जिसमें कार्बन न शामिल होकर दूसरे तत्व शामिल हैं। इनमें से पहले तरह का मैटर दूसरे से मात्रा में बहुत ज्यादा है। इंसान व जानवरों के जिस्म में कार्बन शामिल होता ही है साथ ही उनके खाने पीने की सारी चीज़ों में भी कार्बन लाज़िमी तौर से शामिल रहता है। इसके अलावा इंसान की रोजमर्रा की चीज़ों यानि साबुन, तेल, परफ्यूम, रबर, प्लास्टिक, पेस्टीसाइड, ड्राईक्लीनर, पेट्रोल, एल-पी-जी- जैसी हजारों चीज़ों में कार्बन शामिल होता है। सिर्फ एक तत्व का इस्तेमाल करते हुए सृजन के इतने रूप दिखते हैं इंसान हैरत से कुछ सोचने पर मजबूर हो जाता है।
अगर यह प्रोटीन की शक्ल में जिस्म को बनाता है तो पोटैशियम साईनाइड की शक्ल में दुनिया का सबसे खतरनाक ज़हर भी है। कार्बन से जुड़े पदार्थों को गिनते जाईए, इसकी किस्मों की कोई हद नहीं मिलेगी।
सवाल पैदा होता है कुदरत के कौन से उसूल कार्बन की इतनी ज्यादा शक्लें पैदा कर रहे हैं? इसका जवाब पाने के लिए देखना होगा इसकी परमाणु संरचना को और इसके परमाणु के गुणों को।
कार्बन के परमाणु में छह इलेक्ट्रान और केन्द्र में छह प्रोटॉन होते है। इस तरह इसकी परमाणु संख्या हुई छह। इसके छह इलेक्ट्रानों में से चार इसके बाहरी आसमान यानि कि कक्षा में चक्कर लगाते रहते हैं। इन इलेक्ट्रानों की वजह से कार्बन परमाणु में खुद अपने जैसे परमाणु या किसी और तत्व के साथ मिलकर जोड़े बनाने की ताकत पैदा हो जाती है। कुछ इस तरह जैसे कि दो ऐसे लोग जिनके पास जमा पूंजी हो और वे आपस में पार्टनर’ाप करके कोई बिजनेस शुरू कर दें। कार्बन की इस क्वालिटी की वजह से उसके और दूसरे तत्वों के परमाणु आपस में जुड़कर एक लम्बी चेन बना लेते हैं। नतीजे में मिलता है एक नया पदार्थ।
कार्बन का ये गुण बेशक करिश्मा है कुदरत का। दरअसल जो परमाणु संरचना कार्बन की है, इससे मिलती जुलती संरचना के कुछ और भी तत्व हैं, जैसे कि सिलिकान, जर्मेनियम और टिन। इन सभी के बाहरी आसमान में चार इलेक्ट्रान होते हैं। इसके बावजूद इनमें से कोई भी तत्व अपने परमाणुओं को जोड़कर चेन नहीं बनाता। यह गुण सिर्फ कार्बन परमाणु में है।
कुदरत ने कार्बन परमाणु को बिल्डिंग बनाने वाली एक ऐसी ईंट की तरह सृजित किया है जो वज़न और आकार के एतबार से पूरी तरह संतुलित है। एक बिल्डिंग को बनाने वाली ईंट अगर बहुत ज्यादा हल्की है या भारी है तो बिल्डिंग टिकाऊ नहीं बन सकती। इसी तरह अगर जिंदगी को बनाने वाले अणुओं में कार्बन चेन की बजाय किसी और तत्व का इस्तेमाल होता तो या तो चेन अपने ही वज़न से टूट जाती या इतनी हल्की हो जाती कि जिस्म कभी वजूद में न आता। चार इलेक्ट्रान होने के बावजूद सिलिकॉन या जर्मेनियम अपने भारीपन की वजह से लम्बी चेन बनाने की योग्यता नहीं रखते।
तो इस तरह कार्बन परमाणु के वज़न को ब्रह्माण्ड की ‘इण्टेलिजेंट डिजाइन’ में इस तरह फाइन ट्यूनिंग पर नियत किया गया है कि वह न सिर्फ जमीन के सभी जानदारों के हिस्सा है बल्कि उनके पेट भरने का भी जरिया है और साथ ही उनकी दूसरी जरूरियात भी पूरी कर रहा है। खास तौर से इंसान की हर तरह की जरूरियात को पूरा करने में कार्बन कहीं न कहीं जरूर शामिल होता है।
कार्बन का दूसरा गुण ये होता है कि उसके परमाणु कई तरीकों से आपस में जुड़ सकते हैं। नतीजे में कभी वह हीरे जैसा क्रिस्टल बना लेता है कभी नर्म भुरभुरा पदार्थ हो जाता है, कभी द्रव तो कभी गैस की शक्ल में आ जाता है। इस तरह ये जमीन पर हर जगह मिल सकता है। और जमीन पर मिलने वाले किसी भी प्राणी के भोजन का प्रबंध् कर सकता है। अगर प्राणी जमीन पर है तो कार्बन मिट्टी से मिलकर उसका भोजन बन सकता है। अगर प्राणी पानी में है तो कार्बन पानी के साथ मिलकर उसका भोजन बन जाता है और अगर प्राणी हवा में मौजूद है तो कार्बन हवा के साथ मिलकर भोजन बनने की क्षमता रखता है। यानि प्राणी के लिए जल थल व वायु तीनों जगंह भोजन का इंतिजाम है।
असीमित प्रकार के पदार्थ बनाने के बावजूद कार्बन और दूसरे परमाणु आपस में जुड़ते हुए कुदरत के उसूलों को कभी नहीं तोड़ते। वह उसूल जो बाकी तत्वों पर भी साबित होते हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि कार्बन जैसा तत्व किसी इत्तेफाक से बन गया। बल्कि यह एक करिशमाई सृजन का ही नमूना दिखाई देता है।
हर तत्व पर साबित इस उसूल को वैलेंसी का उसूल कहा जाता है। इस उसूल के मुताबिक हर तत्व दूसरे से मिलकर एक बन्ध् यानि जोड़ बनाने की कुदरत रखता है। ये जोड़ या तो अलग अलग परमाणु के इलेक्ट्रॉनों के आपसी साझे से बनते हैं या फिर एक परमाणु से दूसरे में ट्रांस्फर के जरिये। कार्बन के पास साझे के लिए चार इलेक्ट्रान होते हैं। यानि उसके पास चार दिशाओं में बांध बनाने की आजादी होती है। अब अगर उसको हाईड्रोजन के चार परमाणु मिल जायें तो वह चारों के साथ एक एक बन्ध् बना लेता है और नतीजे में मिल जाती है मेथेन गैस।
चार बन्ध् बनाने की आजादी का फायदा उठाते हुए कार्बन कुछ बन्ध् तो अपने ही परमाणुओं से जुड़कर बना लेता है और कुछ दूसरे परमाणुओं के साथ। नतीजे में मिलती है एक लम्बी श्रृंखला। जो कभी प्रोटीन की शक्ल में होती है, कभी कार्बोहाईड्रेट, कभी प्लास्टिक तो कभी कुदरती कम्प्यूटर डी-एन-ए की शक्ल में।
प्रोटीन और प्लास्टिक जैसी चीज़ों में दस हजार से भी ज्यादा कार्बन परमाणु आपस में जुड़े रहते हैं। और कुछ दशाओं में यह जोड़ इतने मज़बूत होते हैं कि हजारों टन की ताकत भी उन जोड़ों को तोड़ नहीं पाती। फाइबर जो कि कार्बन की ही उपज है, इसकी अच्छी मिसाल है। यकीनन यह एक करिशमा ही है कि एक कमज़ोर से तत्व में इतनी ताकत पैदा हो गयी है। यह वही कार्बन तो है जो जब एक पत्ती की शक्ल में होता है तो कोई भी उसे आसानी से तोड़ लेता है।
जैसा कि हमने बताया ज़मीन पर जिंदगी के सृजन के लिए कुदरत ने जिस तत्व को चुना वह खास तत्व है कार्बन। जिंदगी के लिए दो चीज़ें ज़रूरी हैं। पहली ये कि जिन्दा प्राणी का कोई जिस्म हो और दूसरी ये कि उस जिस्म को काम करने के लिए उसे ऊर्जा मिलती हो। कार्बन दोनों ही कामों में अहम किरदार निभाता है।
जिस्म को बनाने में प्रोटीन का होना ज़रूरी है। और प्रोटीन का पचास फीसद हिस्सा कार्बन होता है। बाकी पचास फीसद में होते हैं हाईड्रोजन, नाईट्रोजन, ऑक्सीज़न और सल्फर।
दूसरी तरफ जिस्म को ऊर्जा मिलती है कार्बोहाईड्रेट से। कार्बन कार्बोहाईड्रेट का भी खास हिस्सा है। क्योंकि इसमें लगभग चालीस फीसदी कार्बन मौजूद होता है।
अब देखते हैं इंसान की जिंदगी में कार्बन का कहां तक दखल है। कार्बन इंसान की जिंदगी के लिए रहमत है। इंसान की जिंदगी का कोई ऐसा हिस्सा नहीं जहां कार्बन का दखल न हो। इंसान को जीने के लिए जिन चीज़ों की सबसे ज्यादा जरूरत है वह हैं रोटी कपड़ा और मकान।
हमने इससे पहले देखा कि कोई भी ऐसी खाने की चीज़ नहीं जिसमें कार्बन का हिस्सा न हो। यह ठीक है कि नमक में कार्बन नहीं होता, लेकिन किसी के लिए सिर्फ नमक खाना नामुमकिन है।
अब आते हैं कपड़े पर। किसी भी तरह का कपड़ा हो, कार्बन उसका अनिवार्य हिस्सा होता है। साथ में जूते, मोज़े, परफ्यूम, तेल, साबुन, डिटरजेंट, क्रीम हर चीज़ में कार्बन मौजूद होता है। कुदरत का करिशमा देखिए, नायलोन जैसा तेजी से आग पकड़ने वाला कपड़ा भी कार्बन से बना होता है और फायर प्रूफ व बुलेट प्रूफ लिबासों में भी कार्बन ही होता है।
फिर बात आती है मकान की। अगर मकान कच्चा है तो उस घास फूस के बने मकान में कार्बन शामिल होता है। और अगर मकान पक्का है तो स्टील के बिना नहीं बन सकता। और स्टील तब तक नहीं बनता जब तक लोहे में कार्बन की मिलावट न की जाये। एक तरफ यह लोहे में मिक्स होकर सख्त स्टील बनाता है तो दूसरी तरफ हाईड्रोजन से जुड़कर पालीथीन जैसा लचीला पदार्थ बना देता है। मकानों को चमकाने वाला पेन्ट, वार्निश हो या मकान को खूबसूरत बनाने वाले प्लास्टिक शेड्स, डिजाईनदार लकड़ी के दरवाज़े और खूबसूरत बगीचे हों हर जगह कार्बन मौजूद होता है।
दवाएं चाहे एण्टीसेप्टिक हों, एण्टीबायोटिक हों या सल्फा ड्रग्स सब में कार्बन मौजूद होता है।
आज कार्बन की ही वजह से मौजूदा जिंदगी की रफ्तार भी कायम है। सड़कों पर तेज रफ्तार दौड़ती गाड़ियां, शहरों को जोड़ती रेलगाड़ियां, हवाई जहाज़ इन सब को चलाने वाले पेट्रोल और डीज़ल जैसे ईंधन कार्बन के ही उत्पाद हैं। आज इंसान तरक्की की जिन मंजिलों पर है, क्या पेट्रोलियम के बिना उसका ख्याल आ सकता था? और पेट्रोलियम का बदल यानि कोयला खुद भी कार्बन है। दुनिया में बनने वाली बिजली का ज्यादातर हिस्सा कोयले को जलाकर बनता है।
कहां तक गिनाये जायें कार्बन के रंग व रूप। अगर इंसानी जिस्म की बात की जाये तो एक तरफ जिस्म को नुकसान पहुंचाने वाले जरासीम यानि बैक्टीरिया और वायरस कार्बन से बने होते हैं तो दूसरी तरफ इनसे बचने का जिस्म का इम्यून सिस्टम, खून और खून में मौजूद सफेद कण भी कार्बन के ही उत्पाद होते हैं। ज़मीन को उपजाऊ़ बनाने वाले और चीज़ों को सड़ा गलाकर खत्म करने वाले दोनों ही तरह के बैक्टीरिया में कार्बन खास हिस्सा होता है। फलों का रस, शराब और सिरके तीनों में ही कार्बन मौजूद होता है। मजेदार बात ये कि फलों का रस और सिरका तो सेहत के लिए फायदेमन्द है और शराब नुकसानदेय। इन चीज़ों को एक दूसरे में बदलने के पीछे जो बैक्टीरिया शामिल होते हैं उनमें भी कार्बन शामिल होता है।
कार्बन इंसान के ज्ञान का भी बहुत बड़ा स्रोत है। पुरानी चीज़ों की उम्र मालूम करने के लिए विज्ञान ने एक तरीका ईजाद किया है जिसका नाम है कार्बन डेटिंग। दरअसल कार्बन का एक आईसोटोप यानि रिश्तेदार होता है जिसे रेडियो कार्बन या सी - 14 कहा जाता है। जब कोई प्राणी जिन्दा होता है तो वह आम कार्बन और रेडियो कार्बन दोनों को ही अपने जिस्म में सोखता रहता है। लेकिन मरने के बाद वह रेडियो कार्बन को सोखना बन्द कर देता है और उसके मुर्दा जिस्म में मौजूद रेडियो कार्बन धीरे धीरे कम होना शुरू हो जाता है। जिस्म में रेडियोकार्बन का हिस्सा देखकर उसकी उम्र का अंदाजा हो जाता है।
इस तरंह कार्बन पूरी तरंह बुद्धिमान संरचना की झलक पेश करता है।