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  • इल्ट्रोसारस

    बारहवें देवासुर संग्राम के उपरान्त देवताओं,असुरों और दानवों में समझौते की बातचीत प्रारम्भ हुयी। यह निश्चित हुआ कि असुरा गण दजला और फरात नदियों के बीच वाले समस्त भू-भाग पर अपना साम्राज्य स्थापित करें और दानव लोग जो जननी दनु की संतान थे, मध्य क्षेत्र की उस तीव्र गति से बहती हुयी नदी, जिसका नामकरण दनूब हुआ था के उस पार के समस्त भू-क्षेत्र पर अपना अधियत्य जमायें। सभी ने बात मान ली यह जान कर उनके पिता महर्षि कश्यप और माताएँ, दिति, अदिति और दनु प्रसन्न हों गयीं। महर्षि कश्यप आधुनिक कैस्पियन सागर-उन्हें के नाम पर विख्यात कश्यप सागर की सुरम्य भूमि पर स्थित, अपने आश्रम में आनन्द से, पत्नियों के साथ

    रचना: 
  • राम ने न तो सीता जी को वनवास दिया और न शम्बूक का वध किया

    चोरों की प्रशंसा कोई नहीं करता, किन्तु उनके चौर्य कौशल की प्रशंसा तो करना ही पड़ती है। क्योंकि हम सब ही‌ क्या, बैंक आदि भी पूरी सावधानी से पूरे प्रयत्न करते हैं कि चोरी‌ न हो, किन्तु चोरी‌ हो जाती है। चोरियां अनेक प्रकार की होती हैं। मैं इस समय लेखन की चोरी‌ की बात कर रहा हूं।

    विषय: 
  • देखिये बोलिविया की हिम्मत

    दक्षिण अमैरिका में‌ एक ही देश है जहां मैक्डानल्ड, अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी, उपस्थित नहीं‌ है। २४ दिसंबर २०११ को बोलिविया ने उऩ्हें बिदा कर ही दिया।

    मैक्डानल्ड या कोका कोला आदि बहुत सशक्त संस्थाएं हैं, इनके जाल दूर दूर तक फ़ैले रहते हैं।

    बोलिविया की जनता ने 'फ़ास्ट फ़ूड' की संस्कृति का विरोध किया है। उऩ्होंने घोषणा की, “ भोजन को प्रेमे से, समर्पण के भाव से, एक विशेष शुद्धता से और उसे पकने के लिये पूरा आवश्यक समय देते हुए पकाना चाहिये।"

    विषय: 
  • छोटे साहब

        अनेक शतब्दियों पूर्व, नचिकेता ने यमराज से ब्रह्मज्ञान के, लिए आत्मा के विषय में ज्ञान के लिए जिज्ञासा प्रकट की थी। यमराज ने उसे आत्मा के विषय में बताया था। वह आत्म-ज्ञान से युक्त हो गया।
        पर सुबोधन को आत्म ज्ञान कौन देता है, और कैसे देता है क्या आप जानते हैं? यदि नहीं तो....।

    रचना: 
  • श्रीमद्भगवद्गीता में समता की अवधारणा

    समता शब्द तो आज की राजनीति में और सामाजिक सोचविचारों में बहुत ही चर्चित है। समता की अवधारणा हमारे यहां उतनी ही पुरानी है जितना कि ब्रह्म ज्ञान। यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम धर्मों में समता केवल क्रमश: यहूदियों, ईसाइयों तथा मुस्लिमों के लिये है अन्य तो पापी हैं और उनका मोक्ष तब तक नहीं हो सकता कि जब तक वे अपना धर्म बदलकर इन धर्मों में‌ न आ जाएं। अर्थात एक ईसाई के लिये मुस्लिम के साथ या एक मुस्लिम के लिये ईसाई के साथ समता नहीं हो सकती। यहां तक कि इन धर्मों में स्त्रियों की समता भी पुरुषों के साथ नहीं हो सकती। तभी तो स्त्री स्वातंत्र्य का आन्दोलन पश्चिम में १७९० के लगभग प्रारंभ हुआ था, और इस्लाम

  • जीवन की संरचना - बिल ब्रायसन

    सजीव कोशिका जीवन की इकाई होती है तथा इसका अन्तर्निहित पदार्थ जीवन का भौतिक आधार हुआ करता है। कोशिका एक जटिल तंत्र (system) होता है । ‘सूक्ष्म में विराट के

    दर्शन’ का स्मरण हो आता है, जब हम जीवित कोशिका में झाँकना तय करते हैं । हम शायद इसे अपने आस-पास के बहुत सारे विम्बों के सहारे समझ सकते हैं, शायद जैसे अर्जुन ने कृष्ण के विराट स्वरूप को समझा होगा ।

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  • चिन्तन का नियन्त्रण – जॉन क्लाउड, टॉरोण्टो , अनुवादक डा. गंगानंद झा

    टॉरोण्टो के बाहरी इलाके में अवस्थित ऑण्टॉरियो पावर जेनेरेशन न्यूक्लियर प्लाण्ट का एक मैनेजर एक नियमित अभ्यास पूरा कर रहे थे। मैनेजर को प्रदर्शित करना था कि वे बिलकुल सही ढंग से कम्प्यूटर को

    सिमुलेटेड वाल्व्स के एक सीरिज़ को खुलने और बन्द होने का निर्देश दे सकते हैं। सिमुलेटेड वाल्व्स के

    सीरिज़ का खुलना और बन्द होना अन्दर के रेडियो सक्रिय पदार्थों के जल एवम् दवाब के नियन्त्रण करने

    के लिए निर्णायक होता है। यह विशेष प्रदर्शन असामान्य था, इस मायनी में कि लैंज़ैनिन वाल्व्स को अपने

    विषय: 
  • भारत में विज्ञान कथा के उत्साहवर्धन की आवश्यकता

    यह तो एक सुखद समाचार है कि विज्ञान कथा पर एक गैर विज्ञान कथा की भरी पूरी अंग्रेज़ी की प्रभावशाली पत्रिका - 'डाउन टु अर्थ' – के जनवरी‌२०१२ के अंक में पूरे २७ पृष्ठ दिये गए हैं। यह विज्ञान तथा पर्यावरण की पाक्षिक पत्रिका है।

    यह घटना न केवल विज्ञान कथा के लिये शुभ संकेत है, वरन विज्ञान, पर्यावरण, आर्थिक दशा, प्रौद्योगिकी, और समस्त जीवन के लिये शुभ संकेत है। विज्ञान तथा विज्ञान कथा दोनों एक दूसरे के सहायक हैं। किन्तु विज्ञान कथा पढने वाले की दृष्टि मात्र विज्ञान वाले की तरह एकांगी न होकर संतुलित हो जाती है।

  • आम आदमी और आइंस्टाइन

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    1991 में जब मेरी पुस्तक ‘खाड़ीयुद्ध 91’ आई तब उसे देखकर विख्यात नाटकविद पद्मश्री नेमिचंद्र जैन ने मुझसे कहा था कि इसी तरह आइन्स्टाइन के ‘सापेक्षता सिद्धान्त’ को हिन्दी में आम पाठक को समझाने वाली पुस्तक की आवश्यकता है। वह कार्य मुझे करना चाहिये। फिर मैं पक्षियों वाली पुस्तक ‘आनन्द पंछी निहारन का’ इत्यादि में लग गया था। अभी तो एक लेख ही दे पा रहा हूं।आशा करता हूं कि पद्मश्री नेमिचंद्र जी का आग्रह शीघ्र पूरा करूंगा।
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    विषय: 
  • गरीबी के मंच पर अमीरी का डिस्को

    भारत में यह सामाजिक विषय नहीं है, राजनीतिक विषय है - देखा जाए भारत में तो राजनैतिक भी कम, शक्ति हथियाने का औजार अधिक है। जब कि इसे वास्तव में सामाजिक होना चाहिये और राजनीति को उसमें‌ उपयुक्त नीतियां बनाकर मदद करना चाहिये । अपनी‌ नीतियों से यह शासन समृद्धि तो बढ़ा रहा है, भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की और अमीरों की।

    भ्रष्ट शासन से हमें किसी‌ भी प्रकार की उन्नति की आशा करना आकाश कुसुम तोड़ना है।

    विषय: 


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by Dr. Radut.