सरल नहीं इसके कारण की कल्पना करना भी। यह तो ठीक सोचा आपने कि इससे उसका छद्मावरण ( कैमाफ़्लाज) बन जाता है। किन्तु यह गुण तो लग़भग सभी वन्य प्राणियों के रूप में मिलता है, यथा, बाघ, सिंह, गिरगिटान, मादा पक्षी, मछलियां आदि।
आपने शायद सोचा हो कि इससे उसकी पहचान भी बनती है। यह भी ठीक है, यद्यपि हमें तो उसकी इन पट्टियों से पहचान करने में समय लग सकता है। प्रत्येक ज़ीब्रा की पट्टियां यद्यपि समान दिखती हैं, किन्तु उनमें निश्चित अंतर होता है।